23 अक्टूबर 2026
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भारत-चीन एलएसी पर शांति द्विपक्षीय संबंधों की बुनियाद: विदेश मंत्रालय प्रवक्ता

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भारत-चीन एलएसी पर शांति द्विपक्षीय संबंधों की बुनियाद: विदेश मंत्रालय प्रवक्ता

सारांश

विदेश मंत्रालय का संदेश दो-आयामी था — एलएसी पर चीन को शांति बनाए रखने की याद दिलाना और अजरबैजान के साथ संबंधों को नई ऊँचाई देना। जयशंकर की बाकू यात्रा SCO के बाद की कूटनीतिक प्रक्रिया की अगली कड़ी है, जो भारत की काकेशस नीति को मजबूत करती है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 23 अक्टूबर 2026 को कहा कि एलएसी पर शांति भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए अनिवार्य है।
जायसवाल ने स्पष्ट किया कि जब चीनी सेना स्थापित गश्त तौर-तरीकों से भटकती है, सीमा क्षेत्र की स्थिति प्रभावित होती है।
भारत और चीन गलतफहमी रोकने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्रों का उपयोग जारी रखे हुए हैं।
जयशंकर ने बाकू में अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
यह दौरा बिश्केक SCO शिखर सम्मेलन के इतर PM मोदी और राष्ट्रपति अलीयेव की मुलाकात की अगली कड़ी है।
दोनों देशों ने आतंकवाद , सुरक्षा और साझा चुनौतियों पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए अनिवार्य शर्त है। उन्होंने यह भी कहा कि जब चीनी सेना स्थापित गश्त के तौर-तरीकों से भटकती है, तो सीमा क्षेत्रों की स्थिति प्रतिकूल रूप से प्रभावित होती है।

एलएसी पर मौजूदा स्थिति और राजनयिक तंत्र

जायसवाल ने बताया कि भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्रों का इस्तेमाल जारी रखे हुए हैं। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया गलतफहमी और किसी भी प्रकार की गलत गणना को रोकने के उद्देश्य से निरंतर जारी है।

उन्होंने यह भी बताया कि दोनों पक्षों ने बेहतर सीमा प्रबंधन के लिए एलएसी की साझा समझ विकसित करने के तरीकों पर उचित क्षेत्रों में चर्चा करने पर सहमति जताई है। यह ऐसे समय में आया है जब गलवान घटना के बाद से भारत-चीन संबंध सामान्यीकरण की राह पर धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं।

जयशंकर की अजरबैजान यात्रा और राष्ट्रपति अलीयेव से मुलाकात

जायसवाल ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अजरबैजान यात्रा के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जयशंकर ने शुक्रवार को बाकू में अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से भेंट की, जिसमें दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं को आगे बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई।

जायसवाल के अनुसार, विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति अलीयेव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की राष्ट्रपति की ओर से शुभकामनाएँ भी पहुँचाईं। गौरतलब है कि यह दौरा बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति अलीयेव के बीच हुई बैठक की अगली कड़ी है।

भारत-अजरबैजान वार्ता: सुरक्षा और आतंकवाद पर सहमति

विदेश मंत्री जयशंकर ने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद अजरबैजान के विदेश मंत्री के साथ भी विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता की, जिसे सकारात्मक बताया गया। इस वार्ता में सुरक्षा से जुड़े मुद्दों, आतंकवाद और साझा खतरों पर भी विशेष चर्चा हुई।

दोनों पक्षों ने राजनीतिक परामर्श को गहरा करने और व्यापारिक दौरों सहित विभिन्न क्षेत्रों में आपसी यात्राओं के आदान-प्रदान पर सहमति जताई। जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत और अजरबैजान ने दोनों देशों की शांति, समृद्धि और सुरक्षा के लिए परस्पर सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

भारत-चीन संबंधों में यह कूटनीतिक स्वर ऐसे वक्त में उभरा है जब एलएसी पर सैन्य वापसी और गश्त समझौतों को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत कई स्तरों पर जारी है। विशेषज्ञों के अनुसार, सीमा पर स्थायी शांति के बिना व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में संबंधों का सामान्यीकरण सीमित ही रहेगा। वहीं, जयशंकर की बाकू यात्रा भारत की बहु-दिशीय विदेश नीति का हिस्सा है, जो मध्य एशिया और काकेशस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की दिशा में निरंतर सक्रिय है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें निहित संदेश स्पष्ट है — चीन पर सीमा की स्थिति को लेकर सूक्ष्म दबाव। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देश गलवान के बाद के तनाव को कम करने की प्रक्रिया में हैं, पर विश्वास-निर्माण अभी भी अधूरा है। जयशंकर की बाकू यात्रा दर्शाती है कि भारत काकेशस और मध्य एशिया में अपनी कूटनीतिक पहुँच बढ़ाने को गंभीरता से ले रहा है — यह क्षेत्र पारंपरिक रूप से रूस और तुर्किये के प्रभाव में रहा है। असली सवाल यह है कि एलएसी पर 'शांति' की परिभाषा कौन तय करेगा और उसे सत्यापित कौन करेगा।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-चीन एलएसी पर शांति को लेकर विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 23 अक्टूबर 2026 को कहा कि एलएसी पर शांति और स्थिरता भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब चीनी सेना स्थापित गश्त तौर-तरीकों से भटकती है, तो सीमा क्षेत्रों की स्थिति प्रभावित होती है।
भारत और चीन एलएसी विवाद सुलझाने के लिए कौन से तंत्र इस्तेमाल कर रहे हैं?
दोनों देश लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्रों का उपयोग कर रहे हैं। साथ ही, दोनों पक्षों ने बेहतर सीमा प्रबंधन के लिए एलएसी की साझा समझ विकसित करने के तरीकों पर उचित क्षेत्रों में चर्चा करने पर सहमति जताई है।
जयशंकर की अजरबैजान यात्रा का उद्देश्य क्या था?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बाकू में राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और अजरबैजान के विदेश मंत्री से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। यह दौरा बिश्केक SCO शिखर सम्मेलन के इतर PM मोदी और राष्ट्रपति अलीयेव की बैठक के बाद उसी कूटनीतिक प्रक्रिया को आगे ले जाने की कड़ी है।
भारत और अजरबैजान ने किन मुद्दों पर सहमति जताई?
दोनों देशों ने सुरक्षा, आतंकवाद और साझा खतरों पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। राजनीतिक परामर्श को गहरा करने और व्यापारिक दौरों सहित विभिन्न क्षेत्रों में आपसी यात्राओं के आदान-प्रदान पर भी सहमति बनी।
SCO शिखर सम्मेलन का भारत-अजरबैजान संबंधों से क्या संबंध है?
बिश्केक में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन के इतर PM मोदी और राष्ट्रपति अलीयेव के बीच हुई मुलाकात ने दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा दी थी। जयशंकर की बाकू यात्रा उसी पहल को आगे बढ़ाने और द्विपक्षीय सहयोग को ठोस रूप देने का प्रयास है।
राष्ट्र प्रेस
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