जयशंकर का बाकू दौरा: आतंकवाद और सुरक्षा मुद्दों पर भारत-अजरबैजान में सहमति, राष्ट्रपति अलीयेव से भी मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अजरबैजान यात्रा के दौरान आतंकवाद, सीमा पार सुरक्षा खतरों और साझा चुनौतियों पर गहन चर्चा हुई — इसकी पुष्टि विदेश मंत्रालय (MEA) ने 23 अक्टूबर 2026 को की। नई दिल्ली में द्विसाप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह जानकारी दी। दोनों देशों ने अपने नागरिकों की शांति, समृद्धि और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई।
मुख्य घटनाक्रम
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि जयशंकर ने 23 अक्टूबर को बाकू में अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात की, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। जायसवाल ने सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में स्पष्ट किया, 'सुरक्षा संबंधी मुद्दों, आतंकवाद और हमारे सामने मौजूद साझा खतरों पर चर्चा हुई।'
यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति अलीयेव के बीच बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के अवसर पर हुई मुलाकात के बाद संपन्न हुआ। जयशंकर ने राष्ट्रपति अलीयेव को प्रधानमंत्री मोदी और भारत के राष्ट्रपति की ओर से शुभकामनाएं भी दीं।
द्विपक्षीय वार्ता के प्रमुख बिंदु
जयशंकर ने अजरबैजान के विदेश मंत्री जेयहुन बैरामोव के साथ भी विस्तृत बातचीत की। जायसवाल ने इन वार्ताओं को 'उत्पादक' बताते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने राजनीतिक परामर्श को गहरा करने और आर्थिक साझेदारी को मजबूत बनाने पर सहमति जताई।
दोनों देशों के बीच व्यापार एवं निवेश, कनेक्टिविटी, ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और आपसी यात्राओं व व्यापारिक दौरों को प्रोत्साहित करने पर भी चर्चा हुई। जायसवाल के अनुसार, दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक समझ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए एक ठोस आधार प्रदान करती है।
क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भारत का रुख
जयशंकर और बैरामोव ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रमों पर भी अपने-अपने विचार साझा किए। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत करता है — जो क्षेत्र की स्थिरता की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रगति है।
गौरतलब है कि अजरबैजान-आर्मेनिया के बीच दशकों पुराना नागोर्नो-काराबाख विवाद हाल के वर्षों में सुलझने की दिशा में बढ़ा है, और भारत की यह टिप्पणी उसकी शांति-समर्थक विदेश नीति की पुष्टि करती है।
ईरान से छात्रों की निकासी में अजरबैजान का सहयोग
वार्ता के दौरान जयशंकर ने बैरामोव को पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान ईरान से भारतीय छात्रों की निकासी में अजरबैजान की ओर से मिले सहयोग के लिए विशेष रूप से धन्यवाद दिया। यह कूटनीतिक कृतज्ञता दोनों देशों के बीच जनकेंद्रित सहयोग की मिसाल है। विदेश मंत्री ने अपने अजरबैजानी समकक्ष को भारत आने का निमंत्रण भी दिया।
CICA बैठक और आगे की राह
जयशंकर ने हाल ही में CICA (कॉन्फ्रेंस ऑन इंटरैक्शन एंड कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स इन एशिया) की बैठक की सफल मेजबानी के लिए अजरबैजान को बधाई दी। इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने किया था। यह दौरा दोनों देशों के बीच संस्थागत जुड़ाव को नई ऊर्जा देने का संकेत है, और आने वाले महीनों में उच्चस्तरीय आदान-प्रदान की संभावना को बल देता है।