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जयशंकर 23 अक्टूबर को अजरबैजान दौरे पर, द्विपक्षीय संबंधों की होगी समीक्षा

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जयशंकर 23 अक्टूबर को अजरबैजान दौरे पर, द्विपक्षीय संबंधों की होगी समीक्षा

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर की अजरबैजान यात्रा महज़ एक औपचारिक दौरा नहीं — यह भारत की मध्य एशिया नीति में एक नई कड़ी है। बिश्केक में मोदी अलीयेव मुलाकात, राजदूत की नई नियुक्ति और सीआईसीए में भारत की सक्रिय भागीदारी के बाद यह यात्रा संबंधों को ठोस धरातल देने की कोशिश है।

मुख्य बातें

जयशंकर 23 अक्टूबर 2026 को अजरबैजान की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे।
यात्रा का मुख्य उद्देश्य अजरबैजान के समकक्ष के साथ द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करना है।
राजदूत अभय कुमार ने 16 अक्टूबर को राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव को परिचय पत्र सौंपा।
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 15 अक्टूबर को बाकू में सीआईसीए के सातवें शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 सितंबर को बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति अलीयेव से द्विपक्षीय वार्ता की थी।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर 23 अक्टूबर 2026 को अजरबैजान की आधिकारिक यात्रा पर रवाना होंगे, जहाँ वे अजरबैजान के अपने समकक्ष के साथ भारत अजरबैजान द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा करेंगे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के बीच राजनयिक और आर्थिक सहयोग को नई गति देने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं।

यात्रा का उद्देश्य

जयशंकर की यह यात्रा मुख्यतः द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा और सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने पर केंद्रित होगी। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा और सांस्कृतिक सहयोग के मोर्चों पर आगे बढ़ने की संभावनाओं पर चर्चा अपेक्षित है।

राजदूत का परिचय पत्र और प्रतिबद्धता

16 अक्टूबर को अजरबैजान में भारत के राजदूत अभय कुमार ने अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव को अपना परिचय पत्र (क्रेडेंशियल्स) सौंपा। इस अवसर पर कुमार ने भारत और अजरबैजान के बीच संबंधों को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता जताई।

अजरबैजान में भारतीय दूतावास ने एक्स पर बताया, "राजदूत अभय कुमार ने भारत और अजरबैजान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने और उनका विस्तार करने की दिशा में काम करने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाने और दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती और आपसी समझ के पुराने संबंधों को और गहरा करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।"

दूतावास के अनुसार, "बातचीत में भारत और अजरबैजान के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डाला गया, जो हज़ारों वर्षों में विकसित हुए हैं और आज भी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं।"

सीआईसीए शिखर सम्मेलन और 'वसुधैव कुटुंबकम'

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ही विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह अजरबैजान की यात्रा पर थे, जहाँ उन्होंने बाकू में 15 अक्टूबर को आयोजित 'कॉन्फ्रेंस ऑन इंटरेक्शन एंड कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स इन एशिया' (सीआईसीए) के सातवें शिखर सम्मेलन के पूर्ण सत्र को संबोधित किया।

कीर्ति वर्धन सिंह ने एक्स पर लिखा, "शांति, सहयोग, मित्रता और साझा चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत के 'वसुधैव कुटुंबकम' (पूरी दुनिया एक परिवार है) के दृष्टिकोण पर जोर दिया। सभी सदस्य देशों से सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया।"

मोदी अलीयेव मुलाकात का संदर्भ

यह ध्यान देने योग्य है कि 1 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के साथ द्विपक्षीय वार्ता की थी। उसी बैठक का उल्लेख राजदूत कुमार की अलीयेव से मुलाकात के दौरान भी हुआ, जो दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय संवाद का सिलसिला बना हुआ है।

आगे की राह

जयशंकर की इस यात्रा को भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सूत्रों को आर्थिक और रणनीतिक सहयोग में तब्दील करने की दिशा में यह यात्रा एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सीआईसीए में कीर्ति वर्धन सिंह की भागीदारी और अब जयशंकर की द्विपक्षीय यात्रा — यह महज़ संयोग नहीं है। यह भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति को व्यावहारिक रूप देने की सुनियोजित कोशिश दिखती है, जो दक्षिण काकेशस को ट्रांज़िट और ऊर्जा कॉरिडोर के नज़रिये से भी देखती है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह कूटनीतिक सक्रियता व्यापार और निवेश के ठोस आँकड़ों में तब्दील होती है — क्योंकि अब तक दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार उनकी रणनीतिक संभावनाओं के मुकाबले काफी कम रहा है।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एस. जयशंकर की अजरबैजान यात्रा का उद्देश्य क्या है?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर 23 अक्टूबर 2026 को अजरबैजान की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं, जहाँ वे अपने अजरबैजानी समकक्ष के साथ भारत अजरबैजान द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेंगे और सहयोग के नए क्षेत्रों पर चर्चा करेंगे।
भारत और अजरबैजान के बीच हाल में कौन कौन से उच्च स्तरीय संपर्क हुए हैं?
1 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात की थी। 15 अक्टूबर को विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बाकू में सीआईसीए के सातवें शिखर सम्मेलन में भाग लिया, और 16 अक्टूबर को राजदूत अभय कुमार ने राष्ट्रपति अलीयेव को अपना परिचय पत्र सौंपा।
सीआईसीए शिखर सम्मेलन में भारत का क्या रुख रहा?
15 अक्टूबर को बाकू में आयोजित सीआईसीए के सातवें शिखर सम्मेलन में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 'वसुधैव कुटुंबकम' के दर्शन पर आधारित भारत के शांति और सहयोग के दृष्टिकोण को रेखांकित किया। उन्होंने सभी सदस्य देशों से सीमा पार आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान भी किया।
भारत अजरबैजान के बीच संबंधों का ऐतिहासिक आधार क्या है?
भारतीय दूतावास के बयान के अनुसार, दोनों देशों के बीच हज़ारों वर्षों में विकसित सदियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं जो आज भी द्विपक्षीय रिश्तों की मज़बूत नींव प्रदान करते हैं। दोनों पक्षों ने इन संबंधों को आपसी हित के नए क्षेत्रों में सहयोग के माध्यम से और गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई है।
जयशंकर की इस यात्रा से आगे क्या होने की उम्मीद है?
जयशंकर की यात्रा से भारत और अजरबैजान के बीच व्यापार, ऊर्जा और सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। यह यात्रा भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति के तहत दक्षिण काकेशस क्षेत्र के साथ संबंधों को व्यावहारिक और ठोस रूप देने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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