23 अक्टूबर 2026
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जयशंकर की बाकू यात्रा: अजरबैजान के विदेश मंत्री बायरामोव से मुलाकात, व्यापार-ऊर्जा-कनेक्टिविटी पर व्यापक चर्चा

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जयशंकर की बाकू यात्रा: अजरबैजान के विदेश मंत्री बायरामोव से मुलाकात, व्यापार-ऊर्जा-कनेक्टिविटी पर व्यापक चर्चा

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर की बाकू यात्रा महज एक कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं — यह भारत की नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर रणनीति में अजरबैजान को केंद्रीय भागीदार बनाने की कोशिश है। राष्ट्रपति अलीयेव और विदेश मंत्री बायरामोव दोनों से मुलाकात दर्शाती है कि भारत कॉकेशस क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक उपस्थिति को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 23 अक्टूबर 2026 को बाकू में अजरबैजानी समकक्ष जेयहुन बायरामोव से द्विपक्षीय बैठक की।
बैठक में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन, शिक्षा, विज्ञान और सांस्कृतिक सहयोग समेत कई क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
ईस्ट-वेस्ट और नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर , बाकू-तिबिलिसी-कार्स रेलवे और अलात फ्री इकोनॉमिक जोन पर विशेष ज़ोर।
UN, CICA और SCO के ढाँचे के भीतर सहयोग बढ़ाने पर सहमति।
जयशंकर ने राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से भी मुलाकात की और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु व प्रधानमंत्री मोदी की ओर से शुभकामनाएं पहुंचाईं।
बायरामोव ने दक्षिण काकेशस की स्थिति, अजरबैजान-आर्मेनिया सामान्यीकरण प्रक्रिया और मुक्त क्षेत्रों में लैंडमाइंस के खतरे की जानकारी साझा की।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 23 अक्टूबर 2026 को अजरबैजान की राजधानी बाकू में अपने अजरबैजानी समकक्ष जेयहुन बायरामोव से द्विपक्षीय बैठक की। इस मुलाकात में भारत-अजरबैजान संबंधों के पूरे एजेंडे को समेटते हुए राजनीतिक, आर्थिक और क्षेत्रीय सहयोग पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।

बैठक में कौन-से विषय उठे

अजरबैजान के विदेश मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, दोनों मंत्रियों ने राजनीतिक संवाद, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन, शिक्षा, विज्ञान और सांस्कृतिक सहयोग जैसे कई अहम क्षेत्रों पर चर्चा की। यह बैठक भारत और अजरबैजान के बीच बहुआयामी संबंधों को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स पर विशेष जोर

बैठक के दौरान अजरबैजान की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे परिवहन और लॉजिस्टिक्स अवसरों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। इनमें ईस्ट-वेस्ट और नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर, बाकू-तिबिलिसी-कार्स रेलवे, पोर्ट ऑफ बाकू, अलात फ्री इकोनॉमिक जोन और अन्य औद्योगिक क्षेत्र प्रमुख रूप से शामिल रहे। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने व्यापारिक मार्गों के विविधीकरण के लिए मध्य एशिया और कॉकेशस क्षेत्र में सक्रिय रूप से जुड़ाव बढ़ा रहा है।

क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विमर्श

दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र (UN), सीआईसीए (CICA) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के ढाँचे के भीतर आपसी सहयोग को और मज़बूत करने पर सहमति जताई। इसके अलावा, विदेश मंत्री बायरामोव ने दक्षिण काकेशस क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, अजरबैजान-आर्मेनिया संबंधों को सामान्य बनाने की जारी प्रक्रिया और दोनों देशों के बीच विश्वास निर्माण के प्रयासों के बारे में अपने भारतीय समकक्ष को विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने अजरबैजान के मुक्त कराए गए क्षेत्रों में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों और वहाँ अब भी मौजूद बारूदी सुरंगों (लैंडमाइंस) के गंभीर खतरे की जानकारी भी साझा की।

राष्ट्रपति अलीयेव से भी मुलाकात

इसी यात्रा के दौरान जयशंकर ने बाकू में अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से भी भेंट की। जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'सुबह बाकू में अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात करके खुशी हुई। मैंने उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी की ओर से शुभकामनाएं पहुंचाईं। हमने दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। इस साझा प्रयास के प्रति उनके सकारात्मक रुख की सराहना करता हूं।' गौरतलब है कि यह यात्रा भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति के तहत कॉकेशस क्षेत्र में कूटनीतिक जुड़ाव को गति देने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।

आगे क्या होगा

इस बैठक से भारत और अजरबैजान के बीच आर्थिक एवं कूटनीतिक संबंधों में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। विशेष रूप से नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के सक्रिय होने की स्थिति में, बाकू भारत के लिए यूरोप और रूस को जोड़ने वाले एक अहम ट्रांजिट हब के रूप में उभर सकता है। दोनों देश आपसी सहयोग के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इसीलिए यह यात्रा रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। हालाँकि, अजरबैजान-आर्मेनिया तनाव के बीच दिल्ली को एक सूक्ष्म संतुलन बनाए रखना होगा — विशेषकर जब भारत और आर्मेनिया के बीच भी रक्षा सहयोग बढ़ रहा है। अगर कॉरिडोर परियोजना ज़मीन पर उतरती है तो यह कूटनीति, वरना यह भी उन उच्च-स्तरीय यात्राओं की सूची में जुड़ जाएगी जिनके बाद ठोस नतीजे नहीं निकले।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर की अजरबैजान यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की बाकू यात्रा का मुख्य उद्देश्य अजरबैजान के साथ व्यापार, ऊर्जा, परिवहन कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग को मज़बूत करना था। उन्होंने अजरबैजानी विदेश मंत्री बायरामोव और राष्ट्रपति अलीयेव दोनों से मुलाकात की।
नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर में अजरबैजान की क्या भूमिका है?
अजरबैजान नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर का एक अहम पड़ाव है, जो भारत को ईरान, अजरबैजान और रूस के ज़रिए यूरोप से जोड़ता है। बाकू का बंदरगाह, रेलवे नेटवर्क और अलात फ्री इकोनॉमिक जोन इस मार्ग के लिए महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स हब की भूमिका निभा सकते हैं।
बैठक में अजरबैजान-आर्मेनिया मुद्दे पर क्या चर्चा हुई?
अजरबैजान के विदेश मंत्री बायरामोव ने जयशंकर को दक्षिण काकेशस की स्थिति और अजरबैजान-आर्मेनिया संबंधों को सामान्य बनाने की जारी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मुक्त कराए गए क्षेत्रों में पुनर्निर्माण और लैंडमाइंस के खतरे का भी उल्लेख किया।
जयशंकर ने राष्ट्रपति अलीयेव को क्या संदेश दिया?
जयशंकर ने राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं पहुंचाईं। उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को और मज़बूत बनाने पर चर्चा की और अलीयेव के सकारात्मक रुख की सराहना की।
भारत और अजरबैजान के बीच किन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी?
दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र (UN), सीआईसीए (CICA) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के ढाँचे के भीतर आपसी सहयोग को मज़बूत करने पर सहमति जताई। इसके साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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