23 अक्टूबर 2026
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जयशंकर के बाकू दौरे पर अजरबैजान: भारत से संबंध 'नई ऊंचाइयों' पर, ₹5,000 करोड़ से अधिक का द्विपक्षीय व्यापार

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जयशंकर के बाकू दौरे पर अजरबैजान: भारत से संबंध 'नई ऊंचाइयों' पर, ₹5,000 करोड़ से अधिक का द्विपक्षीय व्यापार

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर का बाकू दौरा महज़ एक शिष्टाचार भेंट नहीं था — यह SCO शिखर सम्मेलन में मोदी-अलीयेव मुलाकात के बाद भारत-अजरबैजान संबंधों को व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी के धरातल पर उतारने की कोशिश है, जहाँ 600 मिलियन डॉलर का व्यापार अपनी वास्तविक क्षमता से कहीं कम माना जा रहा है।

मुख्य बातें

अजरबैजान के विदेश मंत्री जेयहुन बैरामोव ने 23 अक्टूबर 2026 को विदेश मंत्री एस.
जयशंकर के बाकू दौरे को 'बेहद महत्वपूर्ण' बताया।
इस वर्ष भारत-अजरबैजान द्विपक्षीय व्यापार लगभग 600 मिलियन डॉलर रहा, जिसे दोनों पक्षों ने अपनी वास्तविक क्षमता से कम माना।
ONGC ने अजरबैजान की एक प्रमुख तेल एवं गैस परियोजना में हिस्सेदारी बढ़ाई; अजरबैजान में 1,000 से अधिक भारतीय कंपनियां कार्यरत।
यह दौरा बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान PM मोदी और राष्ट्रपति अलीयेव की मुलाकात की अगली कड़ी है।
इस वर्ष 500 भारतीय छात्र अजरबैजान के विश्वविद्यालयों में; पिछले कुछ वर्षों में 30 से अधिक भारतीय फिल्मों की शूटिंग वहाँ हुई।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बाकू दौरे के बाद अजरबैजान के विदेश मंत्री जेयहुन बैरामोव ने 23 अक्टूबर 2026 को विश्वास जताया कि भारत और अजरबैजान के संबंध 'नई ऊंचाइयों' की ओर बढ़ रहे हैं। बैरामोव ने इस मुलाकात को 'बेहद महत्वपूर्ण' बताते हुए कहा कि ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और परिवहन गलियारों में सहयोग की असीम संभावनाएं मौजूद हैं।

बातचीत का दायरा और मुख्य घटनाक्रम

बैरामोव ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच लंबी, सकारात्मक और सार्थक वार्ता हुई, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि जयशंकर का यह दौरा पिछले महीने बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के बीच हुई मुलाकात की स्वाभाविक अगली कड़ी है।

इससे पहले, जयशंकर ने बाकू में राष्ट्रपति अलीयेव से भी मुलाकात की और दोनों देशों के बीच संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने पर बातचीत की।

आर्थिक संबंध और व्यापार की संभावनाएं

आर्थिक मोर्चे पर बैरामोव ने बताया कि इस वर्ष दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 600 मिलियन डॉलर (करीब ₹5,000 करोड़) रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह आंकड़ा दोनों देशों की वास्तविक व्यापारिक क्षमता को पूरी तरह नहीं दर्शाता।

उल्लेखनीय है कि भारत की तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) ने अजरबैजान की एक प्रमुख तेल एवं गैस परियोजना में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। इसके अतिरिक्त, अजरबैजान में 1,000 से अधिक भारतीय कंपनियां पहले से ही कार्यरत हैं, जो इस साझेदारी की मज़बूत नींव को दर्शाता है।

परिवहन गलियारे और रणनीतिक महत्व

बैरामोव ने अजरबैजान की भौगोलिक स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा कि पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण मार्गों को जोड़ने वाले परिवहन गलियारों में दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) के ज़रिए मध्य एशिया और यूरोप तक अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने पर ज़ोर दे रहा है।

लोगों के बीच संपर्क और सांस्कृतिक जुड़ाव

लोगों के आपसी संपर्क के संदर्भ में बैरामोव ने बताया कि फिलहाल बाकू और नई दिल्ली के बीच दो सीधी उड़ानें संचालित हो रही हैं। इस वर्ष लगभग 500 भारतीय छात्रों ने अजरबैजान के विश्वविद्यालयों में दाखिला लिया है, जबकि पिछले कुछ वर्षों में 30 से अधिक भारतीय फिल्मों की शूटिंग अजरबैजान में हो चुकी है।

क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा

बैरामोव के अनुसार, दोनों नेताओं ने दक्षिण काकेशस की स्थिति, आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया, मध्य पूर्व में तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे अहम मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। बैरामोव ने कहा, 'हमारा मानना है कि यह दौरा और विभिन्न मुद्दों पर हुई बातचीत दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के विकास पर सकारात्मक प्रभाव डालेगी।'

जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'आज सुबह बाकू में अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात कर खुशी हुई। उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाएं दीं। दोनों देशों के बीच संबंधों को मज़बूत बनाने पर चर्चा की।' यह दौरा भारत की बहुआयामी विदेश नीति और मध्य एशिया में बढ़ते कूटनीतिक सक्रियता का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह आंकड़ा भारत के चीन या अमेरिका से व्यापार की तुलना में बौना है। असली परीक्षण यह होगा कि क्या ONGC की बढ़ी हुई हिस्सेदारी और परिवहन गलियारों की बात ठोस परियोजनाओं में बदलती है। गौरतलब है कि भारत मध्य एशियाई देशों के साथ बार-बार 'नई ऊंचाइयों' की घोषणाएं करता है, लेकिन वास्तविक व्यापार वृद्धि अक्सर राजनयिक उत्साह से पीछे रहती है — इस दौरे की सफलता की कसौटी अगले 12 महीनों के व्यापार आंकड़ों में दिखनी चाहिए।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदेश मंत्री जयशंकर ने बाकू दौरे में किन मुद्दों पर चर्चा की?
जयशंकर ने 23 अक्टूबर 2026 को बाकू में अजरबैजान के विदेश मंत्री बैरामोव और राष्ट्रपति अलीयेव से मुलाकात की, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार, ऊर्जा सहयोग, परिवहन गलियारे, दक्षिण काकेशस की स्थिति और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।
भारत और अजरबैजान के बीच द्विपक्षीय व्यापार कितना है?
2026 में भारत और अजरबैजान के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 600 मिलियन डॉलर रहा है। अजरबैजान के विदेश मंत्री बैरामोव के अनुसार, यह आंकड़ा दोनों देशों की वास्तविक व्यापारिक क्षमता को पूरी तरह नहीं दर्शाता।
ONGC का अजरबैजान में क्या निवेश है?
भारत की तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) ने अजरबैजान की एक प्रमुख तेल एवं गैस परियोजना में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। इसके अलावा, अजरबैजान में 1,000 से अधिक भारतीय कंपनियां पहले से ही कार्यरत हैं।
जयशंकर का बाकू दौरा SCO शिखर सम्मेलन से कैसे जुड़ा है?
बैरामोव ने स्पष्ट किया कि जयशंकर का यह दौरा बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान PM मोदी और राष्ट्रपति अलीयेव के बीच हुई मुलाकात की स्वाभाविक अगली कड़ी है। उस मुलाकात में जो दिशा तय हुई थी, इस दौरे में उसे व्यावहारिक रूप देने की कोशिश की गई।
भारत-अजरबैजान के बीच लोगों का आपसी संपर्क कैसा है?
बाकू और नई दिल्ली के बीच फिलहाल दो सीधी उड़ानें संचालित हो रही हैं। इस वर्ष लगभग 500 भारतीय छात्रों ने अजरबैजान के विश्वविद्यालयों में दाखिला लिया है और पिछले कुछ वर्षों में 30 से अधिक भारतीय फिल्मों की शूटिंग अजरबैजान में हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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