जयशंकर का बाकू दौरा: भारत अजरबैजान के साझा हित शांति व समृद्धि, आतंकवाद 'साझा दुश्मन'
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 23 अक्टूबर 2026 को अजरबैजान की राजधानी बाकू में कहा कि भारत और अजरबैजान के साझा हित शांति, प्रगति और समृद्धि को आगे बढ़ाने में हैं, तथा आतंकवाद, संघर्ष और अस्थिरता दोनों देशों के 'साझा दुश्मन' हैं। अजरबैजान के विदेश मंत्री जेयहुन बैरामोव के साथ संयुक्त प्रेस वक्तव्य में उन्होंने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने की प्रतिबद्धता दोहराई।
मुख्य घटनाक्रम
जयशंकर ने बाकू पहुँचने के तुरंत बाद अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात की और उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएँ दीं। बैठक में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं — मौजूदा सहयोग, नए क्षेत्रों और संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों — पर विस्तृत चर्चा हुई। जयशंकर ने इस बातचीत को 'केंद्रित और भविष्य की दिशा तय करने वाली' बताया।
क्षेत्रीय शांति पर भारत का रुख
जयशंकर ने अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच पिछले साल अगस्त में हुए शांति समझौते का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि इससे क्षेत्र में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा, "भारत का स्पष्ट रुख है कि विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए।" उन्होंने मध्य पूर्व, पश्चिम एशिया, यूरोप और यूरेशिया के घटनाक्रमों पर भी चर्चा का उल्लेख किया और कहा कि इन संघर्षों के कारण ग्लोबल साउथ की अर्थव्यवस्थाओं को खाद्य पदार्थों, ईंधन, उर्वरक और वित्त से जुड़ी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
आर्थिक सहयोग और कनेक्टिविटी
विदेश मंत्री ने व्यापार, निवेश और ऊर्जा को द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएँ एक दूसरे की पूरक हैं और द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश बढ़ाने की व्यापक संभावनाएँ हैं। वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था में कनेक्टिविटी के महत्व पर जोर देते हुए जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) का विशेष उल्लेख किया, जिसमें ईरान की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। दोनों देशों ने इस गलियारे में आपसी समन्वय को और मजबूत करने पर सहमति जताई। हवाई संपर्क विस्तार पर भी विचार विमर्श हुआ — जयशंकर ने कहा कि प्रतिदिन उड़ानें तो संचालित होती हैं, लेकिन द्विपक्षीय संबंधों की गहराई के अनुरूप हवाई संपर्क बढ़ाने की संभावनाओं पर ध्यान देना होगा।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर आभार
जयशंकर ने इस साल की शुरुआत में ईरान में संघर्ष के दौरान भारतीय नागरिकों, विशेषकर छात्रों को निकालने में अजरबैजान की सहायता के लिए विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "अजरबैजान में हमारे भारतीय छात्र हैं। मैं उनकी जिस देखभाल और संवेदनशीलता के साथ आप देखभाल करते हैं, उसके लिए आपको धन्यवाद देना चाहता हूँ। इस साल की शुरुआत में ईरान में संघर्ष के दौरान भारतीय नागरिकों, विशेषकर छात्रों को वहाँ से निकालने में आपकी सहायता के लिए भी मैं विशेष रूप से आभार व्यक्त करना चाहता हूँ।" यह टिप्पणी इस दौरे के मानवीय आयाम को उजागर करती है।
आगे की राह
जयशंकर ने अजरबैजान के विदेश मंत्री बैरामोव को सुविधानुसार जल्द भारत आने का निमंत्रण दिया। दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों में सुधार तथा विस्तार पर चर्चा करते हुए इन संस्थानों को समकालीन जरूरतों के अनुरूप अधिक प्रासंगिक बनाने की आवश्यकता पर भी सहमति जताई। यह दौरा भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति के तहत यूरेशियाई देशों के साथ कूटनीतिक जुड़ाव को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।