जयशंकर की अबू धाबी में जॉर्जियाई विदेश मंत्री से मुलाकात, व्यापार-पर्यटन-कनेक्टिविटी पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 14 अक्टूबर 2026 को अपनी तीन दिवसीय अबू धाबी यात्रा के दौरान जॉर्जिया की विदेश मंत्री माका बोत्चोरिश्विली से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, पर्यटन, शिक्षा, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक सहयोग सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करने पर विस्तृत चर्चा हुई। यह बैठक भारत की काकेशस क्षेत्र में बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के नज़रिए से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए कहा कि 'जॉर्जिया की विदेश मंत्री माका बोत्चोरिश्विली से मिलकर खुशी हुई। व्यापार, पर्यटन और शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में हमारे संबंधों का विस्तार हुआ है।' बैठक में दोनों पक्षों ने बिजनेस, कनेक्टिविटी, संस्कृति और पीपुल-टू-पीपुल संपर्क पर सहयोग गहरा करने के साथ-साथ मौजूदा क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
इसी यात्रा के दौरान यूएई की अंतरराष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री रीम अल हाशिमी ने अबू धाबी में जयशंकर का गर्मजोशी से स्वागत किया। जयशंकर ने एक्स पर लिखा, 'अबू धाबी पहुंच गया हूं। गर्मजोशी से स्वागत के लिए मंत्री रीम अल हाशिमी को धन्यवाद।'
भारत-जॉर्जिया संबंधों की पृष्ठभूमि
भारत और जॉर्जिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय छात्रों की बड़ी संख्या जॉर्जिया में मेडिकल और अन्य प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों के लिए जाती है, जो दोनों देशों के बीच पीपुल-टू-पीपुल संबंधों की एक मज़बूत कड़ी है। व्यापारिक लेन-देन में भी वृद्धि दर्ज की गई है और पर्यटन एक उभरते हुए सहयोग-क्षेत्र के रूप में सामने आया है।
गौरतलब है कि भारत मध्य एशिया और यूरोप के साथ संपर्क बढ़ाने पर रणनीतिक रूप से जोर दे रहा है। इस संदर्भ में जॉर्जिया एक महत्वपूर्ण भौगोलिक कड़ी के रूप में उभर सकता है, क्योंकि यह काकेशस क्षेत्र में स्थित होकर यूरोप और एशिया के बीच सेतु का काम करता है।
क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा
बैठक में यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जैसे अहम मुद्दों पर भी दोनों विदेश मंत्रियों ने अपने-अपने दृष्टिकोण साझा किए। भारत का संतुलित और संवाद-आधारित समाधान का पक्ष जॉर्जिया के सामने रखा गया। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं और भारत अपनी 'मल्टी-अलाइनमेंट' नीति को और व्यापक आधार देने में जुटा है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विशेषज्ञों के अनुसार यह मुलाकात भारत की यूरोप और काकेशस क्षेत्र में बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। भारत रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों के साथ अपने संबंधों को विविधता देने की नीति पर काम कर रहा है, और जॉर्जिया के साथ यह उच्च-स्तरीय बैठक उसी दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।
आगे की राह
जयशंकर की तीन दिवसीय अबू धाबी यात्रा के दौरान भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने पर भी ध्यान केंद्रित है। मंत्री रीम अल हाशिमी के साथ होने वाली बातचीत के बाद इस यात्रा की दिशा और स्पष्ट होगी। भारत-जॉर्जिया संबंधों में कनेक्टिविटी और व्यापार के नए अध्याय खुलने की संभावना इस बैठक के बाद और प्रबल हो गई है।