जयशंकर की यूएई विदेश मंत्री अल-नाहयान से अबू धाबी में मुलाकात, भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर 15 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक दौरे पर अबू धाबी पहुँचे और वहाँ उन्होंने अपने यूएई समकक्ष, उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल-नाहयान से विस्तृत बातचीत की। दोनों नेताओं ने भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी के ढाँचे के तहत द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। यह दौरा मध्य-पूर्व में बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच हो रहा है, जो इसे कूटनीतिक दृष्टि से विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।
मुख्य बैठक और एक्स पर साझा संदेश
जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "यूएई के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल-नाहयान के साथ गर्मजोशी और सार्थक मुलाकात हुई। हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी की भावना के तहत द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।" अबू धाबी पहुँचने पर यूएई की मंत्री रीम अल-हाशिमी ने उनका स्वागत किया।
इससे पहले दोनों नेताओं ने 'रायसीना डायलॉग' के मध्य-पूर्व सत्र — 'द वर्ल्ड अहेड: पावर, पर्पज एंड पॉसिबिलिटी' — में संयुक्त रूप से भाग लिया। इस सत्र में कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों और बहुपक्षीय सहयोग की ज़रूरत पर विशेष ज़ोर दिया गया।
वैश्विक व्यवस्था और नई साझेदारियों पर जयशंकर का रुख
जयशंकर ने एक्स पर कहा कि बैठक में इस बात को रेखांकित किया गया कि दुनिया की व्यवस्था तेज़ी से बदल रही है — यह परिवर्तन दीर्घकालिक प्रवृत्तियों और हाल की घटनाओं, दोनों का परिणाम है। उन्होंने कहा, "हर देश अपनी परिस्थितियों के अनुसार प्रतिक्रिया देता है। इसीलिए नए साझेदारों और नए विकल्पों की तलाश स्वाभाविक है।"
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि आज की साझेदारियाँ पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर अधिक रणनीतिक समझ की माँग करती हैं। उन्होंने बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार को ज़रूरी बताते हुए कहा कि इसे छोटे किंतु ठोस सहयोगी समूहों के ज़रिए बल दिया जा सकता है। उन्होंने पिछले एक दशक में भारत-यूएई साझेदारी को इस बदलाव का बेहतरीन उदाहरण बताया।
क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब मध्य-पूर्व में तनाव का माहौल बना हुआ है। ईरान में जारी संघर्ष और यमन में हूती समूह तथा सऊदी अरब के बीच बढ़ी तनातनी ने क्षेत्र की भू-राजनीतिक स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में भारत के शीर्ष कूटनीतिज्ञ का यूएई दौरा दोनों देशों के आपसी विश्वास और नीतिगत समन्वय का संकेत देता है।
भारतीय नाविकों का सुरक्षित बचाव और पायलट का उपचार
इस दौरे के बीच दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने जानकारी दी कि कच्चे तेल के टैंकर 'एमटी जेम नंबर 2' में हुए हादसे के बाद 22 भारतीय चालक दल के सदस्यों को रस अल-खैमाह तट के निकट सुरक्षित बचा लिया गया। वाणिज्य दूतावास ने एक्स पर पुष्टि की कि सभी नाविक सुरक्षित हैं और यूएई अधिकारियों के साथ निरंतर समन्वय जारी है।
इसी क्रम में, फ्लाइदुबई की उड़ान एफजेड1073 के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार — जिन्होंने सह-पायलट के हमले का सामना करते हुए 174 यात्रियों की जान बचाई थी — इस समय अबू धाबी के एक अस्पताल में उपचाराधीन हैं और उनकी स्थिति में सुधार की रिपोर्ट है।
आगे की दिशा
गौरतलब है कि भारत-यूएई साझेदारी पिछले कुछ वर्षों में व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और प्रवासी मामलों में तेज़ी से विस्तृत हुई है। विश्लेषकों के अनुसार, जयशंकर का यह दौरा दोनों देशों के बीच रणनीतिक संवाद को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। आने वाले हफ्तों में इस बैठक के ठोस परिणाम सामने आने की संभावना है।