1 सितंबर 2026
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एससीओ समिट बिश्केक: जयशंकर की लावरोव, अराघची और वांग यी से संक्षिप्त मुलाकात

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एससीओ समिट बिश्केक: जयशंकर की लावरोव, अराघची और वांग यी से संक्षिप्त मुलाकात

सारांश

बिश्केक में 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन के इतर विदेश मंत्री जयशंकर ने रूस के लावरोव, ईरान के अराघची, चीन के वांग यी और ताजिकिस्तान के मुहरिद्दीन से मुलाकात की। पीएम मोदी ने आतंकवाद पर दोहरे रवैये को नकारते हुए पाक की मौजूदगी में कड़ा संदेश दिया।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 1 सितंबर 2026 को बिश्केक में एससीओ समिट के हाशिये पर रूसी विदेश मंत्री सर्जेई लावरोव और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से संक्षिप्त मुलाकात की।
जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी और ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन से भी बातचीत की।
26वाँ एससीओ शिखर सम्मेलन संगठन की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित हुआ, थीम: 'स्थायी शांति, विकास और समृद्धि'।
प्रधानमंत्री मोदी ने शहबाज शरीफ की उपस्थिति में आतंकवाद पर दोहरे रवैये को अस्वीकार्य बताया और आतंकी इकोसिस्टम को ध्वस्त करने की वकालत की।
शिखर सम्मेलन में मोदी ने शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी कीं।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 1 सितंबर 2026 को बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के इतर रूस, ईरान, ताजिकिस्तान और चीन के अपने समकक्षों से संक्षिप्त द्विपक्षीय मुलाकातें कीं। जयशंकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं, जो किर्गिस्तान की राजधानी में इस महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

किससे-किससे हुई मुलाकात

जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी कि उन्होंने रूसी विदेश मंत्री सर्जेई लावरोव और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से एससीओ समिट के हाशिये पर संक्षिप्त बातचीत की। साझा की गई तस्वीरों में वे तीनों एक साथ और अराघची के साथ अलग से सहज मुद्रा में दिखे। इसके अतिरिक्त, ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन से भी मुलाकात हुई, जिसे जयशंकर ने 'काफी अच्छी बातचीत' बताया।

चीनी विदेश मंत्री वांग यी — जो पोलितब्यूरो के सदस्य भी हैं — से मुलाकात का उल्लेख करते हुए जयशंकर ने लिखा कि उनसे मिलकर अच्छा लगा। भारत-चीन संबंधों के हालिया सामान्यीकरण की पृष्ठभूमि में यह मुलाकात विशेष महत्व रखती है।

26वाँ एससीओ शिखर सम्मेलन: पृष्ठभूमि

26वाँ एससीओ शिखर सम्मेलन एससीओ की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर बिश्केक, किर्गिस्तान में आयोजित किया गया। इसकी थीम 'स्थायी शांति, विकास और समृद्धि के लिए मिलकर काम करना' रखी गई। शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी के अलावा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शामिल रहे। मंच पर तीनों नेताओं की उपस्थिति और उनके बीच हुई अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें वैश्विक कूटनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र रहीं।

मोदी का आतंकवाद पर कड़ा संदेश

एससीओ शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के विरुद्ध सामूहिक और ठोस कार्रवाई का आह्वान किया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उपस्थिति में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरा रवैया स्वीकार्य नहीं है। मोदी ने आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को जड़ से नष्ट करने की पुरज़ोर वकालत की — एक संदेश जो स्पष्ट रूप से पाकिस्तान की ओर इशारा करता था।

कूटनीतिक महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब भारत की बहुआयामी विदेश नीति — पश्चिम के साथ साझेदारी और रूस-ईरान जैसे देशों के साथ कार्यशील संबंध — वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच परखी जा रही है। गौरतलब है कि जयशंकर की लावरोव और अराघची से मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब पश्चिमी देश रूस और ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं। भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति इन मुलाकातों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।

आगे की कूटनीतिक गतिविधियों पर सभी की नज़र बनी रहेगी, खासकर तब जब भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के बाद संबंध सामान्यीकरण की प्रक्रिया जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अराघची और वांग यी से मिलना भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' का व्यावहारिक प्रदर्शन है — पश्चिमी प्रतिबंधों की परवाह किए बिना। लेकिन यह कूटनीतिक संतुलन तब तक आसान है जब तक संघर्ष दूर रहे; यूक्रेन युद्ध के लंबे खिंचने और ईरान-इज़रायल तनाव के बीच भारत की यह 'सबसे अच्छे दोस्त' वाली नीति कब तक टिकेगी, यह असली सवाल है। मोदी का आतंकवाद पर पाक के सामने दिया संदेश राजनीतिक दृष्टि से सशक्त था, पर एससीओ मंच पर इसका व्यावहारिक असर सीमित रहेगा जब तक सदस्य देश सहमति से कार्रवाई न करें।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एससीओ समिट 2026 में जयशंकर ने किन नेताओं से मुलाकात की?
विदेश मंत्री जयशंकर ने बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के इतर रूसी विदेश मंत्री सर्जेई लावरोव, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची, चीनी विदेश मंत्री वांग यी और ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन से संक्षिप्त मुलाकातें कीं।
26वाँ एससीओ शिखर सम्मेलन कहाँ और कब हुआ?
26वाँ एससीओ शिखर सम्मेलन 1 सितंबर 2026 को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित हुआ। यह सम्मेलन एससीओ की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हुआ और इसकी थीम 'स्थायी शांति, विकास और समृद्धि के लिए मिलकर काम करना' थी।
पीएम मोदी ने एससीओ समिट में आतंकवाद पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उपस्थिति में स्पष्ट किया कि आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरा रवैया नहीं चलेगा और आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को नष्ट करने की आवश्यकता है।
एससीओ समिट में भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया?
भारत का प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने किया, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी शामिल थे। मोदी ने शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी कीं।
जयशंकर की वांग यी से मुलाकात का क्या महत्व है?
भारत-चीन सीमा विवाद के बाद संबंध सामान्यीकरण की चल रही प्रक्रिया के बीच जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी की यह मुलाकात कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जयशंकर ने इसे सकारात्मक बताया।
राष्ट्र प्रेस
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