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झारखंड में बाढ़ का कहर: गंगा खतरे के निशान से 0.46 मीटर ऊपर, 10 जिलों में येलो अलर्ट

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झारखंड में बाढ़ का कहर: गंगा खतरे के निशान से 0.46 मीटर ऊपर, 10 जिलों में येलो अलर्ट

सारांश

पाँच दिनों की अविराम बारिश ने झारखंड को बेहाल कर दिया है — गंगा खतरे के निशान से ऊपर है, 55 साल पुराना पुल ढह गया और 10 हज़ार लोग संपर्क से कटे हैं। 10 जिलों में येलो अलर्ट के बीच राहत शिविर चल रहे हैं।

मुख्य बातें

झारखंड में पाँच दिनों की लगातार मूसलाधार बारिश से साहिबगंज, लातेहार, गढ़वा, पलामू, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम समेत कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात।
साहिबगंज में गंगा नदी खतरे के निशान 27.25 मीटर से 0.46 मीटर ऊपर 27.71 मीटर पर; दियारा इलाकों में स्थिति गंभीर।
लातेहार में 55 साल पुराना पुल ढहा, करीब 10 हज़ार की आबादी प्रभावित; गढ़वा में टुकवा नदी पर पुल भी बहा।
सरायकेला में खरकई नदी खतरे के निशान से 2.03 मीटर ऊपर ; जमशेदपुर के डूब क्षेत्र में हाई अलर्ट ।
मौसम केंद्र रांची ने 1 सितंबर को 10 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी रखा; राहत शिविर और पशु राहत शिविर स्थापित।
रांची के तिगरा में ₹2.75 करोड़ की लागत से बना नया पुल भी क्षतिग्रस्त।

झारखंड में पिछले पाँच दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने राज्य के बड़े हिस्से को बाढ़ की चपेट में ले लिया है। साहिबगंज में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान 27.25 मीटर से 0.46 मीटर ऊपर 27.71 मीटर पर बना हुआ है। साहिबगंज, लातेहार, गढ़वा, पलामू, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम समेत कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात हैं, पुल ध्वस्त हो रहे हैं और हज़ारों लोग प्रभावित हैं।

मौसम अलर्ट और नदियों की स्थिति

मौसम केंद्र रांची ने 1 सितंबर को गढ़वा, पलामू, चतरा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, रांची, खूंटी, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी रखा है। इन इलाकों में कहीं-कहीं भारी बारिश की आशंका बनी हुई है।

सरायकेला में खरकई नदी खतरे के निशान से 2.03 मीटर ऊपर बह रही है, जिसके बाद बांकाबल और खरकई डैम के फाटक खोल दिए गए हैं। जमशेदपुर के आदित्यपुर और मानगो इलाकों में स्वर्णरेखा और खरकई नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए डूब क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी सिंहभूम के मुसाबनी में ओडिशा के रायरंगपुर डैम से पानी छोड़े जाने के बाद शंख नदी उफान पर है और बाकड़ा पुल के ऊपर करीब छह फीट पानी बह रहा है।

पुल ध्वस्त, हज़ारों प्रभावित

लातेहार जिले के महुआडांड़-मेदिनीनगर मुख्य पथ पर राजदंडा नदी पर बना करीब 55 साल पुराना पुल तेज बहाव में ढह गया। इससे महुआडांड़, गारू, लातेहार और पलामू मार्ग पर वाहनों का परिचालन ठप हो गया है और करीब 10 हज़ार की आबादी प्रभावित बताई जा रही है।

गढ़वा जिले के रंका प्रखंड के सिरोईकला में टुकवा नदी पर बना पुल भी बाढ़ के तेज बहाव में बह गया, जिससे चरक पथली, टिकर चोइया और सिरोईकला गाँवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। रांची के तिगरा में करीब ₹2.75 करोड़ की लागत से हाल ही में बना पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया है।

साहिबगंज और लातेहार में जनजीवन अस्त-व्यस्त

रामनगर, चानन और सरपना समेत कई गाँवों में बाढ़ का पानी फैला हुआ है। राजमहल के मोकिमपुर और बालू टोला में सैकड़ों घरों में पानी घुस गया है और लोग नावों के सहारे सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं। उधवा में बाढ़ के कारण सैकड़ों एकड़ फसल पानी में डूब गई है और उधवा पक्षी अभयारण्य के निचले जलग्रहण क्षेत्रों में भी जलभराव की स्थिति है।

लातेहार के छिपादोहर में सतनदिया नाला उफान पर है, जिससे गारू-बेतला-पलामू मार्ग सात जगहों पर प्रभावित हुआ है और वाहनों का परिचालन रोक दिया गया है। लोध फॉल और सुग्गा बांध के उफान पर होने के कारण सुरक्षा के मद्देनज़र इन पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।

राहत एवं बचाव कार्य

प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है। उपायुक्तों के निर्देश पर सरकारी स्कूलों में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं और तटबंधों पर पशु राहत शिविर भी बनाए गए हैं। प्रभावित लोगों को सूखा राशन, तिरपाल और दवाइयाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे उत्तर-पूर्व और मध्य भारत में मानसून सामान्य से अधिक सक्रिय है और कई राज्य एक साथ बाढ़ की मार झेल रहे हैं।

आने वाले दिनों में बारिश की तीव्रता में कमी आने तक नदियों का जलस्तर ऊँचा बने रहने की आशंका है, और प्रशासन की नज़र विशेष रूप से गंगा के दियारा इलाकों पर बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पुल टूटते हैं, राहत शिविर लगते हैं और फिर पानी उतरने के साथ चर्चा भी थम जाती है। 55 साल पुराने पुल का ढहना और ₹2.75 करोड़ की लागत से हाल में बने पुल का क्षतिग्रस्त होना — दोनों एक साथ — बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। राहत वितरण तात्कालिक ज़रूरत है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि बाढ़-प्रवण दियारा इलाकों के लिए दीर्घकालिक नदी प्रबंधन और बाढ़-रोधी बुनियादी ढाँचे की योजना कब बनती है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में बाढ़ की स्थिति अभी कैसी है?
झारखंड के साहिबगंज, लातेहार, गढ़वा, पलामू, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम समेत कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात हैं। पाँच दिनों की लगातार बारिश से नदियाँ उफान पर हैं, पुल ध्वस्त हो रहे हैं और सैकड़ों गाँव प्रभावित हैं।
साहिबगंज में गंगा नदी का जलस्तर कितना है?
1 सितंबर को साहिबगंज में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान 27.25 मीटर से 0.46 मीटर ऊपर 27.71 मीटर पर बना हुआ है। पिछले 24 घंटों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन दियारा इलाकों में स्थिति अभी भी गंभीर है।
झारखंड में कौन-से जिले येलो अलर्ट पर हैं?
मौसम केंद्र रांची ने 1 सितंबर को गढ़वा, पलामू, चतरा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, रांची, खूंटी, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम — कुल 10 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी रखा है। इन इलाकों में कहीं-कहीं भारी बारिश की आशंका है।
लातेहार में कौन-सा पुल ढहा और इससे कितने लोग प्रभावित हैं?
लातेहार जिले के महुआडांड़-मेदिनीनगर मुख्य पथ पर राजदंडा नदी पर बना करीब 55 साल पुराना पुल तेज बहाव में ध्वस्त हो गया। इससे महुआडांड़, गारू, लातेहार और पलामू मार्ग पर वाहन परिचालन ठप हो गया है और करीब 10 हज़ार की आबादी प्रभावित बताई जा रही है।
प्रभावित लोगों के लिए राहत की क्या व्यवस्था की गई है?
उपायुक्तों के निर्देश पर सरकारी स्कूलों में राहत शिविर और तटबंधों पर पशु राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। प्रभावित लोगों को सूखा राशन, तिरपाल और दवाइयाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं और राहत-बचाव कार्य तेज कर दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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