सेंसेक्स 76,944 पर सपाट बंद, आईटी और एफएमसीजी में खरीदारी; हेल्थकेयर-रियल्टी में बिकवाली
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स मंगलवार, 1 सितंबर को 12.99 अंक (0.02%) की मामूली गिरावट के साथ 76,944.28 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 24.60 अंक (0.10%) की कमजोरी के साथ 24,055.80 पर ठहरा। आईटी और एफएमसीजी क्षेत्रों में सुरक्षित खरीदारी ने बाजार को गहरी गिरावट से बचाए रखा, लेकिन हेल्थकेयर, रियल्टी और ऑटो सेक्टर पर बिकवाली का दबाव हावी रहा।
मुख्य घटनाक्रम
निफ्टी आईटी 0.98% और निफ्टी एफएमसीजी 0.94% की तेजी के साथ दिन के शीर्ष प्रदर्शनकर्ता रहे। इनके अलावा निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.35%, निफ्टी इन्फ्रा 0.33%, निफ्टी मीडिया 0.26% और निफ्टी कमोडिटीज 0.14% की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए।
दूसरी तरफ, निफ्टी हेल्थकेयर 1.60%, निफ्टी फार्मा 1.45%, निफ्टी रियल्टी 1.42%, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.40%, निफ्टी ऑटो 1.22% और निफ्टी पीएसयू बैंक 1.21% की गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुए।
मिडकैप-स्मॉलकैप पर दबाव
लार्जकैप की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप में अधिक बिकवाली देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 890.25 अंक (1.39%) की गिरावट के साथ 63,334.50 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 45.40 अंक (0.23%) की कमजोरी के साथ 19,886.25 पर रहा।
प्रमुख शेयरों का हाल
सेंसेक्स पैक में ITC, HCL Tech, Infosys, Bharti Airtel, Kotak Mahindra Bank, Tech Mahindra, HDFC Bank, Power Grid, TCS और Eternal प्रमुख लाभार्थियों में रहे। वहीं Maruti Suzuki, SBI, IndiGo, Bajaj Finserv, M&M, Axis Bank, Titan, Sun Pharma, Bajaj Finance, Trent, L&T, ICICI Bank, UltraTech Cement और BEL नुकसान में रहे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, घरेलू बाजार अभी वैश्विक अनिश्चितताओं और भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन बना रहा है। उम्मीद से बेहतर जीडीपी वृद्धि घरेलू माँग और व्यापक अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है।
हालाँकि, मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने महंगाई और लंबे समय तक ऊँची ब्याज दरों की आशंका को फिर से हवा दी है। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों की पूंजी निकासी ने निवेशकों की धारणा को सतर्क बनाए रखा है।
आगे की राह
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार की दिशा ऊर्जा बाजार में बदलावों, वैश्विक मौद्रिक नीति से जुड़ी उम्मीदों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में पूंजी प्रवाह से तय होगी। वित्तीय शेयरों पर दबाव जारी रह सकता है, जबकि एफएमसीजी और आईटी सेक्टर में सुरक्षित निवेश की प्रवृत्ति बनी रह सकती है।