सेंसेक्स 210 अंक लुढ़का, निफ्टी 24,615 पर बंद; रियल्टी-FMCG में बिकवाली, RBI फैसले से पहले निवेशक सतर्क
सारांश
मुख्य बातें
बीएसई सेंसेक्स मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को 210.08 अंक यानी 0.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,428.95 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी50 159 अंक यानी 0.64 प्रतिशत फिसलकर 24,614.90 पर आ गया। इस गिरावट के साथ लगातार चार सत्रों से चली आ रही बढ़त का सिलसिला थम गया। वैश्विक बाजारों के मिले-जुले संकेतों, F&O एक्सपायरी की अस्थिरता और बुधवार को प्रस्तावित भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति घोषणा से पहले निवेशकों की सतर्कता इस गिरावट की प्रमुख वजहें रहीं।
सेक्टरवार प्रदर्शन
निफ्टी रियल्टी में सर्वाधिक 2.39 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। इसके बाद निफ्टी ऑयल एंड गैस में 1.15 प्रतिशत, निफ्टी FMCG में 0.88 प्रतिशत, निफ्टी IT में 0.82 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.66 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.56 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.44 प्रतिशत की कमज़ोरी रही। इसके विपरीत, निफ्टी मीडिया 2.03 प्रतिशत और निफ्टी मेटल 0.91 प्रतिशत की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए — ये दो क्षेत्र व्यापक नकारात्मक रुझान के विपरीत टिके रहे।
टॉप गेनर्स और लूज़र्स
निफ्टी 50 में सबसे अधिक दबाव में रहे शेयरों में ग्रासिम इंडस्ट्रीज, HDFC लाइफ, बजाज ऑटो, मैक्स हेल्थकेयर, रिलायंस और NTPC शामिल रहे। दूसरी ओर, अपोलो हॉस्पिटल्स, हिंडाल्को, ट्रेंट, ITC, इटरनल और अदाणी पोर्ट्स के शेयरों में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई।
व्यापक बाजारों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा — निफ्टी मिडकैप 100 में 0.29 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 ने 0.23 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ सत्र समाप्त किया।
F&O क्लोजिंग की नई प्रणाली का असर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मंगलवार को साप्ताहिक F&O एक्सपायरी के साथ वायदा एवं विकल्प के क्लोजिंग मूल्य निर्धारण की नई व्यवस्था का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस नई प्रणाली के कारण बाजार की चाल में असामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिले, जो संकेत देता है कि यह व्यवस्था अभी अपेक्षित ढंग से काम नहीं कर पा रही।
विशेष रूप से खुदरा निवेशकों को 15 मिनट की ब्लाइंड डेरिवेटिव्स क्लोजिंग विंडो से पहले अपनी पोजिशन मजबूरन काटनी पड़ी, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक शुरुआती तकनीकी और परिचालन चुनौती है और एक्सचेंजों तथा बाजार नियामक को इन विसंगतियों को शीघ्र दूर करना होगा। फिलहाल इसका प्रभाव मुख्यतः F&O से जुड़े शेयरों और प्रमुख सूचकांकों तक सीमित है।
RBI नीति और वैश्विक संकेत
बाजार की नज़र बुधवार को होने वाली RBI मौद्रिक नीति समिति की घोषणा पर टिकी है। वैश्विक अनिश्चितताओं और महंगाई संबंधी चिंताओं के बीच निवेशकों को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाएगा।
इसके अलावा, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी निवेशकों की नज़र बनी हुई है। यदि इस क्षेत्र में स्थिति स्थिर होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और वैश्विक बॉन्ड यील्ड पर दबाव कम होने की संभावना है, जो भारतीय बाजारों के लिए सकारात्मक संकेत होगा।
आगे की राह
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट से देश की दीर्घकालिक आर्थिक तस्वीर पर कोई असर नहीं पड़ता। व्यापक आर्थिक संकेतक अभी भी मज़बूत बने हुए हैं और दीर्घकालिक निवेशकों के लिए दृष्टिकोण में कोई बदलाव नहीं आया है। जैसे-जैसे एक्सचेंज नई प्रणाली के अनुकूल होंगे और RBI की नीतिगत स्पष्टता मिलेगी, मौजूदा अस्थिरता के कम होने की उम्मीद है।