सेंसेक्स 274 अंक उछला, निफ्टी 24,317 पर बंद — लगातार दूसरे दिन हरे निशान में भारतीय बाजार
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को 273.55 अंक यानी 0.35 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,928.15 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 66.95 अंक यानी 0.28 प्रतिशत चढ़कर 24,317.15 पर बंद हुआ। यह लगातार दूसरा कारोबारी सत्र है जब दोनों प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक हरे निशान में बंद हुए, भले ही वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेत मिल रहे थे।
सेक्टरवार प्रदर्शन
निफ्टी ऑटो इंडेक्स दिन का शीर्ष लाभार्थी रहा, जिसमें 1.63 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी मीडिया और निफ्टी आईटी भी बढ़त के साथ बंद हुए।
दूसरी ओर, निफ्टी रियल्टी सूचकांक सबसे अधिक दबाव में रहा और 2 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फार्मा इंडेक्स में भी गिरावट रही।
शीर्ष लाभार्थी और घाटे वाले शेयर
निफ्टी 50 में सबसे अधिक लाभ कमाने वाले शेयरों में महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), कोल इंडिया, आइशर मोटर्स, मारुति सुजुकी, टीएमपीवी और विप्रो शामिल रहे। वहीं, एचडीएफसी लाइफ, श्रीराम फाइनेंस, एसबीआई लाइफ, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और इंडिगो के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
व्यापक बाजार का प्रदर्शन कमजोर
प्रमुख सूचकांकों की तुलना में व्यापक बाजार का प्रदर्शन कमजोर रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.35 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.56 प्रतिशत की गिरावट आई, जो दर्शाता है कि निवेशकों की प्राथमिकता फिलहाल बड़े और स्थापित शेयरों की ओर है।
वैश्विक संकेत और विशेषज्ञ विश्लेषण
एक बाजार विशेषज्ञ के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को यथावत रखने का निर्णय बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा, लेकिन महंगाई पर सख्त रुख (हॉकिश स्टैंड) बरकरार रहने से वैश्विक निवेशकों की चिंता कम नहीं हुई। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी निकट भविष्य में दर-वृद्धि की आशंका का संकेत दे रही है।
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने वैश्विक अनिश्चितता को और गहरा किया। इन चुनौतियों के बावजूद, विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियादी स्थिति ने बाजार को नीचे जाने से रोका।
घरेलू सहारा: FII खरीदारी और Q1 नतीजे
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बढ़ती खरीदारी, भारतीय रुपये में मजबूती और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के उत्साहजनक कॉर्पोरेट नतीजों ने निवेशकों का भरोसा बनाए रखा। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में किसी भी गिरावट को निवेशकों ने चुनिंदा शेयरों में खरीदारी के अवसर के रूप में भुनाया। आने वाले सत्रों में फेड की नीतिगत दिशा और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।