सेंसेक्स 109 अंक चढ़कर 77,100 पर बंद, निफ्टी50 भी हरे निशान में; ऑटो सेक्टर में 2.2% की तेजी
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 25 जून 2025 को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ 109.25 अंक यानी 0.14 प्रतिशत की तेजी के साथ 77,100.47 पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी50 भी 34.35 अंक की बढ़त के साथ 24,056.00 पर बंद हुआ। हालाँकि दिनभर की मजबूत शुरुआत के बाद आईटी, मेटल और ऑयल एंड गैस शेयरों के दबाव ने बाजार की रफ्तार को थाम लिया।
कारोबार का पूरा हाल
सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 76,991.22 से करीब 400 अंक उछलकर 77,391.07 पर खुला और इंट्रा-डे कारोबार में 77,803.18 का उच्चतम स्तर छुआ — जो दिन की शुरुआत से 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़त थी। इसी तरह निफ्टी50 ने 24,125.85 पर कारोबार शुरू किया और इंट्रा-डे में 24,261.60 तक पहुँचा, लेकिन अंत में बढ़त का बड़ा हिस्सा गँवाकर मामूली लाभ पर बंद हुआ।
व्यापक बाजार में तस्वीर मिली-जुली रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.55 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.47 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए, जो संकेत देता है कि तेजी मुख्यतः लार्जकैप तक सीमित रही।
सेक्टर-वार प्रदर्शन
क्षेत्रीय सूचकांकों में निफ्टी ऑटो ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया और 2.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मेटल की कीमतों में कमी, सप्लाई चेन की दिक्कतों का घटना और महीने के दौरान रिटेल माँग में सुधार ने ऑटो शेयरों को रफ्तार दी। निफ्टी एफएमसीजी में 0.7 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी में 0.3 प्रतिशत और निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.16 प्रतिशत की बढ़त रही।
दूसरी ओर, निफ्टी मेटल, निफ्टी आईटी, निफ्टी मीडिया, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी फार्मा में गिरावट दर्ज की गई।
टॉप गेनर और लूजर
निफ्टी50 में इंडिगो, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), मारुति सुजुकी, मैक्स हेल्थ और टाटा कंज्यूमर के शेयर सबसे अधिक चढ़े। वहीं ओएनजीसी, हिंडाल्को, पावरग्रिड, टेक महिंद्रा, भारती एयरटेल और एसबीआई लाइफ के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट रही।
रुपया और कच्चा तेल
मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 25 पैसे मजबूत होकर 84.40 पर बंद हुआ, जबकि पिछले दिन यह 84.65 पर था। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट ने रुपए को सहारा दिया, हालाँकि यह बढ़त को और गति देने के लिए पर्याप्त नहीं रही।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली बाजार की तेजी पर लगाम लगा सकती है। आने वाले हफ्तों में पहली तिमाही के कमजोर नतीजों के अनुमान और मॉनसून की असमान स्थिति बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।