सेंसेक्स 507 अंक उछला, निफ्टी 23,901 पर; आईटी शेयरों की अगुवाई में बाजार हरे निशान में खुला
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स सोमवार, 27 जुलाई को शुरुआती कारोबार में 507 अंक (0.67%) की बढ़त के साथ 76,567 पर पहुँच गया, जबकि NSE निफ्टी 50 134 अंक (0.56%) चढ़कर 23,901 पर कारोबार कर रहा था। मजबूत वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट ने भारतीय शेयर बाजार को सकारात्मक शुरुआत दी।
आईटी शेयरों की अगुवाई
सुबह 9:18 बजे IST तक निफ्टी आईटी सूचकांक 1% से अधिक की तेजी के साथ सभी सेक्टोरल इंडेक्स में शीर्ष पर था। इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक और टीसीएस प्रमुख लाभार्थियों में रहे। इसके अलावा निफ्टी मीडिया, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी फार्मा, निफ्टी मेटल और निफ्टी एनर्जी सहित लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में थे।
सेंसेक्स पैक में टॉप गेनर्स और लूजर्स
इंडिगो, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, इटरनल, एचयूएल, बजाज फिनसर्व, आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा स्टील, एलएंडटी, ट्रेंट, एनटीपीसी, एसबीआई, पावर ग्रिड, बीईएल, टाइटन, एक्सिस बैंक, अदाणी पोर्ट्स और भारती एयरटेल शुरुआती कारोबार में शीर्ष लाभार्थी रहे। दूसरी ओर, केवल आईसीआईसीआई बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट गिरावट में थे।
मिडकैप और स्मॉलकैप में भी तेजी
व्यापक बाजार में भी उत्साह दिखा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 608 अंक (0.99%) की तेजी के साथ 62,231 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 174 अंक (0.95%) की बढ़त के साथ 19,059 पर था। यह संकेत देता है कि तेजी केवल लार्जकैप तक सीमित नहीं थी।
कच्चे तेल में गिरावट और वैश्विक संकेत
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, WTI क्रूड 4.75% की गिरावट के साथ $85 प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 4.24% की कमजोरी के साथ $87.78 प्रति बैरल पर आ गया। अमेरिका-ईरान के बीच तनाव में कमी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में यह तेज गिरावट आई, जिसे बाजार ने सकारात्मक रूप से लिया।
विशेषज्ञों की राय और आगे की राह
जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों का $90 के नीचे आना भारतीय बाजार के लिए अनुकूल संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव में नरमी देखी जा रही है। हालाँकि, विशेषज्ञों ने यह भी चेताया कि इस महीने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का निवेश रुझान काफी अस्थिर रहा है, जिससे निवेशक सतर्क बने हुए हैं। यदि वैश्विक स्तर पर तनाव शांत रहता है और तेल की कीमतें नरम रहती हैं, तो बाजार में यह तेजी आगे भी बनी रह सकती है।