सेंसेक्स 77,139 पर पहुँचा; कच्चे तेल में गिरावट और आईटी शेयरों की खरीदारी से बाजार में तेजी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाजार ने 2 जुलाई को मजबूत शुरुआत की, जब सेंसेक्स सुबह 9:15 बजे IST पर 217 अंक यानी 0.28 प्रतिशत की तेजी के साथ 77,139 पर पहुँच गया। निफ्टी 50 भी 74 अंक यानी 0.31 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,074 पर कारोबार कर रहा था। कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट और आईटी क्षेत्र में जोरदार खरीदारी इस उछाल के दो प्रमुख कारण रहे।
आईटी शेयरों ने संभाली बाजार की कमान
शुरुआती कारोबार में निफ्टी आईटी इंडेक्स 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ शीर्ष प्रदर्शन करने वाला सूचकांक रहा। इन्फोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टीसीएस और टेक महिंद्रा सेंसेक्स के प्रमुख गेनर्स में शामिल रहे। इसके अलावा निफ्टी मेटल, निफ्टी ऑटो, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी कमोडिटीज भी हरे निशान में कारोबार कर रहे थे।
दूसरी ओर, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी पीएसई, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी मीडिया लाल निशान में रहे। एनटीपीसी, पावर ग्रिड, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, ट्रेंट, एलएंडटी, बीईएल, मारुति सुजुकी, एक्सिस बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट प्रमुख लूजर्स में रहे।
मिडकैप और स्मॉलकैप में भी उत्साह
बड़े शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप खंडों में भी तेजी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 187 अंक यानी 0.30 प्रतिशत की बढ़त के साथ 62,196 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 86 अंक की मजबूती के साथ 19,018 पर कारोबार कर रहा था। यह संकेत देता है कि बाजार में तेजी व्यापक आधार पर है, जो केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं है।
कच्चे तेल में बड़ी गिरावट — बाजार के लिए राहत
बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स घटकर $70.75 प्रति बैरल पर आ गया। अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के चलते पिछले एक महीने में कच्चा तेल करीब 25 प्रतिशत लुढ़क चुका है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से चालू खाता घाटे और मुद्रास्फीति दोनों पर सकारात्मक असर पड़ता है।
वैश्विक बाजारों का मिला-जुला संकेत
वैश्विक स्तर पर तस्वीर मिली-जुली रही। टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक और सियोल के बाजार लाल निशान में थे, जबकि हांगकांग और जकार्ता हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार बुधवार को कमजोर बंद हुए थे — डाओ जोन्स 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ और नैस्डैक 0.66 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ था। इस वैश्विक दबाव के बावजूद भारतीय बाजार का बेहतर प्रदर्शन घरेलू कारकों की मजबूती को दर्शाता है।
आगे क्या देखें
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की दिशा और वैश्विक व्यापार परिदृश्य आने वाले सत्रों में बाजार की चाल तय करेंगे। यदि अमेरिका-ईरान वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो तेल की कीमतें और नरम हो सकती हैं, जिससे भारतीय बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिलेगा।