सेंसेक्स 399 अंक उछला, निफ्टी 24,125 पर; कच्चे तेल में गिरावट से IT-रियल्टी शेयरों में तेजी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाजार ने 25 जून 2026 को गुरुवार की सुबह मजबूत शुरुआत की, जहाँ बीएसई सेंसेक्स 399.85 अंक यानी 0.52 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,391.07 पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 104.20 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,125.85 पर कारोबार कर रहा था। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस तेजी के पीछे मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का 73 डॉलर प्रति बैरल तक लुढ़कना है।
किन सेक्टरों में रही सबसे अधिक खरीदारी
शुरुआती कारोबार में निफ्टी आईटी और निफ्टी रियल्टी सूचकांक सबसे अधिक बढ़त के साथ अग्रणी रहे। इसके अलावा निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी ऑयलएंडगैस, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी सर्विसेज सभी हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। केवल निफ्टी मेटल ही लाल निशान में दिखा।
मिडकैप और स्मॉलकैप में भी हलचल
बड़ी कंपनियों के शेयरों के साथ-साथ मझोले और छोटे शेयरों में भी खरीदारी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 290 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की बढ़त के साथ 62,426 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 मामूली 5 अंक की तेजी के साथ 18,879 पर टिका रहा।
सेंसेक्स के प्रमुख गेनर्स और लूजर्स
सेंसेक्स पैक में इंडिगो, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), मारुति सुजुकी, ट्रेंट, आईसीआईसीआई बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फिनसर्व, टेक महिंद्रा, हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), एक्सिस बैंक और एनटीपीसी प्रमुख गेनर्स रहे। दूसरी तरफ इटरनल, टाइटन, इन्फोसिस, पावर ग्रिड, एशियन पेंट्स, आईटीसी, बीईएल, टाटा स्टील और सन फार्मा लाल निशान में रहे।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों का रुख
अधिकांश एशियाई बाजारों में भी सकारात्मक रुझान देखा गया। टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक, सोल और जकार्ता के बाजार हरे निशान में थे, जबकि हांगकांग लाल निशान में बंद हुआ। इससे पहले बुधवार को अमेरिकी बाजार मिलेजुले रहे — डाओ जोन्स 0.35 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि नैस्डैक 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ।
कच्चे तेल में गिरावट का व्यापक असर
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों का 73 डॉलर प्रति बैरल पर आना भारत के चालू खाते के घाटे (CAD) के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे एक ओर देश की जीडीपी वृद्धि दर को बल मिलेगा, तो दूसरी ओर वित्त वर्ष 2027 में महंगाई को नियंत्रण में रखने में मदद मिलेगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) मुद्रास्फीति और विकास दर के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश में है। आने वाले सत्रों में कच्चे तेल की दिशा और वैश्विक संकेत बाजार की चाल तय करेंगे।