सेंसेक्स 226 अंक उछला, निफ्टी 24,305 पर; आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स सोमवार, 24 अगस्त को शुरुआती कारोबार में 226 अंक यानी 0.28 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,765 पर पहुँच गया, जबकि NSE निफ्टी 50 52 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,305 पर कारोबार कर रहा था। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भारतीय बाज़ार को मज़बूत वैश्विक आधार दिया।
आईटी और मीडिया शेयर अगुवाई में
शुरुआती सत्र में निफ्टी आईटी और निफ्टी मीडिया इंडेक्स करीब 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ टॉप गेनर्स रहे। इन्फोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस और टेक महिंद्रा सेंसेक्स पैक में सबसे आगे रहे। इसके अलावा टाटा स्टील, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचयूएल, एनटीपीसी, ट्रेंट, आईटीसी, मारुति सुजुकी, इंडिगो, एसबीआई और सन फार्मा भी हरे निशान में थे।
कौन से सेक्टर दबाव में रहे
जहाँ अधिकांश सेक्टर हरे निशान में थे, वहीं निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी ऑटो और निफ्टी पीएसयू बैंक लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। सेंसेक्स पैक में एशियन पेंट्स, बीईएल, टाइटन, अदाणी पोर्ट्स, इटरनल, पावर ग्रिड, बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल और एमएंडएम लुज़र्स की श्रेणी में रहे।
मिडकैप और स्मॉलकैप में भी तेजी
व्यापक बाज़ार में भी खरीदारी का उत्साह देखा गया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 166 अंक यानी 0.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ 63,900 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 96 अंक यानी 0.46 प्रतिशत की उछाल के साथ 20,068 पर कारोबार कर रहा था।
वैश्विक कारक: बॉन्ड यील्ड और कच्चा तेल
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी सरकार द्वारा दीर्घकालिक बॉन्ड बायबैक की सीमा 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर 4 अरब डॉलर किए जाने के बाद 30 वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में करीब आधा प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे वैश्विक जोखिम-भावना में सुधार हुआ। साथ ही, बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 91.35 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.60 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 85.68 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो आयात-निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।
अमेरिकी बाज़ारों का समर्थन
शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाज़ार बढ़त के साथ बंद हुए थे — डाउ जोन्स 0.98 प्रतिशत और नैस्डैक 0.43 प्रतिशत की उछाल के साथ बंद हुआ। इन सकारात्मक संकेतों ने सोमवार को एशियाई बाज़ारों के साथ-साथ भारतीय बाज़ार को भी मज़बूती दी। आने वाले सत्रों में वैश्विक मैक्रो संकेत और विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियाँ बाज़ार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगी।