सेंसेक्स 354 अंक उछला, 74,963 पर खुला; फार्मा और मेटल शेयरों ने संभाली बाज़ार की कमान
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स गुरुवार, 14 मई को सुबह 9:20 बजे IST पर 354 अंक (0.48%) की बढ़त के साथ 74,963 पर कारोबार कर रहा था, जबकि NSE निफ्टी 50 146 अंक (0.66%) की तेज़ी के साथ 23,554 पर था। फार्मा, हेल्थकेयर और मेटल क्षेत्रों की अगुवाई में भारतीय शेयर बाज़ार ने हरे निशान में मज़बूत शुरुआत की।
मुख्य घटनाक्रम
शुरुआती कारोबार में निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी मेटल शीर्ष प्रदर्शन करने वाले सूचकांक रहे। इनके अलावा निफ्टी एनर्जी, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी पीएसई, निफ्टी कमोडिटीज़, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी ऑयल एंड गैस सहित लगभग सभी प्रमुख सूचकांक हरे निशान में थे।
मिड और स्मॉलकैप खंड में भी तेज़ी रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 395 अंक (0.66%) की बढ़त के साथ 60,560 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 89 अंक (0.50%) की मज़बूती के साथ 18,083 पर कारोबार कर रहा था।
टॉप गेनर्स और लूज़र्स
सेंसेक्स पैक में अदाणी पोर्ट्स, ट्रेंट, एशियन पेंट्स, एनटीपीसी, सन फार्मा, टाटा स्टील, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, आईटीसी, एलएंडटी, पावर ग्रिड, अल्ट्राटेक सीमेंट, एमएंडएम, एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, बीईएल, बजाज फाइनेंस, एचयूएल, कोटक महिंद्रा बैंक और मारुति सुज़ुकी बढ़त में थे।
वहीं, IT क्षेत्र दबाव में रहा — एचसीएल टेक, इन्फोसिस, टीसीएस और टेक महिंद्रा लाल निशान में थे।
वैश्विक बाज़ारों का संकेत
एशियाई बाज़ारों में मिला-जुला रुझान रहा। टोक्यो, हांगकांग, बैंकॉक और सोल हरे निशान में खुले, जबकि शंघाई मामूली गिरावट के साथ लाल निशान में था। अमेरिकी बाज़ारों में बुधवार को डाओ जोन्स 0.14% की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि नैस्डैक 1.20% की बढ़त के साथ बंद हुआ।
FII और DII की गतिविधि
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बुधवार को इक्विटी में ₹4,703.15 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की और वे शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने ₹5,869.05 करोड़ का निवेश कर बाज़ार को मज़बूत आधार दिया।
कच्चे तेल का हाल
अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी जारी रही। WTI क्रूड 0.46% की बढ़त के साथ $101 प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 0.37% की मज़बूती के साथ $106 प्रति बैरल पर था। कच्चे तेल की ऊँची कीमतें ऊर्जा और ऑयल-गैस शेयरों के लिए सकारात्मक संकेत हैं, हालाँकि इससे आयात लागत पर दबाव बना रह सकता है।