सेंसेक्स 492 अंक टूटा, 77,235 पर बंद; आईटी शेयरों में सबसे बड़ी गिरावट, निफ्टी भी 24,154 पर फिसला
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स मंगलवार को 492.70 अंक यानी 0.63 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,235.46 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 132.75 अंक या 0.55 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 24,154.90 पर आ गया। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने मिलकर निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया।
मुख्य घटनाक्रम
गिरावट की अगुवाई निफ्टी आईटी इंडेक्स ने की, जो 1.93 प्रतिशत लुढ़ककर सत्र का सबसे बड़ा पिछड़ने वाला सूचकांक रहा। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी 1.42 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 1.01 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी 0.77 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 0.68 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 0.61 प्रतिशत, निफ्टी कंजम्पशन 0.50 प्रतिशत और निफ्टी इन्फ्रा 0.42 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ बंद हुए।
दूसरी ओर, रक्षा क्षेत्र में तेज़ी रही — निफ्टी इंडिया डिफेंस 1.29 प्रतिशत चढ़ा। निफ्टी मीडिया 0.40 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 0.30 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर 0.21 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.20 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।
लार्जकैप और मिडकैप पर दबाव
निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 277.60 अंक यानी 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 63,539.40 पर बंद हुआ। हालाँकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स लगभग सपाट रहते हुए 19,808.85 पर बंद हुआ, जो संकेत देता है कि बिकवाली का दबाव मुख्यतः बड़े और मझोले शेयरों पर केंद्रित रहा।
सेंसेक्स पैक में एक्सिस बैंक, पावर ग्रिड, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो (L&T), बजाज फिनसर्व और एनटीपीसी बढ़त में रहे। वहीं एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल, टीसीएस, हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), अल्ट्राटेक सीमेंट, इंडिगो, आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), एचडीएफसी बैंक, टेक महिंद्रा और मारुति सुज़ुकी नुकसान में रहे।
गिरावट के पीछे वैश्विक कारण
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी बाज़ार की धारणा पर सबसे बड़ा दबाव बनाती रही। इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि ने उभरते बाज़ारों की आकर्षण क्षमता को घटाया। अमेरिका-ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम की समाप्ति के बाद मध्य पूर्व में सुलह की उम्मीदें धूमिल पड़ने से निवेशकों की चिंता और बढ़ गई, जिससे मुद्रास्फीति के फिर से उभरने की आशंका भी तेज़ हुई।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तकनीकी खर्च पर अनिश्चितता पहले से ही छाई हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार ऊँची ब्याज दरों के चलते ग्लोबल टेक्नोलॉजी बजट में कटौती की आशंका ने आईटी शेयरों को सबसे ज़्यादा प्रभावित किया।
आम जनता और निवेशकों पर असर
गौरतलब है कि कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और बढ़ती इनपुट लागत आने वाले तिमाही नतीजों पर दबाव बना सकती हैं, जिससे निवेशक निकट भविष्य में सतर्क रुख अपनाने को मजबूर हो सकते हैं। घरेलू बुनियादी कारक अभी भी मज़बूत बताए जा रहे हैं, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के बीच बाज़ार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
क्या होगा आगे
बाज़ार की नज़र अब अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के आगामी संकेतों, कच्चे तेल के भाव और मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति पर टिकी है। विश्लेषकों के अनुसार, जब तक वैश्विक संकेत स्थिर नहीं होते, तब तक भारतीय बाज़ार में सीमित दायरे में कारोबार जारी रह सकता है।