सेंसेक्स 340 अंक टूटा, 73,642 पर; अमेरिका-ईरान तनाव से IT शेयरों में 2% से ज़्यादा गिरावट
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स गुरुवार, 11 जून को शुरुआती कारोबार में 340.39 अंक यानी 0.46 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,642.79 पर ट्रेड करता दिखा, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 भी 114.45 अंक या 0.49 प्रतिशत टूटकर 23,100.50 पर आ गया। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल ने वैश्विक निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया, जिसका सीधा असर भारतीय बाज़ारों पर पड़ा।
बाज़ार का शुरुआती हाल
सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 73,983.18 से 367.19 अंक गिरकर 73,615.99 पर खुला। निफ्टी 50 भी पिछले बंद 23,214.95 से 110.55 अंक की गिरावट के साथ 23,104.40 पर खुला। व्यापक बाज़ार में भी दबाव रहा — निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक क्रमशः 0.61 प्रतिशत और 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।
सेक्टरवार प्रदर्शन
निफ्टी आईटी सूचकांक में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जो इस सत्र का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल, निफ्टी ऑटो और निफ्टी केमिकल में भी उल्लेखनीय गिरावट देखी गई। इसके विपरीत, निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर ने बेहतर प्रदर्शन किया और बाज़ार की गिरावट से अपेक्षाकृत सुरक्षित रहे।
निफ्टी 50 में सर्वाधिक गिरावट वाले शेयरों में HCLTech, Infosys, Tech Mahindra, Trent, TCS, Eicher Motors, Eternal और Hindalco शामिल रहे।
अमेरिका-ईरान तनाव: असली वजह
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर अतिरिक्त हमले किए हैं। अमेरिका के अनुसार यह कार्रवाई ईरान की कथित लगातार आक्रामक गतिविधियों के जवाब में की गई है। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 2.54 प्रतिशत उछलकर $95.47 प्रति बैरल पर पहुँच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 4 प्रतिशत की बढ़त के साथ $93.64 प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा।
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा कीमतों में तेज़ी से वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर ब्याज दरों और आर्थिक विकास की संभावनाओं पर पड़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ार पहले से ही केंद्रीय बैंकों की नीतिगत दिशा को लेकर अनिश्चितता में हैं।
वैश्विक बाज़ारों का हाल
एशियाई बाज़ारों में भी निवेशकों की धारणा कमज़ोर रही। हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 1 प्रतिशत तक गिरे, जबकि जापान का निक्केई लगभग सपाट रहा। बुधवार रात वॉल स्ट्रीट भी दबाव में बंद हुआ — S&P 500 1.62 प्रतिशत और नैस्डैक करीब 2 प्रतिशत गिरा।
आगे क्या
विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार के हालिया कदमों से रुपये को कुछ हद तक स्थिरता मिली है। हालाँकि, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के प्रवाह को लेकर बनी अनिश्चितता निकट भविष्य में बाज़ार पर दबाव बनाए रख सकती है। गौरतलब है कि ऊर्जा आयात पर निर्भर भारत के लिए कच्चे तेल की ऊँची कीमतें चालू खाते के घाटे और मुद्रास्फीति दोनों के लिए जोखिम बढ़ाती हैं।