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सेंसेक्स 340 अंक टूटा, 73,642 पर; अमेरिका-ईरान तनाव से IT शेयरों में 2% से ज़्यादा गिरावट

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सेंसेक्स 340 अंक टूटा, 73,642 पर; अमेरिका-ईरान तनाव से IT शेयरों में 2% से ज़्यादा गिरावट

सारांश

अमेरिका-ईरान के बीच सैन्य टकराव और ब्रेंट क्रूड के $95 पार जाने से भारतीय बाज़ार लाल निशान में खुले। सेंसेक्स 340 अंक और निफ्टी 114 अंक टूटे; IT सेक्टर सबसे बुरी तरह प्रभावित। वैश्विक जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और महंगाई की आशंका ने निवेशकों को सतर्क किया।

मुख्य बातें

BSE सेंसेक्स 11 जून को शुरुआती कारोबार में 340.39 अंक (0.46%) गिरकर 73,642.79 पर आया।
NSE निफ्टी 50 भी 114.45 अंक (0.49%) की गिरावट के साथ 23,100.50 पर ट्रेड करता रहा।
निफ्टी IT में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट; HCLTech, Infosys, TCS शीर्ष नुकसान में।
ब्रेंट क्रूड 2.54% उछलकर $95.47/बैरल ; WTI क्रूड 4% बढ़कर $93.64/बैरल पर।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के ठिकानों पर अतिरिक्त हमलों की पुष्टि की।
S&P 500 बुधवार को 1.62% और नैस्डैक करीब 2% गिरकर बंद हुए।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स गुरुवार, 11 जून को शुरुआती कारोबार में 340.39 अंक यानी 0.46 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,642.79 पर ट्रेड करता दिखा, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 भी 114.45 अंक या 0.49 प्रतिशत टूटकर 23,100.50 पर आ गया। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल ने वैश्विक निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया, जिसका सीधा असर भारतीय बाज़ारों पर पड़ा।

बाज़ार का शुरुआती हाल

सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 73,983.18 से 367.19 अंक गिरकर 73,615.99 पर खुला। निफ्टी 50 भी पिछले बंद 23,214.95 से 110.55 अंक की गिरावट के साथ 23,104.40 पर खुला। व्यापक बाज़ार में भी दबाव रहा — निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक क्रमशः 0.61 प्रतिशत और 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।

सेक्टरवार प्रदर्शन

निफ्टी आईटी सूचकांक में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जो इस सत्र का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल, निफ्टी ऑटो और निफ्टी केमिकल में भी उल्लेखनीय गिरावट देखी गई। इसके विपरीत, निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर ने बेहतर प्रदर्शन किया और बाज़ार की गिरावट से अपेक्षाकृत सुरक्षित रहे।

निफ्टी 50 में सर्वाधिक गिरावट वाले शेयरों में HCLTech, Infosys, Tech Mahindra, Trent, TCS, Eicher Motors, Eternal और Hindalco शामिल रहे।

अमेरिका-ईरान तनाव: असली वजह

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर अतिरिक्त हमले किए हैं। अमेरिका के अनुसार यह कार्रवाई ईरान की कथित लगातार आक्रामक गतिविधियों के जवाब में की गई है। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 2.54 प्रतिशत उछलकर $95.47 प्रति बैरल पर पहुँच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 4 प्रतिशत की बढ़त के साथ $93.64 प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा।

बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा कीमतों में तेज़ी से वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर ब्याज दरों और आर्थिक विकास की संभावनाओं पर पड़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ार पहले से ही केंद्रीय बैंकों की नीतिगत दिशा को लेकर अनिश्चितता में हैं।

वैश्विक बाज़ारों का हाल

एशियाई बाज़ारों में भी निवेशकों की धारणा कमज़ोर रही। हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 1 प्रतिशत तक गिरे, जबकि जापान का निक्केई लगभग सपाट रहा। बुधवार रात वॉल स्ट्रीट भी दबाव में बंद हुआ — S&P 500 1.62 प्रतिशत और नैस्डैक करीब 2 प्रतिशत गिरा।

आगे क्या

विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार के हालिया कदमों से रुपये को कुछ हद तक स्थिरता मिली है। हालाँकि, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के प्रवाह को लेकर बनी अनिश्चितता निकट भविष्य में बाज़ार पर दबाव बनाए रख सकती है। गौरतलब है कि ऊर्जा आयात पर निर्भर भारत के लिए कच्चे तेल की ऊँची कीमतें चालू खाते के घाटे और मुद्रास्फीति दोनों के लिए जोखिम बढ़ाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ IT सेक्टर की गिरावट दिखाती है कि वैश्विक मंदी की आशंका अब सेक्टर-विशिष्ट दबाव में तब्दील हो रही है। गौरतलब है कि भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से पूरा करता है, इसलिए हर भू-राजनीतिक उथल-पुथल यहाँ सीधे महंगाई और रुपये की चाल पर असर डालती है। RBI की स्थिरता-कोशिशें तब तक ही कारगर रहेंगी जब तक वैश्विक संघर्ष और गहरा न हो।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

11 जून को सेंसेक्स क्यों गिरा?
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल के कारण वैश्विक बाज़ारों में बिकवाली का दबाव बना, जिससे सेंसेक्स 340 अंक से अधिक गिरा। वॉल स्ट्रीट और एशियाई बाज़ारों की कमज़ोरी ने भी भारतीय बाज़ार की धारणा को प्रभावित किया।
अमेरिका-ईरान तनाव का भारतीय बाज़ार पर क्या असर पड़ता है?
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें चढ़ती हैं, जो भारत के आयात बिल को बढ़ाती हैं और महंगाई का दबाव पैदा करती हैं। इससे रुपये पर दबाव बनता है और विदेशी निवेशक जोखिम से बचने के लिए भारतीय बाज़ारों से पैसा निकालते हैं।
निफ्टी IT में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
निफ्टी IT में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट मुख्यतः अमेरिकी बाज़ार की कमज़ोरी से जुड़ी है, क्योंकि भारतीय IT कंपनियों का बड़ा राजस्व अमेरिकी ग्राहकों से आता है। नैस्डैक में करीब 2% की गिरावट ने HCLTech, Infosys, TCS जैसे शेयरों पर सीधा दबाव बनाया।
ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड की कीमतें कहाँ पहुँचीं?
ब्रेंट क्रूड 2.54 प्रतिशत बढ़कर $95.47 प्रति बैरल और WTI क्रूड 4 प्रतिशत की बढ़त के साथ $93.64 प्रति बैरल पर पहुँच गया। यह उछाल अमेरिका द्वारा ईरान के ठिकानों पर हमलों की पुष्टि के बाद आई।
क्या RBI इस गिरावट को रोक सकता है?
विश्लेषकों के अनुसार RBI और सरकार के हालिया कदमों से रुपये को कुछ स्थिरता मिली है, लेकिन वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता और FII के निवेश प्रवाह पर RBI का सीमित नियंत्रण है। जब तक अमेरिका-ईरान तनाव कम नहीं होता, बाज़ार पर दबाव बना रह सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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