अमेरिका-ईरान तनाव से सेंसेक्स 212 अंक टूटा, ऑटो-बैंकिंग सेक्टर में बिकवाली
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स शुक्रवार, 8 मई को शुरुआती कारोबार में 212.58 अंक (0.27 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 77,631.94 पर खुला, जबकि NSE निफ्टी 50 93 अंक (0.38 प्रतिशत) की कमज़ोरी के साथ 24,233.65 पर था। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया, जिसके चलते ऑटो और बैंकिंग सेक्टर सबसे अधिक दबाव में रहे।
किन सेक्टर्स पर पड़ा सबसे ज़्यादा असर
शुरुआती कारोबार में व्यापक बाज़ारों में गिरावट देखी गई। निफ्टी ऑटो, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी पीएसई और निफ्टी कमोडिटीज — ये सभी सूचकांक लाल निशान में थे। वहीं निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी फार्मा और निफ्टी आईटी हरे निशान में कारोबार करते दिखे।
मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला रुझान
निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 76 अंक (0.12 प्रतिशत) की कमज़ोरी के साथ 61,926.35 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 8 अंक की मामूली बढ़त के साथ 18,701 पर कारोबार कर रहा था। इस प्रकार छोटे और मझोले शेयरों में मिलाजुला रुझान बना रहा।
सेंसेक्स के गेनर्स और लूज़र्स
टेक महिंद्रा, एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, अदाणी पोर्ट्स, टाइटन, भारती एयरटेल, सन फार्मा, इंडिगो और टीसीएस प्रमुख गेनर्स में रहे। दूसरी तरफ एक्सिस बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), एचडीएफसी बैंक, इटरनल, बजाज फाइनेंस, मारुति सुजुकी, अल्ट्राटेक सीमेंट, एनटीपीसी और टाटा स्टील प्रमुख लूज़र्स रहे।
एशियाई और अमेरिकी बाज़ारों का हाल
अमेरिका-ईरान तनाव के चलते अधिकांश एशियाई बाज़ार भी दबाव में रहे। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, जकार्ता और सोल लाल निशान में थे, जबकि केवल बैंकॉक हरे निशान में कारोबार कर रहा था। गुरुवार को अमेरिकी बाज़ार भी गिरावट के साथ बंद हुए — डाओ जोन्स में 0.63 प्रतिशत और नैस्डैक में 0.13 प्रतिशत की कमज़ोरी दर्ज की गई।
विशेषज्ञों की राय और आगे की संभावनाएँ
बाज़ार जानकारों के अनुसार पश्चिम एशिया में तनाव घटने-बढ़ने का सिलसिला जारी है, जिसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। गौरतलब है कि भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद कुछ एशियाई बाज़ार उल्लेखनीय प्रदर्शन कर रहे हैं — दक्षिण कोरिया और ताइवान इस वर्ष के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ता रहे हैं, जिन्होंने क्रमशः 71 प्रतिशत और 40 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार इस असाधारण रिटर्न में AI से जुड़े शेयरों का बड़ा योगदान है। यदि पश्चिम एशिया में तनाव और गहराता है, तो कच्चे तेल के आयात पर निर्भर भारत के लिए चालू खाते का घाटा बढ़ने का जोखिम और अधिक हो सकता है।