अमेरिका-ईरान तनाव से सेंसेक्स 212 अंक टूटा, ऑटो-बैंकिंग सेक्टर में बिकवाली

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अमेरिका-ईरान तनाव से सेंसेक्स 212 अंक टूटा, ऑटो-बैंकिंग सेक्टर में बिकवाली

सारांश

अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने शुक्रवार को भारतीय शेयर बाज़ार को हिला दिया — सेंसेक्स 212 अंक टूटा, ऑटो और बैंकिंग सेक्टर सबसे ज़्यादा दबाव में रहे। एशिया के अधिकांश बाज़ार भी लाल निशान में थे, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी।

मुख्य बातें

BSE सेंसेक्स 8 मई को 212.58 अंक (0.27%) गिरकर 77,631.94 पर खुला।
NSE निफ्टी 50 93 अंक (0.38%) की कमज़ोरी के साथ 24,233.65 पर था।
निफ्टी ऑटो , निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी पीएसयू बैंक समेत कई सेक्टर इंडेक्स लाल निशान में रहे।
डाओ जोन्स गुरुवार को 0.63% और नैस्डैक 0.13% की गिरावट के साथ बंद हुए।
दक्षिण कोरिया और ताइवान ने इस वर्ष क्रमशः 71% और 40% का रिटर्न दिया — AI शेयरों का बड़ा योगदान।

BSE सेंसेक्स शुक्रवार, 8 मई को शुरुआती कारोबार में 212.58 अंक (0.27 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 77,631.94 पर खुला, जबकि NSE निफ्टी 50 93 अंक (0.38 प्रतिशत) की कमज़ोरी के साथ 24,233.65 पर था। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया, जिसके चलते ऑटो और बैंकिंग सेक्टर सबसे अधिक दबाव में रहे।

किन सेक्टर्स पर पड़ा सबसे ज़्यादा असर

शुरुआती कारोबार में व्यापक बाज़ारों में गिरावट देखी गई। निफ्टी ऑटो, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी पीएसई और निफ्टी कमोडिटीज — ये सभी सूचकांक लाल निशान में थे। वहीं निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी फार्मा और निफ्टी आईटी हरे निशान में कारोबार करते दिखे।

मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला रुझान

निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 76 अंक (0.12 प्रतिशत) की कमज़ोरी के साथ 61,926.35 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 8 अंक की मामूली बढ़त के साथ 18,701 पर कारोबार कर रहा था। इस प्रकार छोटे और मझोले शेयरों में मिलाजुला रुझान बना रहा।

सेंसेक्स के गेनर्स और लूज़र्स

टेक महिंद्रा, एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, अदाणी पोर्ट्स, टाइटन, भारती एयरटेल, सन फार्मा, इंडिगो और टीसीएस प्रमुख गेनर्स में रहे। दूसरी तरफ एक्सिस बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), एचडीएफसी बैंक, इटरनल, बजाज फाइनेंस, मारुति सुजुकी, अल्ट्राटेक सीमेंट, एनटीपीसी और टाटा स्टील प्रमुख लूज़र्स रहे।

एशियाई और अमेरिकी बाज़ारों का हाल

अमेरिका-ईरान तनाव के चलते अधिकांश एशियाई बाज़ार भी दबाव में रहे। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, जकार्ता और सोल लाल निशान में थे, जबकि केवल बैंकॉक हरे निशान में कारोबार कर रहा था। गुरुवार को अमेरिकी बाज़ार भी गिरावट के साथ बंद हुए — डाओ जोन्स में 0.63 प्रतिशत और नैस्डैक में 0.13 प्रतिशत की कमज़ोरी दर्ज की गई।

विशेषज्ञों की राय और आगे की संभावनाएँ

बाज़ार जानकारों के अनुसार पश्चिम एशिया में तनाव घटने-बढ़ने का सिलसिला जारी है, जिसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। गौरतलब है कि भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद कुछ एशियाई बाज़ार उल्लेखनीय प्रदर्शन कर रहे हैं — दक्षिण कोरिया और ताइवान इस वर्ष के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ता रहे हैं, जिन्होंने क्रमशः 71 प्रतिशत और 40 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार इस असाधारण रिटर्न में AI से जुड़े शेयरों का बड़ा योगदान है। यदि पश्चिम एशिया में तनाव और गहराता है, तो कच्चे तेल के आयात पर निर्भर भारत के लिए चालू खाते का घाटा बढ़ने का जोखिम और अधिक हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चिंता यह है कि भारत एक ऐसे भू-राजनीतिक तूफान के बीच खड़ा है जिस पर उसका कोई नियंत्रण नहीं — और कच्चे तेल पर उसकी भारी निर्भरता इस जोखिम को कई गुना बढ़ा देती है। जबकि दक्षिण कोरिया और ताइवान AI-संचालित रैली से 71% और 40% रिटर्न कमा रहे हैं, भारतीय बाज़ार पश्चिम एशिया की हर हलचल पर झूलता रहता है। यह विरोधाभास उजागर करता है कि भारत को ऊर्जा विविधीकरण और टेक्नोलॉजी-केंद्रित सेक्टर में निवेश की कितनी ज़रूरत है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

8 मई को भारतीय शेयर बाज़ार क्यों गिरा?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों की धारणा कमज़ोर हुई, जिससे सेंसेक्स 212.58 अंक और निफ्टी 93 अंक की गिरावट के साथ खुले। एशियाई बाज़ारों में भी व्यापक बिकवाली देखी गई।
आज किन सेक्टर्स में सबसे ज़्यादा गिरावट रही?
ऑटो और बैंकिंग सेक्टर सबसे अधिक दबाव में रहे। निफ्टी ऑटो, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज लाल निशान में थे, जबकि निफ्टी फार्मा और निफ्टी आईटी हरे निशान में रहे।
अमेरिका-ईरान तनाव का भारतीय बाज़ार पर क्या असर होता है?
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आता है, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगाई और चालू खाते के घाटे का जोखिम बढ़ाता है। इससे विदेशी निवेशक भी सतर्क हो जाते हैं और बाज़ार में बिकवाली का दबाव बनता है।
आज एशियाई बाज़ारों का क्या हाल रहा?
टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, जकार्ता और सोल लाल निशान में थे, जबकि केवल बैंकॉक हरे निशान में कारोबार कर रहा था। अमेरिकी बाज़ार भी गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।
दक्षिण कोरिया और ताइवान के बाज़ार इतना अच्छा प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?
बाज़ार जानकारों के अनुसार दक्षिण कोरिया और ताइवान ने इस वर्ष क्रमशः 71 प्रतिशत और 40 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। इसमें AI से जुड़े शेयरों का बड़ा योगदान बताया जा रहा है, जो भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद मज़बूत बने हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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