सेंसेक्स 366 अंक टूटा, 75,648 पर खुला; वैश्विक अस्थिरता और ट्रंप-ईरान तनाव से IT शेयरों में बिकवाली
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स मंगलवार, 12 मई को शुरुआती कारोबार में 366 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,648 पर खुला, जबकि NSE निफ्टी 91 अंक या 0.38 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,724 पर था। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अस्थिरता और अमेरिका-ईरान के बीच गहराते भू-राजनीतिक तनाव ने मुंबई के बाजारों पर दबाव बनाया।
मुख्य घटनाक्रम
सुबह 9:19 बजे IST तक के शुरुआती कारोबार में गिरावट का नेतृत्व IT और सर्विसेज शेयरों ने किया। निफ्टी IT और निफ्टी सर्विसेज सूचकांक शीर्ष नुकसान उठाने वाले रहे। निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मीडिया, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी FMCG और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
दूसरी ओर, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी मेटल, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी PSU बैंक और निफ्टी PSE हरे निशान में बने रहे, जो कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से ऊर्जा शेयरों को मिले समर्थन का संकेत है।
मिडकैप और स्मॉलकैप पर भी दबाव
लार्जकैप की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 178 अंक यानी 0.96 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 18,347 पर था, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 472 अंक यानी 0.77 प्रतिशत की गिरावट के साथ 60,785 पर कारोबार कर रहा था।
सेंसेक्स पैक में गेनर्स और लूजर्स
सेंसेक्स पैक में भारती एयरटेल, टाटा स्टील, NTPC और SBI बढ़त में रहे। वहीं इन्फोसिस, TCS, टेक महिंद्रा, HCL टेक, मारुति सुजुकी, HDFC बैंक, बजाज फिनसर्व, ट्रेंट, एशियन पेंट्स, पावर ग्रिड, ITC, L&T और टाइटन नुकसान में रहे।
वैश्विक बाजारों की स्थिति
वैश्विक बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। टोक्यो, हांगकांग और बैंकॉक हरे निशान में थे, जबकि शंघाई, सोल और जकार्ता लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। सोमवार को अमेरिकी बाजार हल्की बढ़त के साथ बंद हुए — डाओ जोन्स 0.19 प्रतिशत और नैस्डैक 0.10 प्रतिशत की तेजी के साथ।
ट्रंप-ईरान तनाव और कच्चे तेल का असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान का शांति प्रस्ताव खारिज किए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव फिर से बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, अमेरिकी प्रतिबंध और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है। इसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रही — ब्रेंट क्रूड 0.92 प्रतिशत की बढ़त के साथ 105 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 1.08 प्रतिशत की मजबूती के साथ 99 डॉलर प्रति बैरल पर था।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, जिससे कच्चे तेल में उछाल सीधे व्यापार घाटे और मुद्रास्फीति पर असर डाल सकता है। आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेतों और ईरान-अमेरिका वार्ता की दिशा पर बाजार की नजर बनी रहेगी।