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सेंसेक्स 227 अंक टूटकर 74,118 पर, वैश्विक तनाव से IT और रियल्टी शेयरों में बिकवाली

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सेंसेक्स 227 अंक टूटकर 74,118 पर, वैश्विक तनाव से IT और रियल्टी शेयरों में बिकवाली

सारांश

वैश्विक तनाव और FPI की लगातार बिकवाली ने गुरुवार को भारतीय बाज़ार को लाल निशान पर खोला। सेंसेक्स 227 अंक टूटकर 74,118 पर और निफ्टी 80 अंक गिरकर 23,325 पर पहुँच गया। IT और रियल्टी सबसे ज़्यादा दबाव में, जबकि निवेशकों की निगाहें अब शुक्रवार को RBI की मौद्रिक नीति बैठक के नतीजों पर टिकी हैं।

मुख्य बातें

सेंसेक्स 227.52 अंक (0.31%) गिरकर 74,118.65 पर कारोबार कर रहा।
निफ्टी50 80.05 अंक (0.34%) टूटकर 23,325.55 पर पहुँचा।
निफ्टी रियल्टी , IT , मेटल और प्राइवेट बैंक सेक्टर सबसे ज़्यादा दबाव में।
अमेरिका-ईरान तनाव और FPI बिकवाली बाज़ार पर हावी।
निवेशकों की निगाहें शुक्रवार को आने वाले RBI मौद्रिक नीति फ़ैसले पर।

भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को कमजोर वैश्विक संकेतों के दबाव में लाल निशान पर खुला, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से बढ़े सैन्य तनाव ने निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया। BSE सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 227.52 अंक यानी 0.31% की गिरावट के साथ 74,118.65 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि NSE निफ्टी50 80.05 अंक यानी 0.34% टूटकर 23,325.55 पर पहुँच गया।

ओपनिंग में तेज़ गिरावट

30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,346.17 से 410.34 अंक गिरकर 73,935.83 पर खुला, जबकि निफ्टी50 ने 23,405.60 के मुक़ाबले 123.15 अंक की गिरावट के साथ 23,282.45 पर कारोबार की शुरुआत की। हालाँकि व्यापक बाज़ार में रुख़ अपेक्षाकृत स्थिर रहा — निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.17% और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.09% की बढ़त पर बना रहा।

सेक्टर और शेयरों का हाल

सेक्टरवार देखें तो निफ्टी रियल्टी, निफ्टी IT, निफ्टी मेटल और निफ्टी प्राइवेट बैंक सबसे ज़्यादा दबाव में रहे, जबकि निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी केमिकल और निफ्टी FMCG ने बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी50 पैक में ट्रेंट, M&M, इंफोसिस, आयशर मोटर्स और HDFC बैंक के शेयरों में सबसे ज़्यादा गिरावट रही, जबकि इटरनल, टाइटन, एशियन पेंट्स और अदाणी एंटरप्राइजेज शीर्ष लाभार्थियों में शामिल रहे।

RBI नीति बैठक पर निगाहें

घरेलू मोर्चे पर निवेशक शुक्रवार को घोषित होने वाले भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति के फ़ैसले से पहले सतर्क रुख़ अपना रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब कच्चे तेल की क़ीमतों में अस्थिरता और भू-राजनीतिक जोखिम मुद्रास्फीति के अनुमानों को प्रभावित कर सकते हैं।

पश्चिम एशिया का साया

ईरान ने बुधवार तड़के कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमला किया। इससे एक दिन पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया था कि उसने ईरान से दागी गई कई बैलिस्टिक मिसाइलों को रोका है और फारस की खाड़ी स्थित क़ेशम द्वीप पर रक्षात्मक कार्रवाई की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ईरान कथित तौर पर परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो गया है, और यदि हिज्बुल्लाह अपना विरोध बंद करे तो इज़रायल लेबनान के साथ युद्धविराम के लिए तैयार है।

विशेषज्ञों की राय

बाज़ार विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली बाज़ार पर दबाव बना रही है। आलोचकों का कहना है कि जब तक इस संकट का कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, बाज़ार में टिकाऊ तेज़ी मुश्किल है। अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाज़ारों में जारी मज़बूती यह संकेत देती है कि विदेशी निवेशक भारत से और पूँजी निकाल सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, डेरिवेटिव बाज़ार में FPI द्वारा बड़ी शॉर्ट पोज़िशन बनाना आगे और कमज़ोरी का संकेत है। हालाँकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट बैंकिंग, फार्मा, ऑटो और ऑटो एंसिलरी जैसे क्षेत्रों में आकर्षक मूल्यांकन पर गुणवत्तापूर्ण शेयर हासिल करने का अवसर भी बन सकती है। मौजूदा माहौल में रणनीति ‘वेट एंड वॉच’ की ही रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भू-राजनीतिक जोखिम के घरेलू पूँजी प्रवाह पर पड़ते असर का संकेत है। FPI की लगातार बिकवाली और डेरिवेटिव में बढ़ती शॉर्ट पोज़िशन यह बताती हैं कि विदेशी निवेशक भारत को फ़िलहाल ‘रिस्क-ऑफ’ ट्रेड मान रहे हैं, जबकि अमेरिका, जापान और ताइवान के बाज़ार चढ़ रहे हैं। असली परीक्षा शुक्रवार को RBI की नीति है — यदि केंद्रीय बैंक ने तरलता या दर पर कोई सख़्त संकेत दिया, तो रियल्टी और बैंकिंग में दबाव और गहरा सकता है। मध्यम अवधि का निवेशक हालाँकि इस अनिश्चितता को अवसर में बदल सकता है, बशर्ते वह क्षेत्र-चयन में अनुशासित रहे।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेंसेक्स आज क्यों गिरा?
सेंसेक्स 227.52 अंक की गिरावट के साथ 74,118.65 पर कारोबार कर रहा है, मुख्यतः अमेरिका-ईरान तनाव और कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली ने भी दबाव बढ़ाया है।
किन सेक्टरों पर सबसे ज़्यादा असर पड़ा?
निफ्टी रियल्टी, निफ्टी IT, निफ्टी मेटल और निफ्टी प्राइवेट बैंक सबसे ज़्यादा गिरावट में रहे। दूसरी ओर निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑयल एंड गैस, केमिकल और FMCG ने बेहतर प्रदर्शन किया।
RBI मौद्रिक नीति बैठक का परिणाम कब आएगा?
भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति का फ़ैसला शुक्रवार को घोषित होने की उम्मीद है। निवेशक रेपो रेट और मुद्रास्फीति परिदृश्य पर संकेतों के लिए इस बैठक का बारीकी से इंतज़ार कर रहे हैं।
पश्चिम एशिया संकट का भारतीय बाज़ार पर क्या असर है?
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका-ईरान सैन्य झड़पों और लेबनान में बढ़ते संघर्ष से कच्चे तेल की क़ीमतों में अनिश्चितता बनी है, जो आयात-निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम है। जब तक संकट का स्पष्ट समाधान नहीं निकलता, बाज़ार में टिकाऊ तेज़ी की संभावना सीमित है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए क्या रणनीति बेहतर है?
विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गुणवत्तापूर्ण शेयरों में प्रवेश का अवसर बन सकती है। बैंकिंग, फार्मा, ऑटो और ऑटो एंसिलरी क्षेत्र आकर्षक जोखिम-रिटर्न अनुपात पर दिख रहे हैं, हालाँकि ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अधिक सुरक्षित मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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