सेंसेक्स 227 अंक टूटकर 74,118 पर, वैश्विक तनाव से IT और रियल्टी शेयरों में बिकवाली
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को कमजोर वैश्विक संकेतों के दबाव में लाल निशान पर खुला, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से बढ़े सैन्य तनाव ने निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया। BSE सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 227.52 अंक यानी 0.31% की गिरावट के साथ 74,118.65 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि NSE निफ्टी50 80.05 अंक यानी 0.34% टूटकर 23,325.55 पर पहुँच गया।
ओपनिंग में तेज़ गिरावट
30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,346.17 से 410.34 अंक गिरकर 73,935.83 पर खुला, जबकि निफ्टी50 ने 23,405.60 के मुक़ाबले 123.15 अंक की गिरावट के साथ 23,282.45 पर कारोबार की शुरुआत की। हालाँकि व्यापक बाज़ार में रुख़ अपेक्षाकृत स्थिर रहा — निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.17% और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.09% की बढ़त पर बना रहा।
सेक्टर और शेयरों का हाल
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी रियल्टी, निफ्टी IT, निफ्टी मेटल और निफ्टी प्राइवेट बैंक सबसे ज़्यादा दबाव में रहे, जबकि निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी केमिकल और निफ्टी FMCG ने बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी50 पैक में ट्रेंट, M&M, इंफोसिस, आयशर मोटर्स और HDFC बैंक के शेयरों में सबसे ज़्यादा गिरावट रही, जबकि इटरनल, टाइटन, एशियन पेंट्स और अदाणी एंटरप्राइजेज शीर्ष लाभार्थियों में शामिल रहे।
RBI नीति बैठक पर निगाहें
घरेलू मोर्चे पर निवेशक शुक्रवार को घोषित होने वाले भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति के फ़ैसले से पहले सतर्क रुख़ अपना रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब कच्चे तेल की क़ीमतों में अस्थिरता और भू-राजनीतिक जोखिम मुद्रास्फीति के अनुमानों को प्रभावित कर सकते हैं।
पश्चिम एशिया का साया
ईरान ने बुधवार तड़के कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमला किया। इससे एक दिन पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया था कि उसने ईरान से दागी गई कई बैलिस्टिक मिसाइलों को रोका है और फारस की खाड़ी स्थित क़ेशम द्वीप पर रक्षात्मक कार्रवाई की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ईरान कथित तौर पर परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो गया है, और यदि हिज्बुल्लाह अपना विरोध बंद करे तो इज़रायल लेबनान के साथ युद्धविराम के लिए तैयार है।
विशेषज्ञों की राय
बाज़ार विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली बाज़ार पर दबाव बना रही है। आलोचकों का कहना है कि जब तक इस संकट का कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, बाज़ार में टिकाऊ तेज़ी मुश्किल है। अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाज़ारों में जारी मज़बूती यह संकेत देती है कि विदेशी निवेशक भारत से और पूँजी निकाल सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, डेरिवेटिव बाज़ार में FPI द्वारा बड़ी शॉर्ट पोज़िशन बनाना आगे और कमज़ोरी का संकेत है। हालाँकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट बैंकिंग, फार्मा, ऑटो और ऑटो एंसिलरी जैसे क्षेत्रों में आकर्षक मूल्यांकन पर गुणवत्तापूर्ण शेयर हासिल करने का अवसर भी बन सकती है। मौजूदा माहौल में रणनीति ‘वेट एंड वॉच’ की ही रहने की संभावना है।