सेंसेक्स 541 अंक टूटकर 74,726 पर; कमजोर वैश्विक संकेतों से रियल्टी-बैंकिंग शेयरों में बिकवाली
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स बुधवार, 20 मई को शुरुआती कारोबार में 541 अंक यानी 0.72 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,726 पर आ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 155 अंक यानी 0.66 प्रतिशत लुढ़ककर 23,462 पर था। सुबह 9:24 बजे IST दर्ज इन आँकड़ों के साथ सेंसेक्स 75,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे चला गया। कमजोर एशियाई बाजारों और अमेरिकी बाजारों में मंगलवार को आई गिरावट ने घरेलू निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
किन सेक्टरों में रही सबसे ज्यादा दबाव
शुरुआती कारोबार में गिरावट का नेतृत्व निफ्टी रियल्टी और निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स ने किया, जो सबसे बड़े लूजर्स रहे। इसके अलावा निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसई, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी कमोडिटीज भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। दूसरी तरफ निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी आईटी हरे निशान में बने रहे, जो कुछ राहत की बात रही।
व्यापक बाजार में भी बिकवाली का दबाव
गिरावट केवल लार्जकैप तक सीमित नहीं रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 285 अंक यानी 0.47 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 60,736 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 126 अंक यानी 0.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 17,738 पर आ गया। यह व्यापक बाजार में बिकवाली के दबाव का संकेत है।
सेंसेक्स के प्रमुख गेनर्स और लूजर्स
सेंसेक्स पैक में सन फार्मा, टीसीएस, इन्फोसिस और टेक महिंद्रा गेनर्स की भूमिका में रहे। वहीं टाटा स्टील, बीईएल, एमएंडएम, मारुति सुजुकी, इटरनल, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचयूएल, एसबीआई, एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस, इंडिगो, एशियन पेंट्स, आईटीसी और कोटक महिंद्रा बैंक लूजर्स में शामिल रहे।
वैश्विक बाजारों का हाल
एशियाई बाजारों में व्यापक कमजोरी देखने को मिली। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, सोल और जकार्ता के बाजार लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी शेयर बाजार भी मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे। कच्चे तेल में भी दबाव रहा — डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.58 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 103 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 0.63 प्रतिशत की गिरावट के साथ 110 डॉलर प्रति बैरल पर था।
एफआईआई और डीआईआई का रुख
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने मंगलवार के सत्र में शुद्ध बिकवाली की और इक्विटी में ₹2,457.49 करोड़ निकाले। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने ₹3,801.68 करोड़ का निवेश कर बाजार को आंशिक सहारा दिया। आगे बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों और एफआईआई के रुख पर निर्भर करेगी।