सेंसेक्स 114 अंक गिरकर 75,200 पर बंद; निफ्टी आईटी में 3.23% की तेज उछाल
सारांश
मुख्य बातें
बीएसई सेंसेक्स मंगलवार, 19 मई को शुरुआती बढ़त गँवाकर 114.19 अंक यानी 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,200.85 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 31.95 अंक (0.14 प्रतिशत) फिसलकर 23,618 पर आ गया। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों के बीच बैंकिंग शेयरों पर दबाव रहा, वहीं आईटी सेक्टर ने बाजार को थामने की कोशिश की।
मुख्य घटनाक्रम
इंडेक्स ने दिन के उच्चतम स्तर से 500 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की, और निफ्टी दिन के हाई से 160 अंकों से ज्यादा फिसला। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती सत्र में अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई अस्थायी रूप से रोकने की खबर से उत्साह आया था, लेकिन यह टिक नहीं सका और बाजार लाल निशान में लौट गया।
हालाँकि, व्यापक बाजारों ने प्रमुख बेंचमार्कों से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.17 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.91 प्रतिशत की उछाल दर्ज हुई।
सेक्टरवार प्रदर्शन
निफ्टी आईटी ने सत्र का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 3.23 प्रतिशत की तेजी हासिल की। इसके बाद निफ्टी रियल्टी (1.43 प्रतिशत), निफ्टी मीडिया (1.18 प्रतिशत), निफ्टी केमिकल्स और निफ्टी ऑटो ने भी सकारात्मक रुख दिखाया।
दूसरी ओर, निफ्टी प्राइवेट बैंक में सबसे अधिक गिरावट रही। निफ्टी बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज का प्रदर्शन भी कमज़ोर रहा।
शीर्ष लाभ और नुकसान
निफ्टी50 में इन्फोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा, टीसीएस, इटरनल और विप्रो के शेयर सबसे अधिक चढ़े। वहीं कोटक बैंक, टाइटन, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा कंज्यूमर और भारती एयरटेल के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई।
निवेशकों की संपत्ति और बाजार पूंजीकरण
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले सत्र के ₹458 लाख करोड़ से बढ़कर ₹459 लाख करोड़ पहुँच गया, जिससे निवेशकों को इस सत्र में ₹1 लाख करोड़ से अधिक का लाभ हुआ।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
एक बाजार विशेषज्ञ के अनुसार, आईटी शेयरों में तेजी की मुख्य वजह रुपए में लगातार कमज़ोरी और आकर्षक वैल्यूएशन है। उन्होंने कहा कि चौथी तिमाही के नतीजे घरेलू अर्थव्यवस्था की मज़बूती को दर्शा रहे हैं, लेकिन बाजार का ध्यान अब बढ़ती महंगाई की ओर तेज़ी से खिंच रहा है।
विशेषज्ञ के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए कंपनियों की कमाई के अनुमान घटने की आशंका बढ़ रही है। इसकी मुख्य वजह उम्मीद से अधिक थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई, ईंधन की बढ़ी कीमतों का क्रमिक असर और बॉन्ड यील्ड का ऊँचे स्तर पर बने रहना है। आगे बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों, महंगाई के आँकड़ों और कॉर्पोरेट आय के अनुमानों पर निर्भर करेगी।