सेंसेक्स 188 अंक टूटा, 77,966 पर बंद; IT शेयरों में बिकवाली, महंगाई आंकड़ों का इंतजार
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स बुधवार, 12 अगस्त को 187.90 अंक यानी 0.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,966.35 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 भी 35.75 अंक या 0.15 प्रतिशत फिसलकर 24,435.95 पर आ गया। आईटी क्षेत्र की तीव्र बिकवाली और जुलाई महंगाई आंकड़ों की प्रतीक्षा ने निवेशकों को सतर्क रखा।
मुख्य घटनाक्रम
निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ सत्र का सबसे कमज़ोर सूचकांक रहा। इसके अलावा निफ्टी एफएमसीजी 0.73 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 0.45 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर 0.44 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो 0.32 प्रतिशत नीचे बंद हुए।
दूसरी ओर, निफ्टी पीएसयू बैंक 2.05 प्रतिशत की बढ़त के साथ शीर्ष गेनर रहा। निफ्टी मीडिया 1.05 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 0.70 प्रतिशत और निफ्टी मेटल 0.54 प्रतिशत की तेज़ी के साथ बंद हुए।
व्यापक बाज़ार का हाल
व्यापक बाज़ार में मिलाजुला रुझान देखा गया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 180.55 अंक यानी 0.28 प्रतिशत की बढ़त के साथ 64,024.40 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 35.50 अंक या 0.18 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,821.65 पर रहा।
सेंसेक्स के गेनर्स और लूजर्स
सेंसेक्स पैक में SBI, भारती एयरटेल, अल्ट्राटेक सीमेंट, पावर ग्रिड, BEL, ICICI बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक बढ़त में रहे। वहीं TCS, M&M, टाटा स्टील, L&T, इटरनल, इन्फोसिस, ITC, ट्रेंट, बजाज फाइनेंस, मारुति सुज़ुकी और HUL नुकसान में बंद हुए।
महंगाई आंकड़ों का इंतजार
बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों की नज़र जुलाई के महंगाई आंकड़ों पर टिकी है, जो इस बार विशेष रूप से अहम माने जा रहे हैं। जुलाई में कच्चे तेल की कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव के बाद यह देखना ज़रूरी होगा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर इसका कितना असर पड़ा।
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि बाज़ार का समग्र रुझान अभी भी सकारात्मक बना हुआ है। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक अपने सर्वकालिक उच्च स्तरों के करीब हैं, जो दर्शाता है कि घरेलू निवेशकों का भारतीय बाज़ार पर भरोसा बरकरार है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत की वृद्धि की कहानी मज़बूत बनी हुई है।
आगे क्या
महंगाई के आंकड़े जारी होने के बाद बाज़ार में नई दिशा तय होने की उम्मीद है। यदि CPI आंकड़े अनुमान से कम रहे, तो भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में दर कटौती की संभावना को बल मिल सकता है, जो बाज़ार के लिए सकारात्मक संकेत होगा।