सेंसेक्स 281 अंक टूटकर 77,728 पर बंद, IT और FMCG शेयरों में बिकवाली का दबाव
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाजार सोमवार, 17 अगस्त 2026 को लाल निशान में बंद हुआ। BSE सेंसेक्स 281.09 अंक यानी 0.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,728.16 पर और NSE निफ्टी 50 78.35 अंक यानी 0.32 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,287.65 पर बंद हुआ। सत्र के दौरान आईटी और एफएमसीजी क्षेत्रों में बिकवाली का दबाव हावी रहा।
कौन से सूचकांक रहे दबाव में
निफ्टी आईटी और निफ्टी एफएमसीजी इस सत्र के सबसे बड़े नुकसान उठाने वाले सूचकांक रहे। इनके अलावा निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी फार्मा और निफ्टी पीएसयू बैंक भी लाल निशान में बंद हुए।
दूसरी ओर, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मेटल, निफ्टी मीडिया, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी पीएसई हरे निशान में बंद होने में सफल रहे।
सेंसेक्स पैक में प्रमुख शेयरों का हाल
टाटा स्टील, एक्सिस बैंक, बीईएल, एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी और बजाज फाइनेंस हरे निशान में बंद हुए। वहीं इन्फोसिस, एचसीएल टेक, सन फार्मा, टीसीएस, टेक महिंद्रा, आईटीसी, ट्रेंट, एनटीपीसी, एचयूएल, एमएंडएम, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स और मारुति सुजुकी लाल निशान में बंद हुए।
मिडकैप और स्मॉलकैप में मामूली तेजी
लार्जकैप की कमजोरी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट ने बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 34.85 अंक यानी 0.05 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 63,817.00 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 70.70 अंक यानी 0.36 प्रतिशत की मजबूती के साथ 19,809.25 पर बंद हुआ।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ऊर्जा की ऊँची कीमतों से उत्पन्न इनपुट लागत का दबाव अभी भी निकट भविष्य में बाजार की धारणा को प्रभावित कर रहा है। हालाँकि, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजों से आने वाली तिमाहियों में कमाई के अनुमानों में सुधार की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि कम लागत वाली इन्वेंट्री से इस तिमाही में मुनाफे को सहारा मिला, लेकिन ऊँची लागत पर नया स्टॉक खरीदने से वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में मार्जिन पर दबाव आ सकता है।
घरेलू और वैश्विक कारक
घरेलू मोर्चे पर, कच्चे तेल की ऊँची कीमतों और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट विंडो को समय से पहले बंद करने के फैसले के बाद बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी दर्ज की गई। वैश्विक स्तर पर, अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने और उपभोक्ता डेटा के नरम रहने से निकट भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने की आशंकाएँ कम हुई हैं, जिससे दीर्घकालिक जोखिम क्षमता में सुधार देखा जा रहा है। आगे आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगे।