सेंसेक्स 70 अंक टूटकर 78,009 पर बंद, लगातार चौथे सत्र में गिरावट; फार्मा-मेटल पर दबाव
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स शुक्रवार, 14 अगस्त को 70.71 अंक यानी 0.09 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,009.25 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 29.85 अंक यानी 0.12 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 24,366 पर बंद हुआ। यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र था जब भारतीय शेयर बाज़ार लाल निशान में बंद हुआ। फार्मा और मेटल सेक्टर में बिकवाली के दबाव ने बाज़ार की धारणा को कमज़ोर बनाए रखा।
किन सेक्टरों में रही सबसे ज़्यादा कमज़ोरी
निफ्टी फार्मा 0.90 प्रतिशत और निफ्टी मेटल 0.71 प्रतिशत की गिरावट के साथ दिन के सबसे बड़े लूज़र्स रहे। इनके अलावा निफ्टी ऑटो 0.63 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 0.57 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज 0.56 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 0.51 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.47 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.46 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ बंद हुए।
वहीं, निफ्टी मीडिया 0.96 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 0.76 प्रतिशत, निफ्टी इन्फ्रा 0.28 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 0.09 प्रतिशत और निफ्टी कंजम्पशन 0.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए, जिन्होंने गिरावट को सीमित रखने में मदद की।
सेंसेक्स के गेनर्स और लूज़र्स
सेंसेक्स पैक में भारती एयरटेल, अदाणी पोर्ट्स, आईसीआईसीआई बैंक, टाइटन, एमएंडएम, एचडीएफसी बैंक और इटरनल बढ़त में रहे। दूसरी तरफ एशियन पेंट्स, इंडिगो, एनटीपीसी, पावर ग्रिड, SBI, HCL टेक, टेक महिंद्रा, सन फार्मा, टाटा स्टील, ट्रेंट, ITC, एक्सिस बैंक और TCS लूज़र्स की सूची में रहे।
मिडकैप और स्मॉलकैप भी दबाव में
लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 339.40 अंक यानी 0.53 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 63,782.15 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 136.55 अंक यानी 0.69 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,738.55 पर बंद हुआ।
विशेषज्ञों की राय
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक एनर्जी की कीमतों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड के आउटलुक पर स्पष्टता का इंतज़ार कर रहे हैं, जिसके चलते बाज़ार एक सीमित दायरे में बना हुआ है। हालाँकि, मांग में सुधार की वजह से कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और डिस्क्रिशनरी कंजम्पशन शेयरों की अगुवाई में बाज़ार दिन के निचले स्तरों से सुधरकर बंद हुआ।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि तिमाही के दौरान उम्मीद से बेहतर कॉर्पोरेट नतीजों और घरेलू कारकों के चलते 'बॉटम-अप' स्टॉक चुनाव के लिए अवसर बन रहे हैं। रुपए में स्थिरता, भारत की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में नरमी और FII की भागीदारी में क्रमिक सुधार जैसे घरेलू कारक अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह लगातार चौथी गिरावट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक बाज़ारों में अनिश्चितता बनी हुई है। बाज़ार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक बॉन्ड यील्ड और एनर्जी कीमतों पर स्पष्टता नहीं आती, बाज़ार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अगले सप्ताह के वैश्विक संकेत और घरेलू आर्थिक आँकड़े बाज़ार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगे।