सेंसेक्स 46 अंक गिरकर 77,307 पर, मेटल-एनर्जी में बिकवाली; ईरान प्रतिबंधों का असर
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स मंगलवार, 25 अगस्त को कारोबार की शुरुआत में 46 अंक यानी 0.06 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 77,307 पर था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 33 अंक यानी 0.14 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 24,196 पर कारोबार कर रहा था। सुबह 9:20 बजे IST दर्ज इन आँकड़ों के अनुसार, बाज़ार की शुरुआत लगभग सपाट रही और व्यापक बिकवाली का दबाव बना रहा।
किन सेक्टर्स में रही बिकवाली
बाज़ार में गिरावट की अगुवाई निफ्टी मेटल और निफ्टी ऑटो ने की, जो शुरुआती कारोबार में शीर्ष घाटे वाले सूचकांक रहे। इसके अलावा निफ्टी एनर्जी, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी पीएसई, निफ्टी कमोडिटीज़, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी फार्मा, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी इन्फ्रा — सभी लाल निशान में थे। केवल निफ्टी मीडिया और निफ्टी पीएसयू बैंक हरे निशान में कारोबार कर रहे थे।
मिडकैप और स्मॉलकैप पर भी दबाव
लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप खंड में भी बिकवाली देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 34 अंक यानी 0.05 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 63,785 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 36 अंक यानी 0.18 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,890 पर था।
सेंसेक्स पैक में गेनर्स और लूजर्स
सेंसेक्स के घटकों में ट्रेंट, अदाणी पोर्ट्स, भारती एयरटेल, इटरनल, टाइटन, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, बजाज फिनसर्व, एलएंडटी, एसबीआई, टाटा स्टील और इंडिगो बढ़त में रहे। दूसरी ओर एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, मारुति सुजुकी, इन्फोसिस, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस, एचयूएल, एशियन पेंट्स, टीसीएस, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा और एमएंडएम नुकसान में रहे।
वैश्विक बाज़ारों का मिला-जुला संकेत
एशियाई बाज़ारों में भी कमज़ोरी का रुख रहा। शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल के बाज़ार लाल निशान में थे, जबकि केवल टोक्यो हरे निशान में कारोबार कर रहा था। अमेरिकी बाज़ार पिछले सत्र में मिले-जुले बंद हुए थे — डाओ जोन्स 0.28 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि नैस्डैक 0.75 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
ईरान प्रतिबंध और कच्चे तेल की चिंता
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 'सेकेंडरी सैंक्शन' के खतरे ने वैश्विक बाज़ारों में अनिश्चितता का नया दौर पैदा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा ऊँचे स्तर पर बनी रह सकती हैं, जिससे बाज़ार में तेज़ी पर अंकुश लग सकता है और कारोबार एक सीमित दायरे में सिमटा रह सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब घरेलू बाज़ार पहले से ही वैश्विक संकेतों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है।