सेंसेक्स 893 अंक टूटा, 76,200 पर बंद; मेटल, आईटी और पीएसयू बैंक शेयरों में भारी बिकवाली
सारांश
मुख्य बातें
बीएसई सेंसेक्स मंगलवार, 23 जून को 893.39 अंक यानी 1.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,200.68 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी50 278.80 अंक गिरकर 23,824.10 पर आ गया। लगातार तेजी के बाद आई इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह मेटल, आईटी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में व्यापक बिकवाली, एशियाई बाजारों में कमजोरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों की निरंतर बिकवाली रही।
मुख्य घटनाक्रम
व्यापक बाजार में भी दबाव दिखा — निफ्टी मिडकैप 1.05 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 0.48 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। सेक्टरवार देखें तो निफ्टी मेटल में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई और यह सभी सेक्टरों में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा। निफ्टी आईटी और पीएसयू बैंक इंडेक्स भी दबाव में रहे। हालांकि, निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।
निफ्टी50 में सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाली कंपनियों में इन्फोसिस, विप्रो, टीसीएस और जेएसडब्ल्यू स्टील शामिल रहीं। इसके अलावा टाटा स्टील, हिंडाल्को, बीईएल और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयरों में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
एशियाई बाजारों का असर
मंगलवार को घरेलू बाजार पर सबसे बड़ा झटका दक्षिण कोरिया के बाजार से आया, जहाँ प्रमुख सूचकांक कोस्पी 10 प्रतिशत तक गिर गया। भारी बिकवाली और निवेशकों की घबराहट को नियंत्रित करने के लिए एक्सचेंज को 20 मिनट के लिए ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। ट्रेडिंग दोबारा शुरू होने के बाद भी कोस्पी की गिरावट 9 प्रतिशत से अधिक बनी रही।
जापान का निक्केई 225 करीब 3.2 प्रतिशत गिरा, चीन का शंघाई कम्पोजिट 2 प्रतिशत तक फिसला और हांगकांग का हैंग सेंग भी करीब 2 प्रतिशत नीचे कारोबार करता दिखा। इन वैश्विक संकेतों ने घरेलू निवेशकों की धारणा को कमजोर किया।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये पर दबाव
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली जारी रही। सोमवार को एफआईआई ने करीब ₹635.91 करोड़ के शेयर बेचे। डॉलर के मुकाबले रुपया भी 6 पैसे कमजोर होकर 94.69 के स्तर पर आ गया। इन सभी कारकों ने मिलकर घरेलू बाजार पर दबाव को और बढ़ा दिया, जिससे अंतिम घंटे में गिरावट और तेज हो गई।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर नकारात्मक संकेतों और सतर्कता के माहौल के बीच शुरुआती बढ़त टिक नहीं पाई और बाजार की धारणा कमजोर पड़ गई। हालिया तेजी के बाद प्रॉफिट बुकिंग के दबाव ने गिरावट को और गहरा किया।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि वैश्विक स्तर पर कीमतों में गिरावट और माँग को लेकर अनिश्चितता के चलते मेटल सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित रहा। आईटी सेक्टर पर भी दोहरा दबाव बना — एक तरफ वैश्विक टेक सेक्टर में कमजोरी और दूसरी तरफ भारतीय आईटी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से होने वाले बदलावों को लेकर निरंतर चिंताएँ।
हालांकि, कच्चे तेल की अपेक्षाकृत स्थिर कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव में कुछ कमी से राहत मिली। निवेशकों की नजर अब मॉनसून की प्रगति और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के घटनाक्रम पर टिकी है, जो आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा तय करेंगे।