सेंसेक्स 300 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 24,343 पर खुला; अमेरिका-ईरान तनाव और महंगे तेल का दबाव
सारांश
मुख्य बातें
बीएसई सेंसेक्स सोमवार, 17 अगस्त को 100 अंक से अधिक की गिरावट के साथ 77,892.92 पर खुला, जबकि निफ्टी 50 22.55 अंक यानी 0.09 प्रतिशत फिसलकर 24,343.45 पर आ गया। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगभग ₹89 डॉलर प्रति बैरल पर टिके रहने से निवेशकों की धारणा कमज़ोर हुई और सप्ताह का पहला कारोबारी दिन दबाव में रहा।
व्यापक बाजार में भी बिकवाली
व्यापक बाजार भी इस दबाव से अछूते नहीं रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.36 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करते नज़र आए। सेक्टर-वार देखें तो सबसे अधिक दबाव निफ्टी मिडस्मॉल फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स पर रहा, जो 0.98 प्रतिशत तक फिसल गया। निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी एफएमसीजी में भी 0.9 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
इसके अलावा रियल्टी, सीमेंट, आईटी, ऊर्जा और निजी बैंकिंग शेयरों में भी बिकवाली का दबाव देखा गया। निफ्टी50 में सबसे अधिक नुकसान उठाने वाले शेयरों में एचसीएलटेक, इंफोसिस, टीसीएस, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और विप्रो शामिल रहे।
कुछ सेक्टरों में राहत की खरीदारी
हालांकि बाजार में पूरी तरह निराशा नहीं रही। निफ्टी केमिकल्स इंडेक्स 0.48 प्रतिशत की बढ़त के साथ हरे निशान में रहा, जबकि निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर इंडेक्स लगभग 0.45 प्रतिशत मज़बूत हुआ। एचडीएफसी लाइफ, हिंडाल्को, मैक्स हेल्थ, ओएनजीसी, आयशर मोटर्स और टाइटन के शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते नज़र आए।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निकट अवधि में निफ्टी के 24,000 से 24,600 अंकों के दायरे में सीमित रहने की संभावना है। उनका कहना है कि जब तक कोई नया सकारात्मक ट्रिगर सामने नहीं आता, बाजार इसी दायरे में घूमता रहेगा।
तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, 24,329 से 24,240 का स्तर निफ्टी के लिए मजबूत सपोर्ट ज़ोन साबित हुआ है। ऊपर की ओर 24,540 से 24,666 के बीच प्रतिरोध है। यदि सूचकांक 24,170 अंक के नीचे फिसलता है, तो गिरावट 23,575 अंक तक जा सकती है।
आम जनता और निवेशकों पर असर
विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक फिलहाल निफ्टी 50 के बाहर अवसर तलाश सकते हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में स्टॉक-विशिष्ट गतिविधियाँ मज़बूत बनी हुई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पहली तिमाही के नतीजों के दौरान भी व्यापक बाजार ने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया था।
गौरतलब है कि यदि कॉरपोरेट आय में सुधार जारी रहता है, तो ऊंचे कच्चे तेल जैसी बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारतीय शेयर बाजार को मज़बूती मिल सकती है। निवेशकों की नज़र अब अमेरिका-ईरान वार्ता की दिशा और वैश्विक ऊर्जा बाजार के रुझानों पर टिकी है।