सेंसेक्स 1,677 अंक धराशायी, निफ्टी 23,882 पर बंद; अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की उछाल से बाज़ार में भूचाल
सारांश
मुख्य बातें
बीएसई सेंसेक्स बुधवार, 8 जुलाई को 1,677.12 अंक यानी 2.15 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 76,503.60 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 516.65 अंक (2.12 प्रतिशत) फिसलकर 23,882.05 पर आ गया। अमेरिका-ईरान तनाव के नए सिरे से भड़कने और अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में 6 प्रतिशत से अधिक की उछाल ने निवेशकों की धारणा को बुरी तरह झकझोर दिया, और दोनों प्रमुख सूचकांकों ने तीन महीने से अधिक के सबसे खराब एकल-दिवसीय प्रदर्शन का रिकॉर्ड दर्ज किया।
मुख्य घटनाक्रम
सेंसेक्स ने बुधवार को अपने पिछले बंद 78,180.72 से 364.27 अंक नीचे 77,816.45 पर कारोबार शुरू किया। दिन के कारोबार में बिकवाली का दबाव इतना तीव्र रहा कि सेंसेक्स इंट्रा-डे में 76,259.03 के निम्नतम स्तर तक लुढ़का — यानी 2.45 प्रतिशत की गिरावट। इसी तरह, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,398.70 से 139.15 अंक नीचे 24,259.55 पर खुला और दिन में 23,805.20 का निम्नतम स्तर छुआ।
व्यापक बाज़ारों में भी बिकवाली का असर साफ दिखा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.7 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टरवार प्रदर्शन
सभी प्रमुख सेक्टोरल सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। सबसे अधिक नुकसान निफ्टी पीएसयू बैंक (-2.56 प्रतिशत) को हुआ। इसके बाद निफ्टी प्राइवेट बैंक (-2.42 प्रतिशत), निफ्टी बैंक (-2.40 प्रतिशत), निफ्टी एफएमसीजी (-2.39 प्रतिशत) और निफ्टी मीडिया (-2.33 प्रतिशत) रहे।
निफ्टी ऑयल एंड गैस (-2.13 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (-2.06 प्रतिशत) और निफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर (-2.06 प्रतिशत) में भी बिकवाली का दबाव बना रहा। तुलनात्मक रूप से निफ्टी फार्मा (-0.87 प्रतिशत) और निफ्टी मेटल (-0.68 प्रतिशत) में गिरावट कम रही।
निफ्टी 50 में सर्वाधिक नुकसान उठाने वाले शेयरों में जियो फाइनेंशियल, इंटरग्लोब एविएशन, श्रीराम फाइनेंस, मारुति सुजुकी और एचयूएल शामिल रहे। वहीं, ओएनजीसी, बजाज ऑटो, हिंडाल्को और कोल इंडिया हरे निशान में बंद होने में सफल रहे।
बाज़ार पूंजीकरण पर असर
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस एकल-दिवसीय बिकवाली में बीएसई-सूचीबद्ध शेयरों के कुल बाज़ार पूंजीकरण में ₹8 लाख करोड़ से अधिक की गिरावट आई। मंगलवार को यह मूल्यांकन ₹480.20 लाख करोड़ था, जो घटकर ₹471.44 लाख करोड़ पर आ गया।
अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल का संकट
यह बाज़ार पतन ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम समाप्त हो गया है, हालांकि होर्मुज जलडमरूमध्य में दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे पर हमले किए जाने के बाद बातचीत जारी रह सकती है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है, और किसी भी व्यवधान की आशंका से ऊर्जा बाज़ार में तीव्र उथल-पुथल मच जाती है।
अंतर्राष्ट्रीय तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड में 6.52 प्रतिशत यानी $4.69 की उछाल आई और यह $80 प्रति बैरल के करीब कारोबार करता दिखा। इसी तरह, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में 6 प्रतिशत से अधिक यानी $4.85 की बढ़ोतरी हुई और यह लगभग $75 प्रति बैरल पर पहुंच गया।
इस बीच, भारतीय रुपया बुधवार को डॉलर के मुकाबले 58 पैसे कमज़ोर होकर 95.55 पर बंद हुआ, जो मंगलवार के 94.97 के बंद स्तर से काफी नीचे है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
एक बाज़ार विशेषज्ञ के अनुसार, आने वाले कारोबारी सत्रों में निफ्टी के लिए 23,780–23,750 का स्तर तत्काल सपोर्ट के रूप में निर्णायक रहेगा। यदि इंडेक्स इस दायरे के नीचे टिकाऊ रूप से फिसलता है, तो अल्पावधि में गिरावट पहले 23,600 और उसके बाद 23,450 तक जा सकती है। ऊपर की ओर 24,020–24,050 का दायरा तत्काल रेजिस्टेंस बना हुआ है — इस स्तर के ऊपर टिकाऊ मजबूती मिलने पर ही रिकवरी के संकेत पुख्ता हो सकते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय बाज़ार पिछले कई सत्रों की बढ़त के बाद एक नाज़ुक मोड़ पर खड़ा था। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार की दिशा अगले कुछ सत्रों में बाज़ार की चाल तय करेगी।