8 जुलाई 2026
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अभिषेक बनर्जी दूसरी बार वॉयस सैंपल देने नहीं पहुंचे, सीआईडी ने अदालत से सख्त कार्रवाई की माँग की

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अभिषेक बनर्जी दूसरी बार वॉयस सैंपल देने नहीं पहुंचे, सीआईडी ने अदालत से सख्त कार्रवाई की माँग की

सारांश

टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी लगातार दूसरी बार वॉयस सैंपल देने बिधाननगर अदालत नहीं पहुँचे। सीआईडी ने जानबूझकर जांच बाधित करने का आरोप लगाया, जबकि कलकत्ता हाई कोर्ट पहले ही सहयोग न करने पर सवाल उठा चुका है। 31 जुलाई तक अंतरिम राहत के बावजूद यह रवैया कानूनी पेचीदगियाँ बढ़ा रहा है।

मुख्य बातें

अभिषेक बनर्जी 8 जुलाई 2026 को बिधाननगर अदालत में दूसरी बार वॉयस सैंपल देने के लिए उपस्थित नहीं हुए।
सीआईडी अधिकारी दोपहर 12 बजे तक अदालत में मौजूद रहे, लेकिन टीएमसी महासचिव नहीं आए।
सरकारी वकील बिवास चट्टोपाध्याय ने लिखित बयान दाखिल कर जानबूझकर जांच में देरी का आरोप लगाया और सख्त कार्रवाई की माँग की।
कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने मंगलवार को तत्काल सुनवाई की माँग खारिज कर सहयोग का निर्देश दिया था।
बनर्जी को गिरफ्तारी सहित पुलिस कार्रवाई से 31 जुलाई तक अंतरिम राहत मिली हुई है।
उन पर हिंसा भड़काने वाले बयान देने और गृह मंत्री अमित शाह को धमकी देने का कथित आरोप है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी बुधवार, 8 जुलाई 2026 को दूसरी बार बिधाननगर अदालत में वॉयस सैंपल देने के लिए उपस्थित नहीं हुए। उत्तर 24 परगना जिले की इस अदालत में उन्हें हाल के विधानसभा चुनाव से जुड़े कथित हेट स्पीच मामले की सीआईडी जांच के तहत आवाज का नमूना देना था। उनकी अनुपस्थिति पर सरकारी पक्ष ने अदालत में लिखित बयान दाखिल कर सख्त कानूनी कदम उठाने की माँग की है।

क्या था अदालत का आदेश

अदालत के निर्देश के अनुसार, अभिषेक बनर्जी को बुधवार दोपहर 12 बजे तक बिधाननगर अदालत में उपस्थित होकर न्यायिक मजिस्ट्रेट और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मौजूदगी में वॉयस सैंपल देना था। सीआईडी अधिकारियों की टीम समय पर अदालत पहुँच गई और उनका इंतजार करती रही, लेकिन टीएमसी महासचिव नहीं आए।

सरकारी वकील का लिखित बयान

सरकारी वकील बिवास चट्टोपाध्याय ने अदालत को बताया कि अभिषेक बनर्जी लगातार दूसरी बार वॉयस सैंपल देने के लिए उपस्थित नहीं हुए हैं। उन्होंने अदालत में एक लिखित बयान दाखिल किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि बनर्जी जानबूझकर जांच प्रक्रिया में देरी कर रहे हैं और उसे बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं।

लिखित बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि अभिषेक बनर्जी पर हिंसा भड़काने वाले बयान देने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी देने का आरोप है। सरकारी वकील ने तर्क दिया कि बार-बार अनुपस्थित रहना अदालत के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन है और अब उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

कलकत्ता हाई कोर्ट की टिप्पणी

गौरतलब है कि मंगलवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने स्वयं यह सवाल उठाया था कि जब अभिषेक बनर्जी को गिरफ्तारी सहित किसी भी पुलिस कार्रवाई से 31 जुलाई तक अंतरिम राहत मिली हुई है, तो वह जांच में सहयोग करने से क्यों बच रहे हैं।

बनर्जी के वकील ने मंगलवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की अदालत में तत्काल सुनवाई की माँग की थी और बिधाननगर जिला अदालत के वॉयस सैंपल संबंधी आदेश को चुनौती दी थी। हालांकि, न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने तत्काल सुनवाई की माँग खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि बनर्जी को बिना देरी के जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना चाहिए।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला हाल के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से जुड़ा है। सीआईडी इन भाषणों की जांच कर रही है और वॉयस सैंपल फॉरेंसिक विश्लेषण के लिए आवश्यक बताया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ टीएमसी और विपक्षी दलों के बीच चुनाव-पश्चात तनाव बना हुआ है।

आगे क्या होगा

अदालत अब सरकारी वकील के लिखित बयान पर सुनवाई करेगी और अभिषेक बनर्जी की लगातार अनुपस्थिति को देखते हुए अगले कदम तय किए जाएँगे। 31 जुलाई तक उन्हें मिली अंतरिम राहत की समयसीमा भी इस मामले में अहम भूमिका निभाएगी। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अदालत के आदेश की बार-बार अवहेलना से अवमानना की कार्यवाही का रास्ता खुल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वह राहत अब ढाल बन गई है। यदि अदालत ने अब भी कठोर कदम नहीं उठाए, तो यह मिसाल बनेगी कि न्यायिक आदेशों को राजनीतिक रसूख से टाला जा सकता है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी का वॉयस सैंपल मामला क्या है?
यह मामला हाल के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए कथित हेट स्पीच से जुड़ा है। सीआईडी फॉरेंसिक जांच के लिए अभिषेक बनर्जी का वॉयस सैंपल लेना चाहती है, जिसके लिए बिधाननगर अदालत ने उन्हें उपस्थित होने का आदेश दिया था।
अभिषेक बनर्जी पर क्या आरोप हैं?
उन पर कथित तौर पर हिंसा भड़काने वाले बयान देने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी देने का आरोप है। सरकारी वकील ने अदालत में दाखिल लिखित बयान में यह आरोप लगाए हैं।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस मामले में क्या कहा?
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने मंगलवार को अभिषेक बनर्जी के वकील की तत्काल सुनवाई की माँग खारिज कर दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बनर्जी को जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना चाहिए और बिना देरी के वॉयस सैंपल देना चाहिए।
अभिषेक बनर्जी को अंतरिम राहत कब तक मिली है?
कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी सहित किसी भी पुलिस कार्रवाई से 31 जुलाई तक अंतरिम राहत दी हुई है। हालांकि, हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह राहत जांच में सहयोग से मुक्ति नहीं देती।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
अदालत सरकारी वकील के लिखित बयान पर सुनवाई करेगी और अभिषेक बनर्जी की लगातार अनुपस्थिति के मद्देनजर अगले कदम तय किए जाएँगे। कानूनी जानकारों के अनुसार, बार-बार अदालती आदेश की अवहेलना से अवमानना की कार्यवाही की संभावना बन सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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