अभिषेक बनर्जी ने बंगाल सीआईडी का तीसरा नोटिस भी नकारा, हाईकोर्ट सुनवाई का हवाला देकर मांगा अतिरिक्त समय
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार, 9 जून को पश्चिम बंगाल पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) द्वारा जारी लगातार तीसरे नोटिस को भी नजरअंदाज कर दिया। यह नोटिस राज्य विधानसभा में विपक्ष के लिए आरक्षित पदों से जुड़े एक प्रस्ताव में पार्टी के कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित विसंगति की जांच के सिलसिले में पूछताछ हेतु भेजा गया था। शाम 5 बजे तक निर्धारित समय-सीमा के भीतर वे कोलकाता के भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय में उपस्थित नहीं हुए।
नोटिस की पृष्ठभूमि और पूर्व समन
राज्य पुलिस सूत्रों के अनुसार, अभिषेक बनर्जी ने सीआईडी को एक पत्र भेजकर नई दिल्ली में होने का हवाला देते हुए उपस्थिति के लिए और समय माँगा। उल्लेखनीय है कि पहला नोटिस 1 जून को और दूसरा 8 जून को भेजा गया था — दोनों को भी नजरअंदाज किया गया था।
अपने पत्र में उन्होंने बुधवार को कलकत्ता हाईकोर्ट की अवकाशकालीन एकल पीठ में होने वाली सुनवाई का भी उल्लेख किया। यह सुनवाई उनकी उस याचिका पर निर्धारित थी जिसमें उन्होंने सीआईडी के समन को चुनौती दी है और गिरफ्तारी सहित किसी भी पुलिस कार्रवाई से सुरक्षा की माँग की है।
समानांतर छापेमारी: कालीघाट और कैमक स्ट्रीट
जिस समय अभिषेक बनर्जी का पत्र सीआईडी मुख्यालय पहुँचा, उसी समय सीआईडी की दो टीमें समानांतर तलाशी अभियान चला रही थीं। एक टीम दक्षिण कोलकाता के कालीघाट में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के निकट स्थित TMC कार्यालय में, और दूसरी टीम मध्य कोलकाता की कैमक स्ट्रीट स्थित उस कार्यालय में पहुँची जहाँ से पार्टी महासचिव अपना कामकाज संचालित करते थे।
दिल्ली में TMC की राजनीतिक हलचल
अभिषेक बनर्जी 6 जून की शाम को नई दिल्ली रवाना हुए थे, जबकि ममता बनर्जी 8 जून की शाम को राजधानी पहुँचीं। दोनों ने 8 जून को नई दिल्ली में विपक्षी गठबंधन इंडिया की एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग लिया।
यह ऐसे समय में हो रहा है जब TMC के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 ने पार्टी के चार बार के सांसद काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय के नेतृत्व में बागी रुख अपनाते हुए अभिषेक बनर्जी का महासचिव के रूप में नेतृत्व स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। दोनों नेताओं की कोलकाता वापसी की तारीख अभी तक सामने नहीं आई है।
आगे क्या होगा
कलकत्ता हाईकोर्ट में बुधवार की सुनवाई का परिणाम तय करेगा कि सीआईडी आगे क्या कदम उठा सकती है। यदि अदालत राहत देने से इनकार करती है, तो जांच एजेंसी के पास अभिषेक बनर्जी को अनिवार्य रूप से पेश होने के लिए बाध्य करने के विकल्प खुल सकते हैं। TMC के भीतर जारी आंतरिक विद्रोह के बीच यह कानूनी लड़ाई पार्टी नेतृत्व के लिए दोहरी चुनौती बन गई है।