अभिषेक बनर्जी ने सीआईडी को भेजा जवाब, हस्ताक्षर जालसाज़ी मामले में मांगा अतिरिक्त समय
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल पुलिस की अपराध जाँच विभाग (सीआईडी) को औपचारिक संदेश भेजकर विधायकों के हस्ताक्षर जालसाज़ी मामले में पूछताछ के लिए पेश होने हेतु अतिरिक्त समय माँगा है। दक्षिण कोलकाता स्थित सीआईडी कार्यालय में उपस्थिति के लिए जारी नोटिस पर यह उनकी पहली औपचारिक प्रतिक्रिया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला तब सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस के कुछ विधायकों ने शिकायत दर्ज कराई कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में जमा किए गए सरकारी दस्तावेज़ों पर उनके जाली हस्ताक्षर किए गए थे। सीआईडी ने इस 'सिग्नेचर मिसमैच' मामले की जाँच शुरू करते हुए अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए बुलाया था।
नोटिस और अनुपस्थिति का घटनाक्रम
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी 1 जून को सीआईडी कार्यालय में पेश नहीं हो सके, जिसके बाद जाँच एजेंसी ने उन्हें नया नोटिस भेजकर सोमवार दोपहर तक उपस्थित होने को कहा। हालाँकि, वे शनिवार दोपहर ही कोलकाता से नई दिल्ली रवाना हो गए।
राज्य पुलिस के सूत्रों के अनुसार, शनिवार दोपहर को ही यह स्पष्ट हो गया था कि अभिषेक बनर्जी सीआईडी कार्यालय नहीं आएँगे। सोमवार को उन्होंने सीआईडी को संदेश भेजकर नई दिल्ली में अपनी उपस्थिति की जानकारी दी।
दिल्ली में विपक्षी बैठक की भूमिका
अभिषेक बनर्जी दिल्ली विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन की बैठक में शामिल होने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में थे। ममता बनर्जी भी इस बैठक के लिए दिल्ली में मौजूद थीं। सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक ने सीआईडी को भेजे संदेश में इसी व्यस्तता का उल्लेख किया।
कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका
अभिषेक बनर्जी ने पिछले सप्ताह कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल-न्यायाधीश अवकाश पीठ में याचिका दाखिल कर सीआईडी के समन को चुनौती दी है। इस याचिका में उन्होंने मामले के संबंध में गिरफ्तारी सहित किसी भी सख्त कार्रवाई से संरक्षण की माँग की है। 10 जून को इस याचिका पर अहम सुनवाई निर्धारित है, जिसका उल्लेख उन्होंने अपने संदेश में अतिरिक्त समय माँगने के कारण के रूप में किया। उन्होंने त्वरित सुनवाई (फास्ट-ट्रैक हियरिंग) के लिए अलग से अर्जी भी दाखिल की थी।
आगे क्या होगा
सीआईडी की अगली कार्रवाई और 10 जून को कलकत्ता उच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई का परिणाम यह तय करेगा कि अभिषेक बनर्जी को कब और किन शर्तों पर पूछताछ के लिए पेश होना होगा। यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नई कानूनी उलझन बनकर उभरा है।