अभिषेक बनर्जी CID मुख्यालय पहुंचे, विधायकों के हस्ताक्षर मामले में पूछताछ; कोर्ट के आदेश पर दिल्ली से लौटे
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी गुरुवार, 11 जून 2026 की शाम कोलकाता स्थित पश्चिम बंगाल पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (CID) मुख्यालय भवानी भवन पहुंचे, जहाँ उनसे विधायकों के हस्ताक्षर से जुड़े मामले में पूछताछ की जानी है। कलकत्ता हाईकोर्ट की अवकाशकालीन एकल पीठ के स्पष्ट निर्देश के बाद यह उपस्थिति दर्ज हुई, जिसने उन्हें शाम छह बजे तक CID कार्यालय में हाज़िर होने का आदेश दिया था।
अदालत का आदेश और पृष्ठभूमि
कलकत्ता हाईकोर्ट की अवकाशकालीन एकल पीठ के न्यायाधीश कौशिक चंदा ने गुरुवार को ही यह निर्देश जारी किया। अदालत ने टिप्पणी की कि अभिषेक बनर्जी इस मामले में पहले जारी तीन समन की अनदेखी कर चुके हैं और अब ऐसी पुनरावृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि उन्हें जांच में CID अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग करना होगा।
गौरतलब है कि यह मामला पश्चिम बंगाल में विधायकों के हस्ताक्षर से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच से संबंधित है, जिसमें CID सक्रिय रूप से पड़ताल कर रही है।
दिल्ली से कोलकाता की जल्दबाजी में वापसी
जब अदालत का आदेश सुनाया गया, उस समय अभिषेक बनर्जी नई दिल्ली में मौजूद थे। आदेश मिलते ही वह तत्काल दिल्ली से कोलकाता के लिए रवाना हुए। शाम करीब चार बजे कोलकाता हवाई अड्डे पर उतरने के बाद वह पहले कालीघाट रोड स्थित अपने आवास गए और वहाँ से दक्षिण कोलकाता में स्थित भवानी भवन के लिए निकले, जो उनके आवास से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर है।
अभिषेक बनर्जी शाम 5:55 बजे — निर्धारित समय सीमा से महज पाँच मिनट पहले — भवानी भवन पहुंचे। उन्होंने प्रवेश द्वार पर आगंतुक रजिस्टर में हस्ताक्षर किए और मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब दिए बिना सीधे भवन के भीतर चले गए।
गिरफ्तारी से अंतरिम राहत
हालाँकि, फिलहाल इस मामले में उनकी गिरफ्तारी की संभावना नहीं है। इसी दिन हाईकोर्ट की अवकाशकालीन एकल पीठ ने उन्हें 21 दिनों के लिए गिरफ्तारी सहित किसी भी प्रकार की दमनात्मक पुलिस कार्रवाई से अंतरिम राहत प्रदान की है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में TMC और विपक्ष के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है।
CID को मिली व्यापक जांच शक्तियाँ
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर CID इस जांच के सिलसिले में छापेमारी और तलाशी अभियान भी चला सकती है। जांच एजेंसी को व्यापक अधिकार देने का यह संकेत मामले की गंभीरता को रेखांकित करता है। अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष जांच की प्रगति रखे जाने की उम्मीद है।