अभिषेक बनर्जी पहुंचे कलकत्ता हाईकोर्ट, हस्ताक्षर बेमेल मामले में CID समन को दी चुनौती
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने 3 जून को कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक-सदस्यीय अवकाशकालीन पीठ का रुख कर पश्चिम बंगाल पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (CID) द्वारा हस्ताक्षर बेमेल मामले में जारी समन को चुनौती दी। उन्होंने इस मामले में गिरफ्तारी सहित किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है, और न्यायमूर्ति अपूर्व सिन्हा रॉय की पीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए सुनवाई शुक्रवार को तय की है।
मामला क्या है
विवाद की जड़ पश्चिम बंगाल विधानसभा की उन चार महत्वपूर्ण सीटों पर पार्टी विधायकों को नामित करने वाले एक प्रस्ताव से जुड़ी है, जो सदन में विपक्ष के लिए आरक्षित हैं। आरोप है कि इस प्रस्ताव पर TMC के कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों में विसंगतियाँ पाई गईं, जिसके बाद विधानसभा सचिवालय ने मामले की जांच CID को सौंप दी।
नामांकन और हस्ताक्षर विवाद की पृष्ठभूमि
कुछ दिन पहले अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के नए अध्यक्ष रथिंद्र बोस के कार्यालय को पत्र भेजकर शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष, नयना बंद्योपाध्याय और असीमा पात्रा को विपक्ष का उप-नेता तथा फिरहाद हकीम को विधायी दल का मुख्य सचेतक नामित किया था। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया था कि इन नामों का समर्थन करने वाला, विधायकों के हस्ताक्षर सहित प्रस्ताव साथ में जमा करना अनिवार्य होगा। यह प्रस्ताव जमा भी कर दिया गया, लेकिन मामले ने तब नाटकीय मोड़ ले लिया जब TMC के ही दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा ने हस्ताक्षरों में विसंगतियों की ओर अध्यक्ष कार्यालय का ध्यान खींचा।
CID के दो समन और स्वास्थ्य का हवाला
शुरुआत में अभिषेक बनर्जी को 1 जून को CID कार्यालय में तलब किया गया था, परन्तु उन्होंने अपनी शारीरिक स्थिति का हवाला देते हुए 15 दिन का समय मांगा। 30 मई की दोपहर दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में कथित तौर पर जनता द्वारा उन पर हमला किया गया था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। 1 जून की शाम को CID ने दूसरा नोटिस जारी कर 8 जून को पेश होने को कहा।
दिल्ली में INDIA ब्लॉक की बैठक
8 जून को अभिषेक बनर्जी और उनकी बुआ, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, INDIA ब्लॉक की बैठक में शामिल होने के लिए नई दिल्ली में मौजूद रहेंगी — यानी CID के सामने उसी दिन पेशी व्यावहारिक रूप से असंभव है। यह टकराव कानूनी प्रक्रिया और राजनीतिक कैलेंडर के बीच टकराव को रेखांकित करता है।
आगे क्या
हाईकोर्ट में शुक्रवार की सुनवाई तय करेगी कि अभिषेक बनर्जी को CID की दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण मिलता है या नहीं। इस बीच विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सहित चार महत्वपूर्ण पदों पर औपचारिक नियुक्ति का मामला भी अधर में लटका हुआ है।