अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत, हस्ताक्षर विवाद में गिरफ्तारी से एक महीने की सुरक्षा
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 17 जुलाई 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को विधायकों के हस्ताक्षर मिसमैच मामले में बड़ी राहत दी है — अदालत ने गिरफ्तारी सहित किसी भी कठोर पुलिस कार्रवाई से उनकी अंतरिम सुरक्षा को एक महीने के लिए और बढ़ा दिया है। यह सुरक्षा शुक्रवार को समाप्त हो रही थी, जिसे न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की एकल पीठ ने सुनवाई के बाद जारी रखने का आदेश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति से जुड़े प्रस्ताव पर TMC विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित गड़बड़ी से उपजा है। पिछले महीने अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस को पत्र लिखकर सोवनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, नयना बंद्योपाध्याय और असीमा पात्रा को उपनेता तथा फिरहाद हकीम को TMC विधायक दल का मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) नियुक्त करने का प्रस्ताव भेजा था।
विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश पर TMC विधायकों द्वारा हस्ताक्षरित प्रस्ताव भी जमा कराया गया। इसके बाद पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने आरोप लगाया कि कई विधायकों के हस्ताक्षर असली से मेल नहीं खाते। इन आरोपों के बाद विधानसभा सचिवालय ने जाँच पश्चिम बंगाल सीआईडी (CID) को सौंप दी।
अदालत में अभिषेक बनर्जी की याचिका
अभिषेक बनर्जी ने सीआईडी द्वारा दर्ज एफआईआर (FIR) को रद्द करने की मांग करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। शुक्रवार को न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की पीठ ने सुनवाई के बाद पहले से मिली अंतरिम राहत को अगले एक महीने तक बढ़ाने का आदेश दिया। इस दौरान उनके खिलाफ कोई भी कठोर पुलिस कार्रवाई नहीं की जा सकती।
सीआईडी की दोहरी जाँच
गौरतलब है कि सीआईडी इस समय अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दो अलग-अलग मामलों की जाँच कर रही है। पहला मामला विधायकों के हस्ताक्षर विवाद से जुड़ा है। दूसरा मामला हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान कथित तौर पर हिंसा भड़काने वाला बयान देने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को कथित धमकी देने के आरोपों से संबंधित है।
हेट स्पीच मामले में अभिषेक बनर्जी उत्तर 24 परगना जिले की एक अदालत में अपना वॉयस सैंपल पहले ही जमा करा चुके हैं।
आगे क्या होगा
अदालत ने अंतरिम सुरक्षा तो बढ़ा दी है, लेकिन सीआईडी की जाँच जारी है। अगली सुनवाई में FIR रद्द करने की याचिका पर विस्तृत बहस होने की उम्मीद है। यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC के आंतरिक समीकरणों और विपक्षी खेमे की भूमिका, दोनों पर असर डाल सकता है।