सिग्नेचर मिसमैच मामला: CID तीसरी बार बुला सकती है अभिषेक बनर्जी को, 14 घंटे पूछताछ के बाद नई विसंगतियाँ
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल पुलिस की आपराधिक जाँच विभाग (CID) सिग्नेचर मिसमैच मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव एवं सांसद अभिषेक बनर्जी को तीसरे दौर की पूछताछ के लिए फिर से तलब कर सकती है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह समन इसी सप्ताह के अंत तक जारी हो सकता है। अब तक दो चरणों में 14 घंटे से अधिक की पूछताछ हो चुकी है — 11 जून को छह घंटे और 14 जून को साढ़े आठ घंटे।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के लिए आरक्षित कुछ सीटों पर नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर TMC विधायकों के हस्ताक्षरों में अंतर से संबंधित है। जाँच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या इन हस्ताक्षरों में जालसाजी की गई। अभिषेक बनर्जी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के सांसद हैं।
पूछताछ का घटनाक्रम
CID अधिकारियों ने रविवार, 15 जून को पत्रकार से राजनेता बने TMC विधायक कुणाल घोष से भी पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, पहले बनर्जी और घोष से अलग-अलग पूछताछ की गई, और बाद में दोनों को आमने-सामने बिठाकर एक साथ पूछताछ की गई — यह प्रक्रिया जाँच में महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है। घोष की पूछताछ का समय बनर्जी की तुलना में काफी कम रहा।
बयानों में विसंगतियाँ
पुलिस सूत्रों ने बताया कि पूछताछ के दौरान CID अधिकारियों ने अभिषेक बनर्जी और कुणाल घोष के बयानों में कुछ अहम विसंगतियाँ पाई हैं। इन्हीं विसंगतियों पर स्पष्टीकरण प्राप्त करने के उद्देश्य से बनर्जी को तीसरी बार बुलाने का निर्णय लिया जा रहा है। दोनों में से किसी ने भी मीडिया के सामने पूछताछ की प्रक्रिया पर अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है।
कलकत्ता हाई कोर्ट का हस्तक्षेप
अभिषेक बनर्जी पहली बार 11 जून को दक्षिण कोलकाता स्थित CID मुख्यालय में उपस्थित हुए थे। इससे पहले उन्होंने CID के लगातार तीन समन को नजरअंदाज किया था। कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल-न्यायाधीश अवकाशकालीन पीठ ने उन्हें समय-सीमा तय करते हुए पेश होने का निर्देश दिया था, जिसके बाद वे जाँच में शामिल हुए।
आगे क्या होगा
CID की जाँच जारी है और तीसरे दौर की पूछताछ इस सप्ताह के अंत तक होने की संभावना है। यह मामला राज्य की राजनीति में गहरी हलचल पैदा कर रहा है, क्योंकि इसमें सत्तारूढ़ दल के शीर्ष नेतृत्व का नाम जुड़ा है।