24 सितंबर 2026
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गौतम अदाणी का पश्चिम बंगाल में ₹1 लाख करोड़ निवेश का ऐलान, बोले — 'भारत की अगली ट्रिलियन डॉलर वृद्धि के लिए पूर्व को उठना होगा'

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गौतम अदाणी का पश्चिम बंगाल में ₹1 लाख करोड़ निवेश का ऐलान, बोले — 'भारत की अगली ट्रिलियन डॉलर वृद्धि के लिए पूर्व को उठना होगा'

सारांश

गौतम अदाणी का कोलकाता में बड़ा दांव — अगले 10 वर्षों में ₹1 लाख करोड़ का निवेश और साफ संदेश: भारत की अगली ट्रिलियन डॉलर वृद्धि पश्चिम या दक्षिण से नहीं, पूर्व से आएगी। बंदरगाह से डेटा सेंटर तक, बंगाल को वे अपनी दूसरी कर्मभूमि बनाना चाहते हैं।

मुख्य बातें

गौतम अदाणी ने 24 सितंबर 2026 को कोलकाता में पश्चिम बंगाल में अगले 10 वर्षों में ₹1 लाख करोड़ से अधिक के निवेश की घोषणा की।
निवेश क्षेत्रों में बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, बिजली उत्पादन, सड़क, रोपवे, ग्रीन सीमेंट और हाइपरस्केल डेटा सेंटर शामिल हैं।
न्यू टाउन में 2,000 बिस्तरों वाला 'अदाणी आरोग्य मंदिर' स्थापित होगा; आधे बिस्तर आर्थिक रूप से कमज़ोर मरीज़ों के लिए आरक्षित रहेंगे।
अदाणी ने कुमारटुली घाट के पुनरुद्धार और राइटर्स बिल्डिंग के संरक्षण में सहयोग की भी प्रतिबद्धता जताई।
उन्होंने कहा — 'बंगाल को गुजरात बनने की जरूरत नहीं, बंगाल को अपने सबसे मज़बूत स्वरूप में विकसित होना चाहिए।'

अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने 24 सितंबर 2026 को कोलकाता में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) के एक कार्यक्रम में घोषणा की कि उनका समूह अगले 10 वर्षों में पश्चिम बंगाल में ₹1 लाख करोड़ से अधिक का निवेश करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की अगली ट्रिलियन डॉलर की आर्थिक वृद्धि के लिए पूर्वी भारत का उभरना अनिवार्य है, और इस रणनीतिक समीकरण में पश्चिम बंगाल की भूमिका केंद्रीय है।

पूर्वी भारत क्यों है अगली विकास की धुरी

अदाणी ने कहा कि पिछले कई दशकों में भारत की आर्थिक प्रगति मुख्यतः पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों की अगुवाई में हुई है। लेकिन अब देश को नए आर्थिक केंद्रों की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'भारत की अगली ट्रिलियन डॉलर वृद्धि के लिए पूर्व को उठना होगा। विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में बंगाल की भूमिका अनिवार्य है और मेरी नज़र में भारत में शायद ही कोई दूसरा राज्य है, जिसके पास बंगाल जैसे रणनीतिक लाभ हों।'

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार 'पूर्वोदय' जैसी योजनाओं के ज़रिए पूर्वी राज्यों को मुख्यधारा की वृद्धि से जोड़ने की कोशिश कर रही है।

बंगाल की भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति

अदाणी ने पश्चिम बंगाल की भूगोल को उसकी सबसे बड़ी संपत्ति बताया। उनके अनुसार, राज्य के पश्चिम में ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे खनिज-समृद्ध एवं औद्योगिक क्षेत्र हैं। उत्तर और पूर्व की ओर पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार है। और बंगाल की खाड़ी के रास्ते दक्षिण-पूर्व एशिया व इंडो-पैसिफिक के तेज़ी से विस्तरित हो रहे बाज़ारों तक सीधी पहुँच है। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर के नज़रिए से बंगाल केवल एक राज्य या बाज़ार नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राष्ट्रीय केंद्र है।

निवेश के क्षेत्र और सामाजिक प्रतिबद्धता

₹1 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश में बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, बिजली उत्पादन, बिजली पारेषण एवं वितरण, सड़क, पुल, रोपवे, ग्रीन सीमेंट और हाइपरस्केल डेटा सेंटर जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसके साथ ही अदाणी समूह न्यू टाउन में 2,000 बिस्तरों वाले 'अदाणी आरोग्य मंदिर' की स्थापना के लिए भी प्रतिबद्ध है। अदाणी ने कहा कि अस्पताल के आधे बिस्तर उन लोगों के लिए आरक्षित होंगे जो गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च वहन करने में असमर्थ हैं।

गौरतलब है कि अदाणी समूह ने इससे पहले राजस्थान और गुजरात में भी इसी मॉडल पर सार्वजनिक-निजी अस्पताल संचालित किए हैं।

सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की भी घोषणा

अदाणी ने कहा कि बंगाल के भविष्य के निर्माण के साथ-साथ उसकी सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी उतना ही अनिवार्य है। इसी भावना के तहत अदाणी समूह कुमारटुली घाट के पुनरुद्धार, बंगाल के कलाकारों को समर्पित विशेष दुर्गा पूजा कार्यक्रम, मां दुर्गा की विरासत को वैश्विक स्तर पर पहुँचाने के प्रयासों और ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग के संरक्षण में सहयोग करेगा।

अदाणी का बंगाल से भावनात्मक जुड़ाव

अपने उद्यमी सफर को याद करते हुए अदाणी ने कहा कि 30 वर्ष पहले पश्चिम भारत का मुंद्रा उनकी पहली कर्मभूमि बना था। आज वह उसी विनम्रता और जिम्मेदारी की भावना के साथ चाहते हैं कि पूर्व में बंगाल उनकी दूसरी कर्मभूमि बने। उन्होंने जोड़ा, 'बंगाल को गुजरात बनने की जरूरत नहीं है। बंगाल को अपने सबसे मजबूत स्वरूप में विकसित होना चाहिए — अपनी भौगोलिक स्थिति, बौद्धिक क्षमता, औद्योगिक विरासत और देश को दिशा देने की ऐतिहासिक क्षमता के आधार पर।' आने वाले वर्षों में यह निवेश बंगाल की आर्थिक प्राथमिकताओं और राजनीतिक इच्छाशक्ति, दोनों की कसौटी पर परखा जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन निवेश की घोषणाएँ और उनका ज़मीनी क्रियान्वयन अक्सर दो अलग कहानियाँ होती हैं — खासकर पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में जहाँ राजनीतिक समीकरण और भूमि अधिग्रहण की चुनौतियाँ ऐतिहासिक रूप से बड़ी अड़चन रही हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि अदाणी समूह फिलहाल अदाणी-हिंडनबर्ग प्रकरण की छाया से उबरकर अपनी साख पुनर्स्थापित करने की कोशिश में है, और बंगाल जैसा बड़ा राज्य इस दिशा में एक रणनीतिक कदम हो सकता है। बंगाल की बौद्धिक और औद्योगिक क्षमता की अनदेखी दशकों से होती रही है — अदाणी की यह पहल उस खाई को भरने का अवसर है, बशर्ते घोषणाएँ ठोस समयसीमाओं और पारदर्शी जवाबदेही के साथ आएँ।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौतम अदाणी ने पश्चिम बंगाल में कितने निवेश की घोषणा की?
अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने 24 सितंबर 2026 को कोलकाता में अगले 10 वर्षों में पश्चिम बंगाल में ₹1 लाख करोड़ से अधिक के निवेश की घोषणा की। यह निवेश बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, बिजली, सड़क, ग्रीन सीमेंट और हाइपरस्केल डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में होगा।
अदाणी ने पूर्वी भारत को क्यों महत्वपूर्ण बताया?
अदाणी के अनुसार, भारत की अगली ट्रिलियन डॉलर आर्थिक वृद्धि के लिए पूर्वी भारत का उभरना अनिवार्य है, क्योंकि पिछले दशकों में विकास मुख्यतः पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों तक सीमित रहा है। पश्चिम बंगाल की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति — खनिज-समृद्ध राज्यों की सीमा, पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार और बंगाल की खाड़ी तक पहुँच — इसे एक आदर्श आर्थिक केंद्र बनाती है।
अदाणी आरोग्य मंदिर क्या है और यह कहाँ बनेगा?
अदाणी आरोग्य मंदिर एक विश्वस्तरीय अस्पताल है जिसे कोलकाता के न्यू टाउन में स्थापित किया जाएगा। इसमें 2,000 बिस्तर होंगे और आधे बिस्तर उन लोगों के लिए आरक्षित होंगे जो गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च वहन करने में असमर्थ हैं।
अदाणी समूह बंगाल की सांस्कृतिक विरासत के लिए क्या करेगा?
अदाणी समूह ने कुमारटुली घाट के पुनरुद्धार, बंगाल के कलाकारों को समर्पित विशेष दुर्गा पूजा कार्यक्रम, मां दुर्गा की विरासत को वैश्विक स्तर तक पहुँचाने के प्रयासों और ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग के संरक्षण में सहयोग की प्रतिबद्धता जताई है।
अदाणी ने बंगाल और गुजरात की तुलना पर क्या कहा?
गौतम अदाणी ने स्पष्ट किया कि बंगाल को गुजरात की नकल करने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि बंगाल को अपनी भौगोलिक स्थिति, बौद्धिक क्षमता, औद्योगिक विरासत और देश को दिशा देने की ऐतिहासिक क्षमता के आधार पर अपने सबसे मजबूत स्वरूप में विकसित होना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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