अदाणी ग्रुप का 'विकसित भारत 2047' में योगदान: डॉ. प्रीति अदाणी ने वाराणसी में गिनाए इंफ्रास्ट्रक्चर लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी ने 2 नवंबर 2026 को वाराणसी में कहा कि अदाणी समूह भारत की बुनियादी चुनौतियों — गरीबी, कुपोषण, अशिक्षा और अंतिम छोर तक बिजली पहुँच — के समाधान के लिए वृहद अवसंरचना परियोजनाएँ लागू कर रहा है, जो 2047 तक 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय लक्ष्य में अहम भूमिका निभाएंगी। उन्होंने यह बात वाराणसी में आयोजित 'आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान' विश्व संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कही।
मुख्य वक्तव्य
डॉ. प्रीति अदाणी ने अपने संबोधन में कहा, 'भारत जैसा विशाल देश अभी भी गरीबी, कुपोषण, अशिक्षा और बिजली जैसी आवश्यक सुविधाओं की अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित करने जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। अदाणी समूह में हमने इन चुनौतियों का समाधान करने और 2047 तक विकसित राष्ट्र के लक्ष्य में योगदान देने के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाएं लागू की हैं।' उन्होंने इस अवसर पर उद्योग जगत की सामाजिक ज़िम्मेदारी को भी रेखांकित किया।
नवीकरणीय ऊर्जा में बड़ा निवेश
सतत विकास के प्रति समूह की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए डॉ. अदाणी ने बताया कि अदाणी समूह ने ऊर्जा परिवर्तन से जुड़ी अवसंरचना परियोजनाओं में 100 अरब डॉलर से अधिक निवेश करने की घोषणा की है। उन्होंने गुजरात के खावड़ा में विकसित हो रहे नवीकरणीय ऊर्जा पार्क का विशेष उल्लेख किया, जो 30 गीगावाट सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता के साथ दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क बनने की दिशा में अग्रसर बताया जा रहा है।
प्राचीन ज्ञान और आधुनिक व्यवसाय
संगोष्ठी की थीम से जोड़ते हुए डॉ. अदाणी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा व्यवसायों को स्वार्थ से ऊपर कर्तव्य को प्राथमिकता देने और स्थिरता को संचालन के केंद्र में रखने का संदेश देती है। उन्होंने योग और मोटे अनाज (मिलेट) को इसके प्रमाण के रूप में उद्धृत किया — दोनों कभी भारत की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा थे, और आज वैश्विक स्वास्थ्य, पोषण और जलवायु अनुकूलता की चर्चाओं में केंद्रीय स्थान रखते हैं।
उन्होंने कहा, 'हमारा मानना है कि स्थिरता केवल वार्षिक रिपोर्ट का एक अध्याय बनकर नहीं रह जानी चाहिए। इसे व्यवहार और कार्यान्वयन का हिस्सा बनाना होगा।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कॉर्पोरेट जगत में 'ग्रीनवॉशिंग' को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस तेज़ हो रही है।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण की आवश्यकता
डॉ. प्रीति अदाणी ने अपने संबोधन के अंत में ज़ोर देकर कहा कि भारत के विकास, सामाजिक उत्थान और पर्यावरणीय संतुलन के लिए उद्योगों को दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना होगा। उनके अनुसार, आर्थिक प्रगति तभी टिकाऊ मानी जाएगी जब उसके साथ समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी लाभ सुनिश्चित किए जाएँ। गौरतलब है कि 'विकसित भारत 2047' का लक्ष्य भारत सरकार का वह संकल्प है जिसके तहत देश को स्वतंत्रता की शताब्दी तक एक विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना की गई है — और इसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी केंद्रीय मानी जाती है।