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दिल्ली पुलिस ने पीतमपुरा में अमेरिकी नागरिकों से ₹100 करोड़ की ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 11 गिरफ्तार

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दिल्ली पुलिस ने पीतमपुरा में अमेरिकी नागरिकों से ₹100 करोड़ की ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 11 गिरफ्तार

सारांश

पीतमपुरा की एक किराए की इमारत से अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा था — फर्जी वायरस अलर्ट, नकली FBI दस्तावेज और गिफ्ट कार्ड के जरिए ₹100 करोड़ की ठगी। दिल्ली पुलिस IFSO ने 11 लोगों को गिरफ्तार कर यह बड़ा साइबर नेटवर्क तोड़ा।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस IFSO ने पीतमपुरा, नई दिल्ली में अवैध अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया।
गिरोह ने कथित तौर पर अमेरिकी नागरिकों से टेक-सपोर्ट स्कैम के जरिए ₹100 करोड़ की ठगी की।
दो महिलाओं समेत 11 आरोपी गिरफ्तार; ₹41 लाख नकद, 29 लैपटॉप, 25 मोबाइल फोन और 8 राउटर जब्त।
आरोपी मालवेयर, अल्ट्राव्यूअर रिमोट एक्सेस, गूगल वॉइस और नकली FBI दस्तावेजों का उपयोग करते थे।
भुगतान गिफ्ट कार्ड और क्रिप्टोकरेंसी (बिटकॉइन) के माध्यम से लिया जाता था।
22 सितंबर 2026 को एफआईआर नंबर 224/2026 BNS और IT अधिनियम के तहत दर्ज।

दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने पीतमपुरा स्थित एक किराए के भवन से संचालित अवैध अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है, जो कथित तौर पर अमेरिकी नागरिकों को टेक-सपोर्ट के नाम पर ठगी का शिकार बना रहा था। जाँचकर्ताओं के अनुसार, इस गिरोह ने अब तक लगभग ₹100 करोड़ की धोखाधड़ी की है। इस कार्रवाई में दो महिलाओं समेत 11 लोगों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है।

छापे की पृष्ठभूमि और कार्रवाई

21 सितंबर 2026 को IFSO को सक्रिय साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़ी खुफिया जानकारी मिली। इंस्पेक्टर दाता राम के नेतृत्व वाली टीम ने एसीपी प्रेम चंद्र खंडूरी की निगरानी और IFSO के डीसीपी गौरव त्यागी के मार्गदर्शन में पीतमपुरा गाँव के शिवाजी मार्केट स्थित मकान नंबर 249 की तीसरी और चौथी मंजिल पर छापा मारा। वहाँ 11 आरोपी एक हाई-टेक कॉल सेंटर चलाते हुए पकड़े गए।

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान ₹41 लाख नकद, 29 लैपटॉप, 25 मोबाइल फोन, 8 राउटर और 1 कार जब्त की। 22 सितंबर 2026 को स्पेशल सेल पुलिस स्टेशन में एफआईआर नंबर 224/2026 दर्ज की गई।

ठगी का पूरा तरीका

जाँचकर्ताओं के अनुसार, गिरोह की बैक-एंड टीम पीड़ितों के कंप्यूटर में रिमोट तरीके से मालवेयर इंस्टॉल करती थी, जिसके बाद स्क्रीन पर एक पॉप-अप प्रकट होता था। उस पॉप-अप में तकनीकी सहायता के लिए एक टोल-फ्री नंबर पर संपर्क करने को कहा जाता था। जब पीड़ित उस नंबर पर कॉल करता, तो वह कॉल माइक्रो-एसआईपी सॉफ्ट-फोन एप्लिकेशन के ज़रिए पीतमपुरा स्थित इसी कॉल सेंटर में ट्रांसफर हो जाती थी।

प्रशिक्षित एजेंट पूर्व-निर्धारित स्क्रिप्ट के अनुसार बात करते थे और पीड़ितों को बताते थे कि उनके कंप्यूटर में वायरस आ गया है या उसे हैक किया जा चुका है। इसके बाद पीड़ितों को अल्ट्राव्यूअर सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने को कहा जाता था, जिससे आरोपी उनके कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस हासिल कर लेते थे।

इसके बाद पीड़ितों की बात एक फर्जी बैंक अधिकारी से कराई जाती थी, जो गूगल वॉइस एप्लिकेशन के ज़रिए अमेरिकी नंबरों का उपयोग करता था और कथित तौर पर बैंक खाते पर खतरे का भय दिखाकर गिफ्ट कार्ड या बिटकॉइन सहित क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसफर करवाता था। गिफ्ट कार्ड की जानकारी बाद में व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से गिरोह के प्रमुख सदस्यों के साथ साझा की जाती थी।

पुलिस के अनुसार, आरोपी पीड़ितों पर दबाव बनाने के लिए एफबीआई और अमेरिका की अन्य संघीय एजेंसियों के नाम से कथित फर्जी दस्तावेज और संदेश भी भेजते थे। पहचान छुपाने के लिए आरोपी विलियम्स, रायन, सोफी, जेनी और एलेक्स जैसे फर्जी नामों का उपयोग करते थे।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

हिरासत में लिए गए आरोपियों में कवल प्रीत सिंह उर्फ सनी सिंह (43) जनकपुरी, प्रशांत नंदा (29) हरि नगर आश्रम, अक्षत सिंह उर्फ शिवम (25) कानपुर (उत्तर प्रदेश), चित्रा नराह (27) पीतमपुरा गाँव, रोहन जयरथ (31) उत्तम नगर और गौरव सकलानी (24) देहरादून शामिल हैं।

इसके अलावा सचिन घिल्डियाल उर्फ सचिन शर्मा (26) बुराड़ी, इरशाद रहमान (22) असम के गोलपाड़ा, नवनीत उर्फ नवीन (28) पीतमपुरा, निगथौजाम (25) असम और फेबो वांगशू (27) अरुणाचल प्रदेश के निवासी हैं। यह गिरोह कई राज्यों के युवाओं को मिलाकर बना था, जो देश के विभिन्न हिस्सों से संचालित हो रहा था।

कानूनी कार्रवाई और आगे की जाँच

आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएँ 318(4), 319(2), 61(2) और 3(5) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराएँ 66C और 66D के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने वाले साइबर अपराध के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है। IFSO अब गिरोह के वित्तीय नेटवर्क और सरगनाओं की पहचान के लिए जाँच जारी रखे हुए है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अरुणाचल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली — दर्शाता है कि भर्ती और संचालन का नेटवर्क एक व्यवस्थित उद्यम की तरह काम करता है। ₹100 करोड़ का आँकड़ा पुलिस के अनुमान पर आधारित है और सत्यापन अभी बाकी है; असली रकम इससे कम या अधिक हो सकती है। सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि गिरोह के वित्तीय सरगना और क्रिप्टो रिडेम्पशन चेन कहाँ तक फैली है — यही जाँच की असली कसौटी होगी।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली पुलिस ने पीतमपुरा में किस कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया?
दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने पीतमपुरा गाँव के शिवाजी मार्केट स्थित मकान नंबर 249 से संचालित एक अवैध अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया, जो अमेरिकी नागरिकों को टेक-सपोर्ट के नाम पर ठगता था। जाँचकर्ताओं के अनुसार इस गिरोह ने कथित तौर पर ₹100 करोड़ की ठगी की।
इस टेक-सपोर्ट स्कैम में ठगी कैसे की जाती थी?
आरोपी पहले पीड़ितों के कंप्यूटर में मालवेयर इंस्टॉल करते थे, फिर स्क्रीन पर पॉप-अप दिखाकर टोल-फ्री नंबर पर कॉल कराते थे। कॉल पीतमपुरा के कॉल सेंटर में ट्रांसफर होती थी, जहाँ प्रशिक्षित एजेंट अल्ट्राव्यूअर के ज़रिए रिमोट एक्सेस लेकर गिफ्ट कार्ड या क्रिप्टोकरेंसी के रूप में भुगतान करवाते थे।
कितने लोग गिरफ्तार हुए और उनके नाम क्या हैं?
कुल 11 लोगों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है, जिनमें दो महिलाएँ शामिल हैं। प्रमुख आरोपियों में कवल प्रीत सिंह उर्फ सनी सिंह (43), प्रशांत नंदा (29), अक्षत सिंह (25), चित्रा नराह (27), रोहन जयरथ (31), गौरव सकलानी (24), सचिन घिल्डियाल (26), इरशाद रहमान (22), नवनीत (28), निगथौजाम (25) और फेबो वांगशू (27) शामिल हैं।
इस मामले में कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
22 सितंबर 2026 को स्पेशल सेल पुलिस स्टेशन में एफआईआर नंबर 224/2026 दर्ज की गई। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएँ 318(4), 319(2), 61(2) और 3(5) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराएँ 66C और 66D लगाई गई हैं।
पुलिस ने इस छापे में क्या जब्त किया?
कार्रवाई के दौरान ₹41 लाख नकद, 29 लैपटॉप, 25 मोबाइल फोन, 8 राउटर और 1 कार जब्त की गई। IFSO अब गिरोह के वित्तीय नेटवर्क और सरगनाओं की पहचान के लिए जाँच जारी रखे हुए है।
राष्ट्र प्रेस
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