बेंगलुरु में QuickBooks के नाम पर नकली कॉल सेंटर का भंडाफोड़, अमेरिकी नागरिकों से करोड़ों की ठगी

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बेंगलुरु में QuickBooks के नाम पर नकली कॉल सेंटर का भंडाफोड़, अमेरिकी नागरिकों से करोड़ों की ठगी

सारांश

बेंगलुरु में QuickBooks की आड़ में चल रहे नकली कॉल सेंटर का भंडाफोड़ — अमेरिकी नागरिकों को टैक्स और अकाउंटिंग सेवाओं के नाम पर ठगा जा रहा था। 4 ठिकानों पर छापा, 44 SSD जब्त, दिल्ली और UP के दो मुख्य आरोपी गिरफ्तार।

मुख्य बातें

कर्नाटक राज्य साइबर कमांड ने 21 मई 2026 को बेंगलुरु के 4 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
गिरोह QuickBooks के नाम पर फर्जी कॉल सेंटर चलाकर अमेरिकी नागरिकों से टैक्स व अकाउंटिंग सेवाओं के नाम पर करोड़ों ठग रहा था।
जब्त सामग्री में 44 SSD , 9 CPU , 2 लैपटॉप , 2 मोबाइल फोन और पूर्व-तैयार कॉलिंग स्क्रिप्ट शामिल हैं।
मुख्य आरोपी प्रशांत (दिल्ली) और आकाश (उत्तर प्रदेश) ने मिलकर सर्कल स्क्वायर एलएलसी के जरिए शेल कंपनियों का जाल बिछाया था।
पुलिस अब ठगी की रकम के वित्तीय प्रवाह और गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश में जुटी है।

कर्नाटक राज्य साइबर कमांड ने 21 मई 2026 को बेंगलुरु में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया, जो अमेरिकी अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर कंपनी QuickBooks के नाम पर फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर अमेरिकी नागरिकों से करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था। पुलिस ने शहर के चार अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया और बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए।

कैसे काम करता था यह गिरोह

पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क के कर्मचारी खुद को QuickBooks कंपनी के प्रतिनिधि बताकर अमेरिकी नागरिकों को कॉल करते थे। वे टैक्स सलाह, लाइसेंस रिन्यूअल और अकाउंटिंग सेवाओं के नाम पर लोगों को विश्वास में लेते थे। इसके बाद फर्जी फीस के रूप में मोटी रकम वसूली जाती थी — जबकि दी जाने वाली सभी सेवाएँ पूरी तरह काल्पनिक थीं।

जाँच में यह भी सामने आया कि कॉल सेंटर कर्मचारी पहले से तैयार स्क्रिप्ट का उपयोग करते थे और खुद को अमेरिकी अधिकारी बताकर बातचीत करते थे। वे ऐसे नाम और पहचान अपनाते थे जिससे पीड़ित को किसी तरह का संदेह न हो।

छापेमारी और जब्त सामग्री

साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन (दक्षिण-पूर्व) और स्पेशल साइबर सेल की संयुक्त टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर बेंगलुरु के चार ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। छापेमारी में पुलिस ने 44 SSD, 2 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, 9 CPU और ठगी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कॉलिंग स्क्रिप्ट बरामद कीं।

मुख्य आरोपी और कंपनी का जाल

इस मामले में दो मुख्य आरोपियों की पहचान हुई है — प्रशांत (दिल्ली निवासी) और आकाश (उत्तर प्रदेश निवासी)। पुलिस के अनुसार, इन दोनों ने मिलकर सर्कल स्क्वायर एलएलसी नाम की एक कंपनी बनाई थी। इसी कंपनी की आड़ में अलग-अलग शेल कंपनियों का उपयोग करके अमेरिकी नागरिकों से करोड़ों रुपये की ठगी की गई।

आगे की जाँच

कर्नाटक राज्य साइबर कमांड की जाँच अब ठगी से अर्जित धन के प्रवाह पर केंद्रित है — यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पैसे किन खातों के जरिए नकद में बदले गए और कहाँ भेजे गए। पुलिस यह भी निर्धारित करने में जुटी है कि इस गिरोह में और कितने सदस्य शामिल हैं तथा उनका नेटवर्क किन राज्यों और देशों तक फैला है। यह मामला भारत से संचालित होने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड रैकेट की बढ़ती प्रवृत्ति की ओर नए सिरे से ध्यान दिलाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब तक यह गिरफ्तारी महज ऊपरी परत को छूने जैसी है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेंगलुरु QuickBooks साइबर फ्रॉड मामला क्या है?
यह एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का मामला है जिसमें बेंगलुरु से फर्जी कॉल सेंटर चलाकर अमेरिकी नागरिकों को QuickBooks कंपनी के प्रतिनिधि बनकर टैक्स और अकाउंटिंग सेवाओं के नाम पर ठगा जा रहा था। कर्नाटक राज्य साइबर कमांड ने 21 मई 2026 को चार ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर इस गिरोह का भंडाफोड़ किया।
इस मामले में कौन-कौन से आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों — दिल्ली निवासी प्रशांत और उत्तर प्रदेश निवासी आकाश — को गिरफ्तार किया है। इन दोनों ने मिलकर 'सर्कल स्क्वायर एलएलसी' नाम की कंपनी बनाई थी, जिसके जरिए शेल कंपनियों का उपयोग करके ठगी की जाती थी।
छापेमारी में क्या-क्या जब्त किया गया?
पुलिस ने 44 SSD, 9 CPU, 2 लैपटॉप, 2 मोबाइल फोन और अमेरिकी नागरिकों से बातचीत के लिए पहले से तैयार कॉलिंग स्क्रिप्ट बरामद कीं। ये स्क्रिप्ट कर्मचारियों को खुद को अमेरिकी अधिकारी बताकर पीड़ितों का विश्वास जीतने में मदद करती थीं।
इस ठगी में अमेरिकी नागरिकों को कैसे निशाना बनाया जाता था?
आरोपी खुद को QuickBooks कंपनी का प्रतिनिधि बताकर अमेरिकी नागरिकों को कॉल करते थे और टैक्स सलाह, लाइसेंस रिन्यूअल तथा अकाउंटिंग सेवाओं के नाम पर फर्जी फीस वसूलते थे। पूर्व-तैयार स्क्रिप्ट और अमेरिकी नाम-पहचान का उपयोग करके पीड़ितों को संदेह नहीं होने दिया जाता था।
अब जाँच किस दिशा में आगे बढ़ रही है?
कर्नाटक साइबर कमांड अब ठगी से अर्जित धन के वित्तीय प्रवाह की जाँच कर रही है — यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पैसे किन खातों से नकद में बदले गए। साथ ही गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क की पूरी व्यापकता का भी पता लगाया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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