26 जुलाई 2026
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बेंगलुरु में नकली कॉल सेंटर का खुलासा, दो व्यक्ति हुए गिरफ्तार

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बेंगलुरु में नकली कॉल सेंटर का खुलासा, दो व्यक्ति हुए गिरफ्तार

सारांश

बेंगलुरु में साइबर क्राइम पुलिस ने एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर स्टॉक मार्केट में निवेश का झूठा वादा करके ठगी करने का आरोप है। जानिए इस मामले की पूरी कहानी।

मुख्य बातें

फर्जी कॉल सेंटर से सतर्क रहें।
साइबर अपराध में वृद्धि हो रही है।
पुलिस ने ठगी करने वाले दो लोगों को गिरफ्तार किया।
गूगल से प्राप्त डेटा का दुरुपयोग किया गया।
लोगों को निवेश के नाम पर ठगा गया।

बेंगलुरु, 24 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक स्टेट साइबर कमांड से संबंधित बेंगलुरु के केंद्रीय डिवीजन के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने शहर में छापेमारी करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इन दोनों पर आरोप है कि उन्होंने एक फर्जी कॉल सेंटर चलाया और लोगों को स्टॉक मार्केट में निवेश के माध्यम से लाभ दिलाने का झूठा वादा करके ठगा।

पुलिस द्वारा मंगलवार को जारी बयान के अनुसार, आरोपियों ने ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने के लिए लोगों को लालच देकर उनसे धोखाधड़ी की। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान कुमावत योगेश अमरन (सूरत) और इमरान (दिल्ली) के रूप में की गई है।

इस छापेमारी में पुलिस ने 31 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप, 16 सिम कार्ड, मल्टीवेयर बिजनेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड का लेटरहेड और पीड़ितों के नाम व मोबाइल नंबर की शीट जब्त की।

जानकारी के अनुसार, आरोपी कॉल करके और स्टॉक मार्केट में निवेश करने पर मुनाफे का वादा करके लोगों से पैसे ठग रहे थे। पुलिस ने आईटी एक्ट की धारा 66 (आर) और बीएनएस की धारा 318 (4) के तहत मामला दर्ज किया है।

पूछताछ में यह पता चला कि आरोपियों ने गूगल से स्टॉक मार्केट क्लाइंट का डेटा प्राप्त किया, विभिन्न राज्यों में बैंक अकाउंट खोले और लोगों के नाम पर सिम कार्ड लिए। इसके अलावा, ठगे गए पैसे को कई नकली/म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर किया गया और फिर उनके साथी एटीएम के माध्यम से पैसे निकाल लेते थे।

आरोपियों ने राज्य के बाहर लगभग 15 कस्टमर एग्जीक्यूटिव रखे थे, जो कॉल सेंटर से काम करते थे। ये एग्जीक्यूटिव लोगों को कॉल करके उन्हें यह यकीन दिलाते थे कि यदि वे स्टॉक मार्केट में निवेश करेंगे, तो उन्हें लाभ होगा। इस पर विश्वास करके लोगों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। इसके बाद, आरोपियों ने एक बैंक अकाउंट दिया और निवेश के नाम पर ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करवा लिए। पैसे मिलने के बाद, वे अपने मोबाइल फोन बंद कर देते थे।

शिकायत मिलने के बाद, शिकायतकर्ता को की गई कॉल की लोकेशन बीटीएम लेआउट पर मिली। जिस मोबाइल फोन पर सिम का इस्तेमाल किया गया, उसका आईएमईआई नंबर पता चला। इसके बाद, उस आईएमईआई से जुड़ी गुगल ईमेल आईडी को ट्रेस किया गया। यह जीमेल आईडी आरोपी कुमावत योगेश अमरराम की निकली।

मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपी का पता चला और यह सामने आया कि वह जयनगर 9वें ब्लॉक में एक फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था। इसके बाद, कॉल सेंटर पर छापेमारी की गई और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

आरोपियों को साइबर कमांड यूनिट के डीजीपी प्रणब मोहंती, एडीजीपी एम चंद्रशेखर, डीआईजीपी एचडी आनंद कुमार, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस एमई मनोज कुमार और इंस्पेक्टर एस वसीमुल्ला की मार्गदर्शन में गिरफ्तार किया गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेंगलुरु में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है?
आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 66 (आर) और बीएनएस की धारा 318 (4) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
फर्जी कॉल सेंटर कैसे काम करता है?
फर्जी कॉल सेंटर लोगां को स्टॉक मार्केट में निवेश का झूठा वादा करके ठगता है और उनसे पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर करवाता है।
पुलिस ने इस मामले में क्या सबूत इकट्ठा किए?
पुलिस ने मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड और पीड़ितों के नामों की शीट जब्त की है।
इस तरह के ठगी से बचने के लिए क्या करना चाहिए?
किसी भी अनजान कॉल या निवेश के प्रस्ताव पर ध्यान न दें और हमेशा सतर्क रहें।
क्या गिरफ्तार आरोपियों का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड है?
इस बारे में अभी तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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