सीबीआई ने कंबोडिया स्थित साइबर ठगी गिरोह के रिक्रूटर को गिरफ्तार किया

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सीबीआई ने कंबोडिया स्थित साइबर ठगी गिरोह के रिक्रूटर को गिरफ्तार किया

सारांश

सीबीआई ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है जो भारतीय युवाओं को फर्जी नौकरी का लालच देकर कंबोडिया भेजता था। वहां उन्हें साइबर ठगी के गिरोहों में जबरन शामिल किया जाता था। यह मामला साइबर अपराध की गंभीरता को उजागर करता है।

Key Takeaways

  • सीबीआई ने कृष्ण कुमार लखवानी को गिरफ्तार किया है।
  • वह भारतीय युवाओं को फर्जी नौकरी का लालच देकर कंबोडिया भेजता था।
  • कंबोडिया में युवाओं को साइबर ठगी के गिरोहों में शामिल किया जाता था।
  • इस मामले में सीबीआई ने कई सबूत एकत्र किए हैं।
  • साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।

नई दिल्ली, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने विदेशी साइबर ठगी गिरोहों के लिए भारतीय युवाओं की भर्ती करने वाले एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी ने बताया कि यह आरोपी भारतीय नागरिकों को आकर्षक नौकरी का लालच देकर विदेश भेजता था, जहां उन्हें साइबर अपराधों में जबरन शामिल किया जाता था।

सीबीआई ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि आरोपी की पहचान कृष्ण कुमार लखवानी के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के कानपुर का निवासी है। एजेंसी को पता चला था कि कुछ संगठित साइबर अपराध सिंडिकेट विदेशी देशों में तथाकथित स्कैम कंपाउंड बनाकर बड़े पैमाने पर साइबर ठगी का संचालन कर रहे हैं। इन ठगी गिरोहों का एक मुख्यालय कंबोडिया में भी है, जहां भारतीय युवाओं को फंसाकर उनसे ऑनलाइन ठगी कराई जाती है।

जांच से पता चला कि आरोपी युवाओं को डेटा एंट्री, कस्टमर सपोर्ट या अन्य आईटी से जुड़ी नौकरियों का लालच देता था, जिसके लिए उनसे लगभग 300 से 400 अमेरिकी डॉलर तक वसूले जाते थे। उन्हें विभिन्न रास्तों से दिल्ली के माध्यम से कंबोडिया भेजा जाता था। वहां पहुंचने के बाद इन युवाओं को साइबर ठगी के गिरोहों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता था। सीबीआई के अनुसार, विदेशों में स्थित इन स्कैम कंपाउंड्स में ले जाए गए लोगों को धमकी, डराने-धमकाने और अवैध कैद जैसी परिस्थितियों में रखा जाता था। उन्हें डिजिटल अरेस्ट स्कैम, पहचान की चोरी और अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों को अंजाम देने के लिए मजबूर किया जाता था। ऐसे पीड़ितों को आमतौर पर “साइबर स्लेव” कहा जाता है।

सूचना के आधार पर निगरानी के बाद सीबीआई ने आरोपी को भारत लौटते समय ट्रैक कर लिया और उसे हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए कार्यालय लाया गया। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन की तलाशी ली गई, जिसमें कई वीडियो मिले। इन वीडियो में वह उम्मीदवारों का इंटरव्यू लेते हुए दिखाई दे रहा था, जो कथित तौर पर इन स्कैम कंपाउंड्स में भर्ती के लिए किए जा रहे थे। इसके अलावा, कई भारतीय उम्मीदवारों के पासपोर्ट की तस्वीरें भी बरामद की गईं, जिन्हें कथित तौर पर कंबोडिया स्थित इन केंद्रों में भेजा गया था।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी एक बड़े आपराधिक सिंडिकेट का हिस्सा था, जो भारतीय नागरिकों को फर्जी नौकरी के ऑफर देकर विदेश भेजने का काम करता था। विदेश पहुंचने के बाद उन्हें अवैध रूप से कैद कर साइबर ठगी के नेटवर्क में शामिल किया जाता था, जो भारत समेत कई देशों के लोगों को निशाना बनाते हैं।

सीबीआई ने आरोपी कृष्ण कुमार लखवानी को गिरफ्तार कर लिया है और पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने के लिए मामले की विस्तृत जांच जारी है।

Point of View

बल्कि साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालती है।
NationPress
15/03/2026

Frequently Asked Questions

सीबीआई ने किसे गिरफ्तार किया?
सीबीआई ने कंबोडिया में साइबर ठगी गिरोह के लिए भारतीय युवाओं की भर्ती करने वाले कृष्ण कुमार लखवानी को गिरफ्तार किया।
आरोपी युवाओं को कैसे धोखा देता था?
आरोपी युवाओं को आकर्षक नौकरी का झांसा देकर विदेश भेजता था, जहां उन्हें साइबर अपराधों में शामिल किया जाता था।
कंबोडिया में भारतीय युवाओं के साथ क्या होता था?
कंबोडिया में पहुंचने के बाद युवाओं को साइबर ठगी के गिरोहों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता था।
इस मामले में सीबीआई की कार्रवाई क्या थी?
सीबीआई ने आरोपी को भारत लौटने पर गिरफ्तार किया और उसके मोबाइल फोन की जांच की, जिसमें कई सबूत मिले।
क्या यह मामला साइबर सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है?
यह मामला साइबर अपराधों के गंभीर प्रभाव को दर्शाता है और युवाओं के लिए चेतावनी है।
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