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गुजरात में विदेशी साइबर धोखाधड़ी केंद्रों के लिए युवाओं को भेजने वाले दो आरोपी पकड़े गए

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गुजरात में विदेशी साइबर धोखाधड़ी केंद्रों के लिए युवाओं को भेजने वाले दो आरोपी पकड़े गए

सारांश

गुजरात पुलिस ने विदेशों में साइबर धोखाधड़ी के लिए युवाओं को भेजने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह मामला साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को दर्शाता है।

मुख्य बातें

गुजरात पुलिस की कार्रवाई ने साइबर अपराधों के प्रति सतर्कता बढ़ाई है।
बेरोजगार युवाओं को धोखा देकर विदेश भेजना एक गंभीर अपराध है।
साइबर ठगी के नेटवर्क में शामिल लोगों की पहचान आवश्यक है।
सामाजिक जागरूकता से ऐसे अपराधों को रोका जा सकता है।
युवाओं को विदेश में नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी से बचने की सलाह दी जाती है।

गांधीनगर, 5 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने विदेश में साइबर धोखाधड़ी केंद्रों में काम करने के लिए बेरोजगार युवाओं को भेजने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमरेली के कौशिक पेठानी और सूरत के ध्रुव डोबारिया के रूप में हुई है। पुलिस को मिली खुफिया जानकारी के आधार पर दोनों को पकड़ा गया।

जांच के अनुसार, ये दोनों आरोपी गुजरात और अन्य राज्यों के बेरोजगार युवाओं को विदेश में अच्छी नौकरी का लालच देकर उन देशों में भेजते थे, जहां साइबर ठगी का नेटवर्क चलता है।

पुलिस ने बताया कि पेठानी इस नेटवर्क में “अली बाबा” के नाम से मशहूर था और वह विदेश भेजने की सभी व्यवस्थाएं करता था।

साइबर सेंटर के पुलिस अधीक्षक विवेक भेडा ने कहा कि इस मामले में एक भर्ती नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

उन्होंने कहा, “गुजरात का साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस सभी प्रकार के साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में साइबर गुलामी से संबंधित गंभीर धोखाधड़ी में दो एजेंटों को गिरफ्तार किया गया है।”

पुलिस के अनुसार, आरोपी व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर विदेश में नौकरी के अवसरों का प्रचार करते थे। इच्छुक उम्मीदवारों को पहले इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता था और उन्हें आवश्यक कौशल का प्रशिक्षण दिया जाता था।

इसके बाद, आरोपियों द्वारा पासपोर्ट बनवाने, फ्लाइट टिकट बुक करने और अन्य यात्रा व्यवस्थाएं कर युवाओं को विदेश भेजा जाता था।

जांच में सामने आया है कि कंबोडिया, म्यांमार और लाओस जैसे देशों में भेजे गए युवाओं को बाद में जबरन साइबर धोखाधड़ी में लगाया जाता था, जिनमें क्रिप्टोकरेंसी ठगी, ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी और अन्य ऑनलाइन ठगी शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, पीड़ितों को नियंत्रित स्थानों पर रखा जाता था और उनके पासपोर्ट व मोबाइल फोन जब्त कर लिए जाते थे। जो लोग इन गतिविधियों में शामिल होने से मना करते थे, उन्हें शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी जाती थी और भारत लौटने नहीं दिया जाता था।

जांचकर्ताओं ने बताया कि आरोपी हर व्यक्ति से 70 हजार से 1.5 लाख रुपये तक वसूलते थे। यह नेटवर्क भारत के अलावा बांग्लादेश और पाकिस्तान के लोगों को भी निशाना बनाता था।

पुलिस के अनुसार, पेठानी इस नेटवर्क का मुख्य एजेंट था, जबकि डोबारिया सब-एजेंट के रूप में उसकी मदद करता था। अब तक की जांच में पता चला है कि डोबारिया ने कम से कम पांच लोगों को विदेश भेजा था, हालांकि इस नेटवर्क के जरिए भेजे गए लोगों की कुल संख्या अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है।

अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान यह भी जानकारी मिली है कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ लोग पहले संयुक्त अरब अमीरात, लाओस, थाईलैंड और श्रीलंका की यात्रा कर चुके हैं। साथ ही, दक्षिण अफ्रीका और जॉर्जिया में नए साइबर ठगी केंद्र स्थापित करने की योजना भी सामने आई है।

पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि विदेश में नौकरी के नाम पर मिलने वाले अज्ञात एजेंसियों या सोशल मीडिया विज्ञापनों से सतर्क रहें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन समाज को भी सतर्क रहना होगा।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ये आरोपी किस तरह के धोखाधड़ी में संलिप्त थे?
ये आरोपी विदेशों में साइबर धोखाधड़ी केंद्रों के लिए युवाओं को भेजने में संलिप्त थे।
पुलिस ने उन्हें कैसे गिरफ्तार किया?
पुलिस ने खुफिया जानकारी के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
क्या पीड़ितों के साथ गलत व्यवहार किया जाता था?
जी हाँ, पीड़ितों के पासपोर्ट और मोबाइल फोन जब्त कर लिए जाते थे और उन्हें शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना दी जाती थी।
क्या इस नेटवर्क के अन्य लोग भी शामिल हैं?
जी हाँ, पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर रही है।
क्या हमें ऐसे विज्ञापनों से सावधान रहना चाहिए?
हां, विदेश में नौकरी के नाम पर मिलने वाले अज्ञात एजेंसियों या सोशल मीडिया विज्ञापनों से सतर्क रहना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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