6 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाला: सीबीआई ने ₹504 करोड़ गबन मामले में 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाला: सीबीआई ने ₹504 करोड़ गबन मामले में 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की

सारांश

एक सामान्य बैंक खाता बंद करने की प्रक्रिया ने हरियाणा सरकार के ₹504 करोड़ के कथित गबन का पर्दाफाश किया। अब सीबीआई ने बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की कथित मिलीभगत के लिए 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है, जबकि ईडी की समानांतर जाँच भी जारी है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 21 मई 2026 को पंचकूला की विशेष अदालत में ₹504 करोड़ के कथित गबन मामले में 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
आरोपियों में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के 6 अधिकारी , हरियाणा के 3 सरकारी कर्मचारी , 2 शेल कंपनियाँ और उनके 3 साझेदार/निदेशक शामिल हैं।
सभी 15 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
घोटाले का खुलासा फरवरी 2026 में एक सामान्य बैंकिंग प्रक्रिया के दौरान रिकॉर्ड और वास्तविक बैलेंस में भारी अंतर से हुआ।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने हरियाणा सरकार को ₹557 करोड़ वापस करने का दावा किया है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी इस मामले में समानांतर जाँच शुरू की है।

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने 21 मई 2026 को पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में हरियाणा सरकार के ₹504 करोड़ के कथित गबन मामले में 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। आरोपियों में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह अधिकारी तथा हरियाणा सरकार के तीन विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। सभी 15 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

मुख्य आरोप और धाराएँ

चार्जशीट में आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, सबूत नष्ट करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत अपराधों से जुड़ी धाराएँ लगाई गई हैं। सीबीआई के अनुसार, 15 आरोपियों की भूमिका से संबंधित जाँच पूरी होने के बाद यह चार्जशीट दाखिल की गई है।

आरोपियों का ब्यौरा

नामजद 15 आरोपियों में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह बैंक अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड, विकास एवं पंचायत विभाग और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के तीन सरकारी कर्मचारी भी आरोपी हैं। दो शेल कंपनियाँ, उनके तीन साझेदार/निदेशक और एक निजी व्यक्ति भी चार्जशीट में नामजद हैं।

घोटाले का खुलासा कैसे हुआ

यह मामला फरवरी 2026 में तब सामने आया जब हरियाणा सरकार के विकास एवं पंचायत विभाग के एक अधिकारी ने अपना बैंक खाता बंद कर शेष राशि किसी अन्य बैंक में स्थानांतरित करने की सामान्य प्रक्रिया शुरू की। सीबीआई के अनुसार, 'इसी सामान्य बैंकिंग प्रक्रिया के दौरान इतने बड़े घोटाले का खुलासा हुआ, जिसमें रिकॉर्ड और वास्तविक बैंक बैलेंस के बीच भारी अंतर पाया गया।' आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने संबंधित सरकारी विभागों में तैनात कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर सरकारी धन का गबन किया।

जाँच का दायरा और समानांतर कार्रवाई

यह मामला पहले हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने दर्ज किया था, जिसे बाद में राज्य सरकार ने सीबीआई को सौंप दिया। गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी इस मामले में समानांतर जाँच शुरू की है, जो धन-शोधन के कोण को देख रही है। यह ऐसे समय में आया है जब बैंकिंग क्षेत्र में सरकारी धन की सुरक्षा को लेकर नियामक दबाव बढ़ रहा है।

बैंक की प्रतिक्रिया और आगे की राह

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने बताया है कि उसने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों को ₹557 करोड़ वापस कर दिए हैं — मूल कथित गबन राशि से अधिक। अब विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई की तारीख तय होने के बाद मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ईडी की समानांतर जाँच के नतीजे भी इस मामले की व्यापकता को और स्पष्ट करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह बताता है कि आंतरिक ऑडिट और नियामकीय निगरानी वर्षों तक इस गड़बड़ी को पकड़ नहीं पाई। बैंक का ₹557 करोड़ वापस करना — मूल राशि से अधिक — प्रशंसनीय है, लेकिन यह सवाल अनुत्तरित रहता है कि शेल कंपनियों के ज़रिए धन कहाँ गया और क्या वसूली पूरी है। ईडी की समानांतर जाँच यह तय करेगी कि यह एक स्थानीय साजिश थी या किसी बड़े नेटवर्क की कड़ी।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाला क्या है?
यह हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के बैंक खातों से ₹504 करोड़ की कथित हेराफेरी का मामला है, जिसमें बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत का आरोप है। मामला फरवरी 2026 में एक सामान्य खाता-बंदी प्रक्रिया के दौरान रिकॉर्ड और वास्तविक बैलेंस में भारी अंतर पाए जाने पर उजागर हुआ।
सीबीआई ने किन-किन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है?
सीबीआई ने 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के 6 अधिकारी, हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड, विकास एवं पंचायत विभाग और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के 3 सरकारी कर्मचारी, 2 शेल कंपनियाँ, उनके 3 साझेदार/निदेशक और 1 निजी व्यक्ति शामिल हैं।
इस मामले में क्या धाराएँ लगाई गई हैं?
चार्जशीट में आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, सबूत नष्ट करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत अपराधों से जुड़ी धाराएँ लगाई गई हैं। सभी 15 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने बताया है कि उसने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों को ₹557 करोड़ वापस कर दिए हैं, जो कथित गबन की मूल राशि ₹504 करोड़ से अधिक है।
क्या इस मामले में ईडी की भी जाँच हो रही है?
हाँ, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी इस मामले में समानांतर जाँच शुरू की है। ईडी की जाँच मुख्यतः धन-शोधन के पहलू पर केंद्रित होने की संभावना है, जबकि सीबीआई का मामला अदालत में चार्जशीट के साथ आगे बढ़ रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 4 सप्ताह पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले