आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाला: सीबीआई ने ₹504 करोड़ गबन मामले में 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने 21 मई 2026 को पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में हरियाणा सरकार के ₹504 करोड़ के कथित गबन मामले में 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। आरोपियों में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह अधिकारी तथा हरियाणा सरकार के तीन विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। सभी 15 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
मुख्य आरोप और धाराएँ
चार्जशीट में आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, सबूत नष्ट करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत अपराधों से जुड़ी धाराएँ लगाई गई हैं। सीबीआई के अनुसार, 15 आरोपियों की भूमिका से संबंधित जाँच पूरी होने के बाद यह चार्जशीट दाखिल की गई है।
आरोपियों का ब्यौरा
नामजद 15 आरोपियों में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह बैंक अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड, विकास एवं पंचायत विभाग और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के तीन सरकारी कर्मचारी भी आरोपी हैं। दो शेल कंपनियाँ, उनके तीन साझेदार/निदेशक और एक निजी व्यक्ति भी चार्जशीट में नामजद हैं।
घोटाले का खुलासा कैसे हुआ
यह मामला फरवरी 2026 में तब सामने आया जब हरियाणा सरकार के विकास एवं पंचायत विभाग के एक अधिकारी ने अपना बैंक खाता बंद कर शेष राशि किसी अन्य बैंक में स्थानांतरित करने की सामान्य प्रक्रिया शुरू की। सीबीआई के अनुसार, 'इसी सामान्य बैंकिंग प्रक्रिया के दौरान इतने बड़े घोटाले का खुलासा हुआ, जिसमें रिकॉर्ड और वास्तविक बैंक बैलेंस के बीच भारी अंतर पाया गया।' आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने संबंधित सरकारी विभागों में तैनात कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर सरकारी धन का गबन किया।
जाँच का दायरा और समानांतर कार्रवाई
यह मामला पहले हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने दर्ज किया था, जिसे बाद में राज्य सरकार ने सीबीआई को सौंप दिया। गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी इस मामले में समानांतर जाँच शुरू की है, जो धन-शोधन के कोण को देख रही है। यह ऐसे समय में आया है जब बैंकिंग क्षेत्र में सरकारी धन की सुरक्षा को लेकर नियामक दबाव बढ़ रहा है।
बैंक की प्रतिक्रिया और आगे की राह
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने बताया है कि उसने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों को ₹557 करोड़ वापस कर दिए हैं — मूल कथित गबन राशि से अधिक। अब विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई की तारीख तय होने के बाद मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ईडी की समानांतर जाँच के नतीजे भी इस मामले की व्यापकता को और स्पष्ट करेंगे।