जगन मोहन रेड्डी का दावा: अमरावती कभी नहीं बनेगी राजधानी, 'माविगुन' है असली विकल्प
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने 21 मई 2026 को ताडेपल्ली स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट रूप से कहा कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू का अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी बनाने का सपना कभी साकार नहीं होगा। उन्होंने इसके विकल्प के रूप में 'माविगुन' — यानी मछलीपट्टनम, विजयवाड़ा और गुंटूर के संयुक्त क्षेत्र — को राज्य की राजधानी के लिए सबसे उपयुक्त बताया।
जगन का अमरावती पर सीधा हमला
जगन मोहन रेड्डी ने कहा, 'एक, दो या तीन दशक बाद भी आंध्र प्रदेश बिना राजधानी के रह जाएगा। चंद्रबाबू जो सोच रहे हैं, वह कभी हकीकत नहीं बनेगा। यह आप भी जानते हैं, मैं भी जानता हूं और सामान्य समझ रखने वाला हर व्यक्ति इससे सहमत होगा।' उन्होंने अमरावती को व्यावहारिक दृष्टिकोण से अव्यवहार्य करार दिया।
यह ऐसे समय में आया है जब अमरावती निर्माण कार्य को लेकर लागत और समयसीमा दोनों पर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि यह परियोजना वर्षों से राजनीतिक विवाद का केंद्र रही है।
माविगुन क्यों बेहतर विकल्प — जगन के तर्क
जगन ने 'माविगुन' को बेहतर विकल्प बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र पहले से ही विकसित बुनियादी ढाँचे से लैस है। उन्होंने विस्तार से बताया: 'मछलीपट्टनम में बंदरगाह है, विजयवाड़ा में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, चार राष्ट्रीय राजमार्ग, तीन रेलवे स्टेशन, नौ मेडिकल कॉलेज और कई शैक्षणिक संस्थान हैं। यहाँ सरकार को सिर्फ कनेक्टिविटी सुधारने पर खर्च करना होगा।'
उनका दावा है कि माविगुन को घोषित करते ही वह तुरंत कार्यात्मक राजधानी बन सकती है, जबकि अमरावती के लिए तीन दशक भी पर्याप्त नहीं होंगे।
लागत पर सवाल — ₹10,665 करोड़ बनाम ₹615 करोड़
पूर्व मुख्यमंत्री ने अमरावती परियोजना की लागत की तुलना तेलंगाना से की। उन्होंने कहा कि तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने लगभग 10 लाख वर्ग फुट का सचिवालय भवन करीब ₹615 करोड़ में बनवाया था, जबकि आंध्र प्रदेश के सचिवालय की सिर्फ पाँच इमारतों की लागत ₹10,665 करोड़ से अधिक हो चुकी है।
जगन ने दावा किया कि अमरावती पर प्रस्तावित कुल खर्च का मात्र 10 प्रतिशत — यानी ₹15,000 से ₹20,000 करोड़ — खर्च करके माविगुन को 5 से 7 साल में पूरी तरह विकसित किया जा सकता है।
ठेकों और राजनीतिक हिंसा पर आरोप
जगन मोहन रेड्डी ने यह भी आरोप लगाया कि 2019 से पहले जिन कंपनियों को ठेके दिए गए थे, उन्हीं को 2024 में दोबारा काम सौंपा गया और ये ठेके 'पहले से तय और मनमाने तरीके से' दिए गए।
उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) पर हत्या की राजनीति का आरोप भी लगाया। जगन ने कहा कि 2024 में गठबंधन सरकार बनने के बाद से वाईएसआरसीपी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है। उन्होंने अपने परिवार का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके दादा राजा रेड्डी, पिता वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के भाई वाई.एस. विवेकानंद रेड्डी की हत्या में भी टीडीपी के लोगों का हाथ होने का आरोप है।
क्या होगा आगे
जगन ने दावा किया कि माविगुन प्रस्ताव को जनता का व्यापक समर्थन मिला है और इसीलिए चंद्रबाबू नायडू 'परेशान' हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चंद्रबाबू नायडू अब नई विधानसभा और नया हाई कोर्ट बनाने की भी बात कर रहे हैं, जिससे लागत और बढ़ेगी। आंध्र प्रदेश की राजधानी का प्रश्न आगामी विधानसभा सत्र में फिर से केंद्र में आने की संभावना है।