जगन मोहन रेड्डी का दावा: अमरावती कभी नहीं बनेगी राजधानी, 'माविगुन' है असली विकल्प

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जगन मोहन रेड्डी का दावा: अमरावती कभी नहीं बनेगी राजधानी, 'माविगुन' है असली विकल्प

सारांश

जगन मोहन रेड्डी ने तीखे शब्दों में कहा कि अमरावती तीन दशक बाद भी अधूरी रहेगी, जबकि 'माविगुन' — मछलीपट्टनम, विजयवाड़ा और गुंटूर का संयुक्त क्षेत्र — ₹15,000-20,000 करोड़ में 5-7 साल में तैयार हो सकता है। यह आंध्र प्रदेश की राजधानी बहस को नई धार देता है।

मुख्य बातें

जगन मोहन रेड्डी ने 21 मई 2026 को कहा कि अमरावती कभी आंध्र प्रदेश की राजधानी नहीं बन सकती।
' माविगुन ' — मछलीपट्टनम, विजयवाड़ा और गुंटूर — को ₹15,000-20,000 करोड़ में 5 से 7 साल में विकसित किया जा सकता है।
आंध्र सचिवालय की 5 इमारतों की लागत ₹10,665 करोड़ से अधिक; तेलंगाना में 10 लाख वर्ग फुट का सचिवालय ₹615 करोड़ में बना।
जगन ने 2019 से पहले के ठेकेदारों को 2024 में दोबारा काम दिए जाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
टीडीपी पर 2024 के बाद वाईएसआरसीपी नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या में संलिप्तता का आरोप।

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने 21 मई 2026 को ताडेपल्ली स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट रूप से कहा कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू का अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी बनाने का सपना कभी साकार नहीं होगा। उन्होंने इसके विकल्प के रूप में 'माविगुन' — यानी मछलीपट्टनम, विजयवाड़ा और गुंटूर के संयुक्त क्षेत्र — को राज्य की राजधानी के लिए सबसे उपयुक्त बताया।

जगन का अमरावती पर सीधा हमला

जगन मोहन रेड्डी ने कहा, 'एक, दो या तीन दशक बाद भी आंध्र प्रदेश बिना राजधानी के रह जाएगा। चंद्रबाबू जो सोच रहे हैं, वह कभी हकीकत नहीं बनेगा। यह आप भी जानते हैं, मैं भी जानता हूं और सामान्य समझ रखने वाला हर व्यक्ति इससे सहमत होगा।' उन्होंने अमरावती को व्यावहारिक दृष्टिकोण से अव्यवहार्य करार दिया।

यह ऐसे समय में आया है जब अमरावती निर्माण कार्य को लेकर लागत और समयसीमा दोनों पर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि यह परियोजना वर्षों से राजनीतिक विवाद का केंद्र रही है।

माविगुन क्यों बेहतर विकल्प — जगन के तर्क

जगन ने 'माविगुन' को बेहतर विकल्प बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र पहले से ही विकसित बुनियादी ढाँचे से लैस है। उन्होंने विस्तार से बताया: 'मछलीपट्टनम में बंदरगाह है, विजयवाड़ा में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, चार राष्ट्रीय राजमार्ग, तीन रेलवे स्टेशन, नौ मेडिकल कॉलेज और कई शैक्षणिक संस्थान हैं। यहाँ सरकार को सिर्फ कनेक्टिविटी सुधारने पर खर्च करना होगा।'

उनका दावा है कि माविगुन को घोषित करते ही वह तुरंत कार्यात्मक राजधानी बन सकती है, जबकि अमरावती के लिए तीन दशक भी पर्याप्त नहीं होंगे।

लागत पर सवाल — ₹10,665 करोड़ बनाम ₹615 करोड़

पूर्व मुख्यमंत्री ने अमरावती परियोजना की लागत की तुलना तेलंगाना से की। उन्होंने कहा कि तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने लगभग 10 लाख वर्ग फुट का सचिवालय भवन करीब ₹615 करोड़ में बनवाया था, जबकि आंध्र प्रदेश के सचिवालय की सिर्फ पाँच इमारतों की लागत ₹10,665 करोड़ से अधिक हो चुकी है।

जगन ने दावा किया कि अमरावती पर प्रस्तावित कुल खर्च का मात्र 10 प्रतिशत — यानी ₹15,000 से ₹20,000 करोड़ — खर्च करके माविगुन को 5 से 7 साल में पूरी तरह विकसित किया जा सकता है।

ठेकों और राजनीतिक हिंसा पर आरोप

जगन मोहन रेड्डी ने यह भी आरोप लगाया कि 2019 से पहले जिन कंपनियों को ठेके दिए गए थे, उन्हीं को 2024 में दोबारा काम सौंपा गया और ये ठेके 'पहले से तय और मनमाने तरीके से' दिए गए।

उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) पर हत्या की राजनीति का आरोप भी लगाया। जगन ने कहा कि 2024 में गठबंधन सरकार बनने के बाद से वाईएसआरसीपी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है। उन्होंने अपने परिवार का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके दादा राजा रेड्डी, पिता वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के भाई वाई.एस. विवेकानंद रेड्डी की हत्या में भी टीडीपी के लोगों का हाथ होने का आरोप है।

क्या होगा आगे

जगन ने दावा किया कि माविगुन प्रस्ताव को जनता का व्यापक समर्थन मिला है और इसीलिए चंद्रबाबू नायडू 'परेशान' हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चंद्रबाबू नायडू अब नई विधानसभा और नया हाई कोर्ट बनाने की भी बात कर रहे हैं, जिससे लागत और बढ़ेगी। आंध्र प्रदेश की राजधानी का प्रश्न आगामी विधानसभा सत्र में फिर से केंद्र में आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विशाखापट्टनम और कर्नूल — ने राज्य को वर्षों की अनिश्चितता में धकेला था। अमरावती सचिवालय की ₹10,665 करोड़ की लागत वैध सवाल उठाती है, लेकिन माविगुन के लिए ₹15,000-20,000 करोड़ का आँकड़ा बिना विस्तृत योजना के केवल राजनीतिक दावा है। आंध्र प्रदेश की राजधानी का प्रश्न बार-बार दलीय हितों की भेंट चढ़ा है — असली ज़रूरत किसी एक नेता के विज़न की नहीं, बल्कि एक पारदर्शी और बाध्यकारी कार्यान्वयन ढाँचे की है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जगन मोहन रेड्डी का 'माविगुन' प्रस्ताव क्या है?
'माविगुन' मछलीपट्टनम, विजयवाड़ा और गुंटूर के संयुक्त क्षेत्र का संक्षिप्त नाम है, जिसे जगन मोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश की राजधानी के लिए सबसे व्यावहारिक विकल्प बताया है। उनके अनुसार यह क्षेत्र पहले से बंदरगाह, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, राष्ट्रीय राजमार्गों और चिकित्सा संस्थानों से सुसज्जित है।
जगन के अनुसार माविगुन को विकसित करने में कितना खर्च आएगा?
जगन मोहन रेड्डी का दावा है कि माविगुन को ₹15,000 से ₹20,000 करोड़ में 5 से 7 साल में पूरी तरह विकसित किया जा सकता है। यह अमरावती पर प्रस्तावित कुल खर्च का लगभग 10 प्रतिशत है।
अमरावती सचिवालय की लागत पर जगन ने क्या आरोप लगाए?
जगन ने कहा कि आंध्र प्रदेश सचिवालय की केवल पाँच इमारतों की लागत ₹10,665 करोड़ से अधिक हो चुकी है, जबकि तेलंगाना में लगभग 10 लाख वर्ग फुट का सचिवालय ₹615 करोड़ में बना था। उन्होंने इसे अत्यधिक और अनुचित खर्च करार दिया।
जगन ने टीडीपी पर क्या आरोप लगाए?
जगन मोहन रेड्डी ने टीडीपी पर 2024 में गठबंधन सरकार बनने के बाद से वाईएसआरसीपी नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या कराने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों — दादा राजा रेड्डी और चाचा वाई.एस. विवेकानंद रेड्डी — की हत्याओं में भी टीडीपी की संलिप्तता का आरोप दोहराया।
आंध्र प्रदेश की राजधानी विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?
आंध्र प्रदेश की राजधानी का सवाल 2014 में तेलंगाना के विभाजन के बाद से विवादास्पद रहा है। चंद्रबाबू नायडू ने अमरावती को नई राजधानी के रूप में विकसित करना शुरू किया था, लेकिन जगन के कार्यकाल (2019-2024) में तीन राजधानियों की योजना लाई गई, जो अदालती रोक में उलझ गई। 2024 में सत्ता में लौटने के बाद नायडू ने फिर से अमरावती को प्राथमिकता दी है।
राष्ट्र प्रेस
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