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आंध्र प्रदेश की <b>अमरावती</b> को मिली स्थायी राजधानी का दर्जा: एक नया अध्याय

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आंध्र प्रदेश की <b>अमरावती</b> को मिली स्थायी राजधानी का दर्जा: एक नया अध्याय

सारांश

अमरावती को आधिकारिक राजधानी का दर्जा मिलने से आंध्र प्रदेश में राजनीतिक स्थिरता की नई उम्मीद जगी है। यह निर्णय भारतीय संसद द्वारा पारित किए गए एक महत्वपूर्ण बिल के बाद आया है।

मुख्य बातें

अमरावती को मिला आधिकारिक और स्थायी राजधानी का दर्जा।
भारत सरकार ने जारी किया गजट नोटिफिकेशन।
राज्य में राजनीतिक स्थिरता की नई उम्मीद।
किसानों के हितों का ध्यान रखा गया।
2015 से शुरू हुई थी अमरावती की राजधानी बनाने की प्रक्रिया।

अमरावती, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश की अमरावती को अब आधिकारिक और स्थायी राजधानी का दर्जा प्राप्त हुआ है। इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए भारत सरकार ने सोमवार को एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया।

यह पहल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति के बाद हुई, जिन्होंने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल, 2026 को मंजूरी दी। यह बिल पिछले हफ्ते संसद में पारित हुआ था।

कानून मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) अधिनियम, 2026 को 2 जून 2024 से लागू माना जाएगा।

इस संशोधन के तहत 2014 के आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम में संशोधन किया गया है। अधिनियम के अनुसार, 'अमरावती' में आंध्र प्रदेश कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी अधिनियम, 2014 के तहत घोषित राजधानी क्षेत्र भी शामिल है।

संसद ने 2 अप्रैल को इस बिल को अंतिम रूप से मंजूरी दी और अमरावती को आधिकारिक राजधानी के रूप में घोषित किया। राज्यसभा ने इसे वॉइस वोट द्वारा पास किया, जबकि लोकसभा ने इसे एक दिन पहले ही समर्थन दिया।

इस नए कानून ने वर्षों की राजनीतिक असमंजस और तीन-राजधानी मॉडल की चर्चाओं को समाप्त कर दिया है। अब भविष्य में राजधानी बदलने या तीन-राजधानी योजना को लागू करने के प्रयास असंभव होंगे।

संसद में इस बिल पर कुल 35 सांसदों ने चर्चा की। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के दो सांसदों को छोड़कर सभी ने इस बिल का समर्थन किया। वाईएसआरसीपी ने इसे किसानों के हितों की अनदेखी बताते हुए विरोध किया, क्योंकि किसानों ने राज्य की राजधानी के विकास के लिए अपनी भूमि दी थी।

अमरावती को राजधानी बनाने की नींव 2015 में तेलुगु देशम पार्टी के शासनकाल में रखी गई थी। 2019 में वाईएसआरसीपी के सत्ता में आने के बाद अमरावती के सभी प्रोजेक्ट्स को रोक दिया गया और तीन-राजधानी का विचार सामने आया।

हालांकि, 2024 में टीडीपी-नेता एनडीए के सत्ता में लौटने के बाद, अमरावती को एकमात्र राजधानी बनाने का निर्णय लिया गया और परियोजनाओं को पिछले साल फिर से शुरू किया गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राज्य के किसानों के हितों को भी ध्यान में रखेगा।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमरावती को कब राजधानी का दर्जा मिला?
अमरावती को 6 अप्रैल 2024 को आधिकारिक और स्थायी राजधानी का दर्जा मिला।
यह फैसला किसके द्वारा लिया गया?
यह फैसला भारतीय संसद द्वारा पारित आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल, 2026 के बाद लिया गया।
कब से यह अधिनियम लागू होगा?
आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) अधिनियम, 2026 को 2 जून 2024 से लागू माना जाएगा।
इस निर्णय का किसानों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह निर्णय किसानों के हितों को ध्यान में रखता है और कृषि विकास को बढ़ावा देगा।
अमरावती को राजधानी बनाने की शुरुआत कब हुई थी?
अमरावती को राजधानी बनाने की नींव 2015 में तेलुगु देशम पार्टी के शासनकाल में रखी गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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